छात्रों का आंदोलन या राजनीतिक अखाड़ा? सीजेपी के प्रदर्शन पर तेज हुई सियासत, राजनाथ बोले- छात्रों को राजनीतिक औजार बनाया जा रहा

Spread the love


उत्तराखंड ,नई दिल्ली। NEET परीक्षा में कथित धांधली और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन ने अब राष्ट्रीय राजनीति का रूप ले लिया है। जंतर-मंतर से शुरू हुआ छात्र आंदोलन संसद, सड़क और राजनीतिक दलों के बीच टकराव का केंद्र बन गया है। इस बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्ष पर छात्रों का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड


बुधवार को एएनआई से बातचीत में राजनाथ सिंह ने कहा कि छात्रों की समस्याओं को सुनना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन कुछ राजनीतिक दल अपने स्वार्थ के लिए युवाओं को आंदोलन की आड़ में राजनीतिक औजार बनाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि छात्रों के भविष्य को राजनीति का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।
सोमवार को हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प हुई, जिसमें कई छात्र और पुलिसकर्मी घायल हुए। इस घटना की गूंज संसद के मानसून सत्र में भी सुनाई दी और लगातार हंगामे के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही प्रभावित रही।
इधर केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह NEET और पेपर लीक के मुद्दे पर संसद में चर्चा के लिए तैयार है। वहीं कांग्रेस का कहना है कि चर्चा से पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए।
मंगलवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सहित विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च किया। उच्च सुरक्षा क्षेत्र में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोक दिया, जिसके दौरान धक्का-मुक्की हुई। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पुलिस कार्रवाई में राहुल गांधी घायल हुए, जबकि पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई को आवश्यक बताया।
भाजपा ने राहुल गांधी के प्रदर्शन पर तीखी प्रतिक्रिया दी। पूर्व केंद्रीय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि राहुल गांधी ऐसे परिवार से आते हैं जिसके कई सदस्य प्रधानमंत्री रहे हैं, इसलिए उन्हें प्रधानमंत्री आवास की गरिमा और सुरक्षा व्यवस्था का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या देश किसी एक नेता की जिद और अहंकार से चलेगा। भाजपा ने कांग्रेस के विरोध में देशभर में कांग्रेस कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन करने का भी ऐलान किया है।
रवि शंकर प्रसाद ने यह भी कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य को लेकर गंभीर है, पेपर लीक मामलों में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है, रद्द परीक्षाएं दोबारा कराई गई हैं और परिणाम भी घोषित किए जा चुके हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या छात्रों के वास्तविक मुद्दे राजनीतिक टकराव की भेंट चढ़ रहे हैं। एक ओर छात्र परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दल एक-दूसरे पर छात्रों के आंदोलन का राजनीतिक लाभ उठाने के आरोप लगा रहे हैं। ऐसे माहौल में यह आवश्यक है कि छात्रों की मूल मांगों पर गंभीरता से विचार हो और लोकतांत्रिक तरीके से समाधान निकाला जाए, ताकि युवाओं का भविष्य राजनीतिक संघर्ष का माध्यम न बने।


Spread the love