मुद्दों से भटका ‘कॉकरोच आंदोलन’: छात्र माँगें छूटीं पीछे, राजनीतिक दलों का बना नया अखाड़ा

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नई दिल्ली:मूल रूप से युवाओं और छात्रों द्वारा शुरू किया गया ‘कॉकरोच आंदोलन’ अब अपने रास्ते से भटक गया है। जंतर-मंतर पर विपक्षी नेताओं और छात्र संगठनों के हाई-वोल्टेज ड्रामे तथा हिंसक झड़पों के कारण युवाओं की असली माँगें (जैसे पेपर लीक और बेरोजगारी) पीछे छूट गई हैं और यह आंदोलन राजनीतिक दलों का अखाड़ा बन कर रह गया है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड

राजनीतिक अखाड़ा बना आंदोलन
अभिजीत दीपके द्वारा शुरू की गई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का यह आंदोलन, जो कभी प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर केंद्रित था, अब पूरी तरह से राजनीतिक छाया में आ गया है। जंतर-मंतर पर आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के नेताओं की मौजूदगी और उनके बयानों ने इसे सीधे तौर पर सत्ता पक्ष बनाम विपक्ष की लड़ाई में बदल दिया है।

असली मुद्दों की अनदेखी
राजनीतिक रोटियाँ सेकने की होड़ में छात्रों के भविष्य और उनकी वास्तविक समस्याओं का मुद्दा कहीं खो गया है। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग और संसद तक मार्च निकालने की जिद में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हुआ। धरना स्थलों पर भीड़ कम होने के बावजूद राजनीतिक नेताओं की सक्रियता ने इस बात को पुख्ता कर दिया है कि यह आंदोलन अब छात्रों के हाथों से निकलकर राजनीतिक मंच बन चुका है।

खोखले होते वादे और निराशा
शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक पर सख्त कानून और रोजगार जैसे ज्वलंत विषयों पर सार्थक चर्चा होने के बजाय, यह पूरा आंदोलन राजनेताओं के भाषणों और विरोध प्रदर्शनों के शोर में दब गया है।


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