फोर्ट हूड हमले के दोषी निदाल हसन को फायरिंग स्क्वॉड से मौत की सजा की मंजूरी, ट्रंप के फैसले से फिर चर्चा में आया 2009 का हमला


वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वर्ष 2009 के कुख्यात फोर्ट हूड सैन्य हमले के दोषी पूर्व अमेरिकी सैन्य अधिकारी निदाल हसन को फायरिंग स्क्वॉड के जरिए मृत्युदंड दिए जाने की मंजूरी दे दी है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन के अनुसार, यह निर्णय रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ की सिफारिश के बाद लिया गया। ट्रंप की मंजूरी के बाद अब अमेरिकी सेना के अधिकारी मृत्युदंड की प्रक्रिया के तहत यह तय करेंगे कि हसन को कब और कहां सजा दी जाएगी।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड


निदाल हसन को वर्ष 2013 में सैन्य अदालत ने 13 लोगों की हत्या और 32 अन्य लोगों की हत्या के प्रयास का दोषी ठहराया था। सैन्य जूरी ने उसे मौत की सजा सुनाई थी। इसके बाद से वह कंसास स्थित फोर्ट लीवेनवर्थ की यूनाइटेड स्टेट्स डिसिप्लिनरी बैरक्स में सैन्य ‘डेथ रो’ में बंद है।
रक्षा मंत्री की सिफारिश के बाद ट्रंप की मंजूरी
राष्ट्रपति ट्रंप के इस फैसले के बाद हसन के मामले में मृत्युदंड की प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सोशल मीडिया के माध्यम से इस निर्णय की जानकारी साझा की। मामला अमेरिकी सैन्य न्याय व्यवस्था से जुड़ा होने के कारण रक्षा विभाग और सेना की ओर से आगे की प्रक्रिया को लेकर सावधानी बरती जा रही है।
हसन को फायरिंग स्क्वॉड के जरिए मृत्युदंड दिए जाने का फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अमेरिका में इस तरह की सजा बेहद दुर्लभ है। हालांकि कुछ राज्यों ने इसे कानूनी विकल्प के रूप में मान्यता दे रखी है।
अमेरिका के पांच राज्यों में फायरिंग स्क्वॉड को कानूनी मान्यता
अमेरिका में इडाहो, मिसिसिपी, ओक्लाहोमा, साउथ कैरोलिना और यूटा में फायरिंग स्क्वॉड के जरिए मृत्युदंड देने की व्यवस्था को कानूनी मंजूरी मिली हुई है। हालांकि हसन का मामला सामान्य राज्य अदालत का मामला नहीं है। उस पर सैन्य कानून के तहत मुकदमा चला और उसे सैन्य अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी।
इसी वजह से उसके मामले में अमेरिकी रक्षा विभाग और सेना की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अब सैन्य अधिकारी निर्धारित नियमों के तहत आगे की कार्रवाई करेंगे।
क्या हुआ था 5 नवंबर 2009 को?
निदाल हसन का नाम अमेरिका के सबसे भयावह सैन्य गोलीकांडों में दर्ज है। 5 नवंबर 2009 को टेक्सास स्थित फोर्ट हूड सैन्य प्रतिष्ठान में सैनिकों की तैनाती से पहले की औपचारिकताओं से जुड़े एक केंद्र में उसने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी थी।
हसन उस समय अमेरिकी सेना में मेजर और सैन्य मनोचिकित्सक के पद पर तैनात था। वह हथियार लेकर सैन्य परिसर में पहुंचा और वहां मौजूद सैनिकों पर गोलियां चला दीं। इस हमले में 13 लोगों की मौत हुई, जबकि 32 अन्य घायल हुए। मृतकों में एक गर्भवती महिला सैनिक भी शामिल थी।
यह हमला ऐसे समय हुआ था जब फोर्ट हूड अमेरिकी सेना के लिए महत्वपूर्ण सैन्य केंद्रों में से एक था। घटना के बाद पूरे अमेरिका में सुरक्षा व्यवस्था, सैन्य प्रतिष्ठानों की निगरानी और कट्टरपंथ से जुड़े संभावित खतरों को लेकर गंभीर बहस शुरू हुई।
कट्टरपंथी विचारों से प्रभावित होने के आरोप
अमेरिकी जांच एजेंसियों और अभियोजन पक्ष ने हसन के संपर्कों और उसकी विचारधारा को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए थे। जांच में उसके कट्टरपंथी मौलवी अनवर अल-अवलाकी के संपर्क में रहने की बात सामने आई थी।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, हसन के विचार समय के साथ कट्टर होते गए थे और उसने अमेरिकी सेना में तैनात सैनिकों को निशाना बनाया। हालांकि, उसके मानसिक स्वास्थ्य और उसकी विचारधारा को लेकर मुकदमे के दौरान व्यापक बहस भी हुई।
सैन्य अदालत में चला मुकदमा
हमले के बाद हसन पर यूनिफॉर्म कोड ऑफ मिलिट्री जस्टिस यानी अमेरिकी सैन्य न्याय संहिता के तहत मुकदमा चलाया गया। अगस्त 2013 में उसका कोर्ट-मार्शल हुआ। इस दौरान उसने अपना बचाव स्वयं किया और हमले में अपनी भूमिका स्वीकार की।
मिलिट्री जूरी ने उसे पहले से योजना बनाकर की गई हत्याओं और हत्या के प्रयासों से जुड़े आरोपों में दोषी ठहराया। इसके बाद उसे मृत्युदंड सुनाया गया। सैन्य अदालत के फैसले के बाद से वह फोर्ट लीवेनवर्थ स्थित सैन्य जेल में बंद है।
17 साल बाद फिर सुर्खियों में मामला
फोर्ट हूड गोलीकांड को अब करीब 17 साल हो चुके हैं। लंबे समय से सैन्य जेल में बंद हसन के मामले में राष्ट्रपति ट्रंप की मंजूरी के बाद एक बार फिर यह घटना अमेरिकी सार्वजनिक चर्चा में आ गई है।
अब मुख्य सवाल यह है कि सैन्य अधिकारी मृत्युदंड की तारीख और स्थान कब निर्धारित करते हैं। यदि प्रक्रिया आगे बढ़ती है तो हसन अमेरिकी सैन्य न्याय व्यवस्था में मृत्युदंड पाने वाले दुर्लभ मामलों में से एक होगा, जिसकी सजा फायरिंग स्क्वॉड के माध्यम से लागू की जाएगी।
वर्ष 2009 का फोर्ट हूड हमला अमेरिकी सेना के इतिहास की उन घटनाओं में शामिल है, जिसने सैन्य प्रतिष्ठानों के भीतर सुरक्षा, कट्टरपंथी विचारधारा के प्रभाव और सैनिकों की सुरक्षा को लेकर लंबे समय तक सवाल खड़े किए। ट्रंप के ताजा फैसले ने एक बार फिर उस पुराने मामले को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है।