रांची में छात्र आंदोलन के दौरान आइसा राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा पर स्याही फेंकने का आरोप, युवक हिरासत में

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रांची। छात्र आंदोलन को समर्थन देने रांची पहुंचीं ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा पर विधानसभा मार्च के दौरान स्याही फेंके जाने का मामला सामने आया है। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने युवक को पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने युवक को हिरासत में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड


घटना के संबंध में आइसा और आंदोलन से जुड़े लोगों का आरोप है कि स्याही फेंकने वाला युवक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) से जुड़ा छात्र है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार युवक विरोध के दौरान धार्मिक नारे भी लगा रहा था। हालांकि, युवक की संगठनात्मक संबद्धता और घटना के पीछे की वास्तविक वजह की आधिकारिक पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
आइसा की ओर से घटना की कड़ी निंदा की गई है। संगठन का आरोप है कि छात्र आंदोलन में अपनी बात रखने के बजाय विरोध करने वालों ने अपमान और हिंसा का रास्ता अपनाया। संगठन ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी आंदोलन या विचार का विरोध तर्क और संवाद के माध्यम से किया जाना चाहिए।
नेहा बोरा ने घटना को लेकर दक्षिणपंथी संगठनों की विचारधारा पर गंभीर सवाल उठाए। उनके समर्थकों का आरोप है कि लंबे समय से फैलाई जा रही राजनीतिक और वैचारिक कटुता का असर अब छात्र राजनीति में भी दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारियों को डराने या अपमानित करने की कोशिश से छात्र अपनी मांगों से पीछे हटने वाले नहीं हैं।
घटना के बाद मौके पर कुछ समय के लिए तनाव का माहौल भी बना। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए युवक को हिरासत में लिया। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटा रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि स्याही फेंकने की घटना किन परिस्थितियों में हुई तथा इसमें युवक की भूमिका क्या थी।
आइसा नेताओं ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। संगठन का कहना है कि छात्र आंदोलनों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार की रक्षा जरूरी है।
इस घटना ने झारखंड में छात्र राजनीति को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज कर दी है। एक ओर छात्र संगठन इसे वैचारिक असहिष्णुता से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं पुलिस की जांच के बाद ही घटना से जुड़े सभी तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।


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