देहरादून। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस ने जहां जनता की भागीदारी से घोषणा पत्र तैयार करने की रणनीति बनाई है, वहीं दूसरी ओर राज्य में भ्रष्टाचार, खनन व्यवस्था, खाद्य सुरक्षा और प्राकृतिक आपदाओं से जुड़ी कई घटनाओं ने लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
जनता से सुझाव लेकर घोषणा पत्र तैयार करेगी कांग्रेस
उत्तराखंड कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव के लिए जनता की राय के आधार पर घोषणा पत्र तैयार करेगी। कांग्रेस भवन में घोषणा पत्र समिति की पहली बैठक के बाद समिति के अध्यक्ष भुवन कापड़ी ने बताया कि पार्टी ई-मेल और व्हाट्सऐप के माध्यम से सीधे जनता से सुझाव आमंत्रित करेगी।
उन्होंने बताया कि इसके लिए ukpccmission2027@gmail.com जारी किया गया है। जल्द ही एक व्हाट्सऐप नंबर भी जारी किया जाएगा, ताकि प्रदेश के अधिक से अधिक लोग अपनी राय पार्टी तक पहुंचा सकें।
कापड़ी ने कहा कि कांग्रेस जनता की भागीदारी वाली सरकार बनाने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रही है। उनका आरोप था कि वर्तमान में राज्य में ठेकेदारों की सरकार काम कर रही है, जो दिल्ली और नागपुर से संचालित हो रही है।
उन्होंने कहा कि पार्टी का उद्देश्य केवल चुनावी वादे करना नहीं है, बल्कि एक ऐसा दस्तावेज तैयार करना है, जिसमें उत्तराखंड के भविष्य की स्पष्ट रूपरेखा दिखाई दे।
किसान, युवा, महिलाएं और व्यापारियों से सीधे संवाद करेगी पार्टी
कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कार्यकर्ता जिलों और विधानसभा क्षेत्रों में जाकर लोगों से सीधे संवाद करेंगे।
इस अभियान में किसानों, युवाओं, महिलाओं, कर्मचारियों, व्यापारियों, सैनिकों और अर्धसैनिक बलों से जुड़े लोगों के सुझाव लिए जाएंगे। समिति के सदस्य सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि यह घोषणा पत्र प्रदेश की सवा करोड़ जनता की सहभागिता का दस्तावेज बनेगा।
वहीं, डॉ. प्रेम बहुखंडी ने कहा कि कांग्रेस गांधीवादी सर्वोदय विकास मॉडल के आधार पर प्रदेश के विकास की नई दिशा तय करेगी। सुजाता पॉल ने महिलाओं और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात कही।
युवा आयोग के गठन से पहले सरकार से माफी की मांग
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सरकार पर युवाओं की उपेक्षा का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार युवा आयोग का गठन करना चाहती है तो सबसे पहले युवाओं पर हुए लाठीचार्ज के लिए माफी मांगनी चाहिए।
गोदियाल ने अंकिता भंडारी हत्याकांड का उल्लेख करते हुए कहा कि साढ़े तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी पीड़ित परिवार न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है।
उन्होंने भाजपा के उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत गौतम को राष्ट्रीय कार्यकारिणी से हटाए जाने को भी राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए इसे भाजपा की चिंता का संकेत बताया।
खाद्य विभाग ने व्यापारियों को दी नई लाइसेंस व्यवस्था की जानकारी
खाद्य सुरक्षा विभाग ने व्यापारियों के साथ बैठक कर लाइसेंस और पंजीकरण की नई व्यवस्था की जानकारी दी।
सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा अश्विनी सिंह ने बताया कि जिन व्यापारियों का वार्षिक कारोबार डेढ़ करोड़ रुपये तक होगा, उन्हें राज्य स्तरीय लाइसेंस दिया जाएगा। इसकी वार्षिक फीस 100 रुपये निर्धारित की गई है।
डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक और 50 करोड़ रुपये तक का कारोबार करने वाले व्यापारियों को भी राज्य स्तरीय लाइसेंस जारी किया जाएगा, जिसके लिए पांच हजार रुपये वार्षिक शुल्क निर्धारित किया गया है।
वहीं, 50 करोड़ रुपये से अधिक वार्षिक कारोबार करने वाले खाद्य व्यापारियों को केंद्रीय लाइसेंस जारी किया जाएगा, जिसकी वार्षिक फीस 7500 रुपये होगी।
होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को दिए गए विशेष निर्देश
खाद्य सुरक्षा विभाग ने होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को स्वच्छता संबंधी कई महत्वपूर्ण निर्देश भी जारी किए हैं।
