रुद्रपुर। उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू और डेंगू का संक्रमण बढ़ने के बीच स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। देहरादून में रविवार को 83 सैंपलों की जांच में 31 मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई। इनमें 23 मरीज देहरादून और आठ अन्य जिलों के हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अब तक 1,293 सैंपलों की जांच में 484 मरीज संक्रमित मिले हैं। इनमें 398 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि 84 सक्रिय मामले हैं। संक्रमितों में 227 महिलाएं और 257 पुरुष शामिल हैं।
डेंगू की स्थिति भी चिंता बढ़ा रही है। जिले में एलाइजा जांच के दौरान दो नए मरीज मिले हैं। अब तक 29,092 सैंपलों की जांच में 162 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है। इनमें 140 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि 22 मरीज उपचाराधीन हैं। रोकथाम के लिए आशा कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों का घर-घर सर्वे जारी है। अब तक 9,46,202 घरों का सर्वे और 59,38,155 कंटेनरों की जांच की जा चुकी है। इनमें 22,286 कंटेनरों में मच्छरों के लार्वा मिले हैं।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को सतर्क रहने और जागरूकता अभियान तेज करने के निर्देश दिए हैं। अस्पतालों में डेंगू के लिए अलग वार्ड तैयार किए गए हैं।
179 वाहनों के चालान, 12 सीज
इधर, सप्ताहांत में परिवहन विभाग ने देहरादून, ऋषिकेश और हरिद्वार क्षेत्र में अंतरजनपदीय सघन चेकिंग अभियान चलाकर 179 वाहनों के चालान किए और 12 वाहन बंद/सीज किए। अभियान में बिना टैक्स, ओवरलोडिंग और वैध दस्तावेजों के बिना संचालित वाहनों पर कार्रवाई की गई।
जांच में 42 वाहन बिना टैक्स संचालित मिले, जबकि 29 वाहनों पर टैक्स बकाया पाया गया। क्षमता से अधिक माल या यात्री ले जाने वाले 34 वाहन पकड़े गए। 19 वाहनों के पास प्रदूषण प्रमाणपत्र, 13 के पास फिटनेस, 19 के पास परमिट और 11 के पास इंश्योरेंस नहीं मिला। गंभीर उल्लंघन के मामलों में 19 वाहनों के परमिट और फिटनेस निरस्त करने की संस्तुति की गई।
ऊधम सिंह नगर में स्वास्थ्य और सुरक्षा पर सवाल
ऊधम सिंह नगर में भी सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। रुद्रपुर का जिला चिकित्सालय जवाहरलाल नेहरू और मेडिकल कॉलेज जिले की बड़ी आबादी के लिए प्रमुख सरकारी चिकित्सा केंद्र हैं। ऐसे में बढ़ते संक्रमण के बीच अस्पतालों में पर्याप्त डॉक्टर, विशेषज्ञ, दवाएं, जांच सुविधाएं और बेड उपलब्ध कराने की चुनौती बनी हुई है।
वहीं, कानून-व्यवस्था को लेकर भी जनता की अपेक्षाएं बढ़ी हैं। ऐसे में लोगों का कहना है कि यातायात नियमों का पालन कराने के साथ अपराध नियंत्रण पर भी उतना ही जोर होना चाहिए। सरकार और प्रशासन को स्वास्थ्य, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था तीनों मोर्चों पर समान गंभीरता से काम करने की जरूरत है।
परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के लिए औचक चेकिंग आगे भी जारी रहेगी। नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
