दिल्ली में सियासी हलचल तेज: मोदी समर्थन में युवाओं की नारेबाजी, CJP के प्रदर्शन पर पुलिस का पहरा; जंतर-मंतर पर कल जुट सकते हैं युवा



नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की जवाबदेही और इस्तीफे की मांग को लेकर सियासी माहौल गर्माता नजर आ रहा है। एक ओर कनॉट प्लेस और जनपथ इलाके में युवाओं के एक समूह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में नारेबाजी की और दिल्ली पुलिस के पक्ष में आवाज बुलंद की, वहीं दूसरी ओर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन को दिल्ली पुलिस ने अनुमति देने से इनकार कर दिया है। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। जन सुराज पार्टी ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर रोक लगाने को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ते हुए सरकार और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड


कनॉट प्लेस और जनपथ में मोदी समर्थक युवाओं की नारेबाजी
शुक्रवार को राजधानी के कनॉट प्लेस और जनपथ क्षेत्र में युवाओं के एक समूह ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में शामिल युवक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में नारे लगाते दिखाई दिए। युवाओं ने दिल्ली पुलिस के समर्थन में भी नारेबाजी की, जिससे आसपास मौजूद लोगों का ध्यान इस ओर आकर्षित हुआ।
प्रदर्शनकारी युवा ‘मोदी जी संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं’ और ‘दिल्ली पुलिस लाठी बजाओ, हम तुम्हारे साथ हैं’ जैसे नारे लगाते नजर आए। समूह की ओर से पुलिस के समर्थन में लगातार नारे लगाए गए और प्रदर्शन के दौरान युवाओं का उत्साह दिखाई दिया।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इस प्रदर्शन के आयोजकों की पहचान, इसके पीछे के विस्तृत उद्देश्य और किसी राजनीतिक संगठन से इसके संबंधों को लेकर आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में इस प्रदर्शन को किसी विशेष राजनीतिक अभियान से जोड़ने से पहले संबंधित पक्षों का स्पष्टीकरण सामने आना जरूरी है।
धारा 163 का हवाला देकर पुलिस ने रोका प्रदर्शन
प्रदर्शन के दौरान मौके पर मौजूद दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने युवाओं को बताया कि संबंधित क्षेत्र में प्रतिबंध लागू होने के कारण उन्हें आगे प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को नियमों का पालन करने की हिदायत दी।
धारा 163 के तहत सक्षम अधिकारी सार्वजनिक शांति, सुरक्षा या अन्य वैधानिक आधारों पर परिस्थितियों के अनुसार प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर सकते हैं। ऐसे आदेशों के दायरे में आने वाली गतिविधियों पर रोक लगाई जा सकती है।
राजधानी में प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था को लेकर पुलिस की सतर्कता ऐसे समय में बढ़ी है, जब मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्तावित आंदोलन को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है।
CJP के 10 अक्टूबर के प्रदर्शन को अनुमति नहीं
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की जवाबदेही को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी ने शनिवार, 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इस प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया है।
दिल्ली पुलिस की संयुक्त पुलिस आयुक्त नूपुर प्रसाद ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पुलिस को CJP के सह-संयोजक सौरव दास की ओर से 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के संबंध में आवेदन मिला था।
उन्होंने बताया कि आवेदन कम समय पहले दिया गया था, जबकि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रस्तावित प्रदर्शन से कम से कम 10 दिन पहले सूचना देना आवश्यक है। इसी आधार पर आवेदन खारिज किया गया।
पुलिस अधिकारी ने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी अपने पिछले प्रदर्शन के दौरान कानूनी निर्देशों और अनुमति प्राप्त करते समय दी गई अंडरटेकिंग का पालन करने में विफल रही थी। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन की अनुमति देने के मामले में निर्धारित नियमों और पूर्व अनुभवों को ध्यान में रखा गया है।
दूसरी ओर, CJP की ओर से युवाओं से जंतर-मंतर पहुंचने की अपील किए जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में शनिवार को प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर प्रशासन और आयोजकों के बीच टकराव की आशंका बनी हुई है।
जन सुराज ने सरकार और पुलिस पर उठाए सवाल
CJP के प्रदर्शन को अनुमति नहीं मिलने पर जन सुराज पार्टी ने प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरभ सिंह ने बयान जारी कर कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने पर रोक लगाना लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक अधिकारों के विपरीत है।
उन्होंने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की जवाबदेही और उनके इस्तीफे की मांग को लेकर उठ रही आवाजों से सरकार दबाव में है। कुमार सौरभ ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि विरोध की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने पेपर लीक मामले का उल्लेख करते हुए दावा किया कि इससे पहले भी CJP के आंदोलन को रोकने के प्रयास किए गए थे और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बचाव को लेकर इसी प्रकार की स्थिति बनी थी। उनके अनुसार, उस घटनाक्रम के बाद धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था। ये आरोप जन सुराज के प्रवक्ता की ओर से लगाए गए हैं; इनकी स्वतंत्र पुष्टि अलग से आवश्यक है।
‘सरकार और ज्ञानेश कुमार को झुकना पड़ेगा’
कुमार सौरभ सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की चुनाव आयोग से संबंधित टिप्पणियों और मुख्य चुनाव आयुक्त की चुप्पी को लेकर युवाओं में नाराजगी है। उन्होंने दावा किया कि देश के युवाओं, विशेषकर जेन-जी, के सामने सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त को जवाब देना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि सरकार चाहे जितना बचाव करे, ज्ञानेश कुमार को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ेगा। हालांकि, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग जन सुराज का राजनीतिक रुख है, इसे किसी स्थापित कानूनी निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी, 20 हजार से अधिक जवानों की तैनाती का दावा
प्रदर्शन को लेकर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी किए जाने की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, राजधानी में 20 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। जन सुराज ने इस व्यवस्था की तुलना आपातकाल जैसी स्थिति से करते हुए आलोचना की है।
हालांकि, सुरक्षा बलों की तैनाती की संख्या और व्यवस्था के संबंध में आधिकारिक पुष्टि तथा विस्तृत विवरण सामने आना बाकी है।
शनिवार के प्रदर्शन पर टिकी निगाहें
CJP को अनुमति नहीं मिलने के बावजूद युवाओं से जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की गई है। ऐसे में शनिवार को प्रस्तावित प्रदर्शन के दौरान राजधानी की कानून-व्यवस्था और राजनीतिक माहौल पर सभी की निगाहें रहेंगी।
एक तरफ पुलिस निर्धारित नियमों और सार्वजनिक व्यवस्था का हवाला दे रही है, तो दूसरी तरफ विपक्षी राजनीतिक आवाजें शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का सवाल उठा रही हैं। अब महत्वपूर्ण यह होगा कि प्रदर्शन के आयोजक प्रशासन के निर्देशों पर क्या रुख अपनाते हैं और पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाती है।
दिल्ली का यह घटनाक्रम एक बार फिर लोकतांत्रिक विरोध, प्रशासनिक प्रतिबंधों और राजनीतिक जवाबदेही के बीच संतुलन का सवाल सामने ला रहा है। शनिवार को जंतर-मंतर पर क्या स्थिति बनती है, इससे आने वाले दिनों में इस विवाद की दिशा स्पष्ट हो सकती है।
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स |अवतार सिंह बिष्ट नई दिल्ली