विभाग ने स्पष्ट किया कि एक ही तेल का बार-बार उपयोग करने से बचना चाहिए। खाद्य प्रतिष्ठानों में नियमित रूप से पेस्ट कंट्रोल कराया जाए। खाद्य पदार्थों को रखने और परोसने के लिए अखबार का उपयोग न किया जाए।
इसके अलावा, शाकाहारी और मांसाहारी खाद्य पदार्थों को अलग-अलग रेफ्रिजरेटर में रखने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि एनालॉग पनीर पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है और केवल शुद्ध पनीर की बिक्री की जानी चाहिए।
हरिद्वार में रिश्वतखोर अधिकारी का हाई वोल्टेज ड्रामा
हरिद्वार जिले में आर्थिक प्रोत्साहन राशि के बदले रिश्वत मांगने वाले क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारी कुलदीप कुमार को विजिलेंस टीम ने रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
आरोप है कि उन्होंने 1.12 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि जारी करने के बदले 35 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी।
गिरफ्तारी से बचने के लिए अधिकारी कार्यालय की दूसरी मंजिल तक दौड़कर पहुंचे और शौचालय में खुद को बंद कर लिया। उन्होंने रिश्वत की रकम शौचालय की सीट के पाइप में छिपा दी।
हालांकि, विजिलेंस टीम ने तलाशी के दौरान रकम बरामद कर ली। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।
एक अक्टूबर से बिना डिजिटल एकीकरण वाले खनन पट्टों का ई-रवन्ना होगा बंद
प्रदेश में अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए खनन विभाग ने बड़ा निर्णय लिया है। एक अक्टूबर 2026 से केवल उन्हीं खनन पट्टों, स्टोन क्रशर और स्क्रीनिंग प्लांटों से ई-रवन्ना जारी होगा, जिनका एकीकरण माइनिंग डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन एंड सर्विलांस सिस्टम (एमडीटीएसएस) से किया जाएगा।
विभाग ने सभी संबंधित इकाइयों को 15 सितंबर तक कंप्यूटरीकृत धर्मकांटा, सीसीटीवी कैमरा, आरएफआईडी रीडर और स्कैनर को विभागीय सॉफ्टवेयर से जोड़ने के निर्देश दिए हैं।
नई व्यवस्था के लागू होने के बाद खनिज परिवहन करने वाले वाहनों का वजन और अन्य विवरण सीधे विभागीय पोर्टल पर दिखाई देगा। इससे अवैध खनन और ओवरलोडिंग पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में सहायता मिलेगी।
विष्णुगाड़ परियोजना हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 10 हुई
चमोली जिले के मायापुर (पीपलकोटी) स्थित टीएचडीसी की विष्णुगाड़ जल विद्युत परियोजना में हुए हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है।
13 अगस्त को सुरंग में पानी के रिसाव और भूस्खलन के कारण यह दुर्घटना हुई थी। उस समय सुरंग के भीतर एचसीसी कंपनी के लगभग 22 श्रमिक कार्य कर रहे थे।
लगभग 117 घंटे तक चले बचाव अभियान के दौरान 12 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जबकि 10 श्रमिकों की मृत्यु हो गई।
मृतकों में प्रदीप पंवार, जितेंद्र कुमार, मुकेश सिंह, दुर्लभ शर्मा, विजय हंसदा, लोकेश्वर, भुनेश्वर, देवनाथ, लुकास टोपनो और चेतन पोयाम शामिल हैं।
तमक नाले में लापता हवलदार की तलाश जारी
चमोली जिले के ज्योतिर्मठ तहसील क्षेत्र के ग्राम लोंग सेगड़ी के पास तमक नाले में अतिवृष्टि के कारण आए तेज बहाव में सीमा सड़क संगठन की 123 इकाई में तैनात चालक हवलदार पंकज लापता हो गए हैं।
उनकी तलाश के लिए प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सीमा सड़क संगठन और गढ़वाल राइफल्स की संयुक्त टीमें लगातार अभियान चला रही हैं।
रेस्क्यू अभियान में तीन एक्सकेवेटर, 50 से अधिक जवान, दो प्रशिक्षित खोजी कुत्ते और ड्रोन की सहायता ली जा रही है। दुर्गम क्षेत्रों में मलबे और नदी के किनारों की लगातार निगरानी की जा रही है।
उत्तराखंड में एक ओर राजनीतिक दल चुनावी रणनीति तैयार करने में जुटे हैं, तो दूसरी ओर भ्रष्टाचार, प्राकृतिक आपदाएं, खनन और जनसुरक्षा से जुड़े मुद्दे सरकार और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आए हैं। आने वाले दिनों में इन सभी विषयों पर राज्य की राजनीति और प्रशासनिक गतिविधियां और अधिक तेज होने की संभावना है।
