18 अगस्त 2026उत्तराखंड राज्य आंदोलन के पुरोधा और ‘उत्तराखंड के गांधी’ के नाम से विख्यात स्वर्गीय इंद्रमणि बडोनी की आज 27वीं पुण्यतिथि है। इस अवसर पर आज पूरे प्रदेश में विभिन्न सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों और राज्य आंदोलनकारियों ने उन्हें याद कर श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। ऋषिकेश, मसूरी, विकासनगर और देहरादून सहित राज्य के अनेक हिस्सों में उनके चित्र तथा प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर उनके ऐतिहासिक संघर्षों को याद किया गया।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, अध्यक्ष,उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड
उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद ने ‘पर्वतीय गांधी’ इंद्रमणि बडोनी को दी भावभीनी श्रद्धांजलि, सपनों का राज्य बनाने का लिया संकल्प।उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद द्वारा आज ‘पर्वतीय गांधी’ स्वर्गीय इंद्रमणि बडोनी की पुण्यतिथि पर प्रदेश भर में श्रद्धांजलि कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
बडोनी जी के सपनों के उत्तराखंड पर जोर देते हुए कहा कि आज भी पहाड़ों से पलायन, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मूल मुद्दे अधूरे हैं। आंदोलनकारियों ने संकल्प लिया कि जब तक स्वर्गीय बडोनी जी के सपनों के अनुरूप जल, जंगल और जमीन की रक्षा नहीं हो जाती, उनका संघर्ष जारी रहेगा। परिषद ने सरकार से मांग की कि बडोनी जी के विचारों और जीवन संघर्ष को स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाए ताकि युवा पीढ़ी उनके आदर्शों को सीख सके।
ऋषिकेश और मसूरी में विशेष श्रद्धांजलि कार्यक्रम
ऋषिकेश स्थित विठ्ठल आश्रम (जहाँ 18 अगस्त 1999 को उनका निधन हुआ था) और बडोनी चौक मसूरी पर भव्य श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन हुआ। ऋषिकेश में आयोजित कार्यक्रम में स्थानीय विधायक, पूर्व कैबिनेट मंत्रियों और गणमान्य नागरिकों ने बडोनी जी के चित्र पर पुष्प अर्पित किए। वक्ताओं ने कहा कि पृथक उत्तराखंड राज्य का जो स्वरूप आज हम देख रहे हैं, उसकी नींव में बडोनी जी का त्याग और सादगीपूर्ण संघर्ष है। मसूरी में स्थानीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने ‘इंद्रमणि बडोनी अमर रहें’ के नारों के साथ उनके योगदान को याद किया और सरकार से उनके जीवन दर्शन को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग उठाई।
अहिंसा के मार्ग पर लड़ा राज्य निर्माण का आंदोलन
इंद्रमणि बडोनी का जन्म टिहरी गढ़वाल के अखोड़ी गांव में हुआ था। उन्होंने उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान हमेशा शांति और अहिंसा का मार्ग चुना। उनके इसी दृढ़ संकल्प और करिश्माई व्यक्तित्व के कारण प्रख्यात अंतरराष्ट्रीय अखबार ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ ने उन्हें “माउंटेन गांधी” (पर्वतीय गांधी) के रूप में संबोधित किया था। साल 1988 में पिथौरागढ़ के तवाघाट से देहरादून तक की उनकी 105 दिनों की ऐतिहासिक पदयात्रा ने पूरे उत्तराखंड में अलग राज्य की अलख जगाई थी। इसके बाद 1994 में पौड़ी में आमरण अनशन कर उन्होंने पृथक राज्य आंदोलन को एक निर्णायक मोड़ दिया था।
आंदोलनकारियों ने जताई चिंता; सपनों का उत्तराखंड अभी बाकी
विकासनगर और मसूरी में उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) तथा अन्य मूल आंदोलनकारियों ने श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ ही वर्तमान राजनीतिक व सामाजिक व्यवस्था पर चिंता भी व्यक्त की। वरिष्ठ आंदोलनकारियों ने कहा कि जिस गैरसैंण को राजधानी बनाने और पहाड़ों से पलायन रोकने का सपना स्वर्गीय बडोनी जी ने देखा था, वह आज भी अधूरा है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि बडोनी जी के आदर्शों को आत्मसात कर उत्तराखंड के विकास के लिए आगे आएं।
मुख्यमंत्री सहित राज्य के प्रमुख नेताओं ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से पृथक राज्य निर्माण के इस अमर जननायक को कोटि-कोटि नमन करते हुए उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प दोहराया।
