नरेंद्र मोदी की 25 वर्ष की राष्ट्रसेवा यात्रा और उत्तराखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना के आंकड़े एक साथ चर्चा में। विकास के दावों के बीच सवाल यह है कि राज्य के पात्र जरूरतमंद परिवारों तक योजनाओं का लाभ किस अनुपात में पहुंच रहा है और लाभार्थियों का पूरा विवरण सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सात अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभालने से लेकर देश के प्रधानमंत्री के रूप में उनकी यात्रा तक, भारतीय जनता पार्टी उनके नेतृत्व को 25 वर्षों की अनवरत राष्ट्रसेवा के रूप में प्रस्तुत कर रही है। दूसरी ओर, उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत हजारों परिवारों को पक्की छत उपलब्ध कराने की उपलब्धि गिना रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 से अब तक उत्तराखंड में 39,815 परिवारों को इस योजना के तहत आवास का लाभ दिया गया है।
लेकिन इन उपलब्धियों के साथ कुछ बुनियादी सवाल भी जुड़े हैं। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में, जहां अनेक ग्रामीण परिवार आज भी आवास, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, क्या सरकार यह स्पष्ट करेगी कि इन 39,815 आवासों का लाभ किन सामाजिक और आर्थिक वर्गों के परिवारों को मिला? क्या जिलेवार लाभार्थियों की सूची, उनकी पात्रता और आवास निर्माण की स्थिति सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है? क्या इससे यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि योजना का लाभ वास्तव में सबसे जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचा है?
मोदी के 25 वर्षों के नेतृत्व की कहानी
भारतीय जनता पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीतिक यात्रा को गुजरात के विकास से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर परिवर्तन तक की यात्रा बताती है। सात अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री बने नरेंद्र मोदी ने राज्य में बुनियादी ढांचे, बिजली, जल प्रबंधन, कृषि, उद्योग और निवेश को बढ़ावा देने वाली पहलों पर जोर दिया। वर्ष 2003 में शुरू हुए वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट के माध्यम से निवेश और औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित किया गया। ज्योतिग्राम योजना, ग्रामीण बिजली आपूर्ति तथा कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्र की पहलों को भी गुजरात मॉडल के प्रमुख उदाहरणों के रूप में प्रस्तुत किया गया।
26 मई 2014 को प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद नरेंद्र मोदी की सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और डिजिटल इंडिया जैसी योजनाओं को आगे बढ़ाया। भाजपा का कहना है कि इन योजनाओं ने गरीबों के जीवन स्तर में सुधार, महिलाओं के सशक्तिकरण, ग्रामीण सुविधाओं के विस्तार और देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
पार्टी प्रधानमंत्री के कार्यकाल को अनुच्छेद 370 में बदलाव, अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन, अंतरिक्ष कार्यक्रम और भारत की वैश्विक भूमिका में विस्तार जैसी उपलब्धियों से भी जोड़ती है। हालांकि, किसी भी सरकार की उपलब्धियों का मूल्यांकन केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि योजनाओं के वास्तविक परिणामों, लाभार्थियों की स्थिति और स्वतंत्र रूप से सत्यापित आंकड़ों के आधार पर किया जाना चाहिए।
उत्तराखंड में 39,815 परिवारों को पक्के मकान
उत्तराखंड सरकार के उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत वर्ष 2022 से अब तक 39,815 परिवारों को लाभ मिला है। जिलेवार विवरण में ऊधमसिंह नगर में 4,882, हरिद्वार में 4,493 और रुद्रप्रयाग में 4,032 आवासों का उल्लेख किया गया है।
अन्य जिलों के लिए उपलब्ध विवरण इस प्रकार है:
चमोली: 3,900 आवास
पिथौरागढ़: 3,386 आवास
पौड़ी: 3,195 आवास
उत्तरकाशी: 3,057 आवास
देहरादून: 2,839 आवास
चंपावत: 2,789 आवास
बागेश्वर: 2,279 आवास
टिहरी: 2,134 आवास
नैनीताल: 1,480 आवास
अल्मोड़ा: 1,349 आवास
सरकार का कहना है कि योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को पक्का घर बनाने के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है। उपलब्ध विवरण में प्रति आवास 1.30 लाख रुपये की सहायता का उल्लेख है। इसके अतिरिक्त शौचालय निर्माण, मजदूरी और बुनियादी सुविधाओं से संबंधित सहायता भी विभिन्न सरकारी योजनाओं के माध्यम से उपलब्ध कराए जाने की बात कही गई है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार प्रत्येक पात्र परिवार को पक्का घर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी और ग्रामीण के विस्तार के लिए केंद्र से लगातार सहयोग मांगने की बात भी कहती रही है।
उत्तराखंड के मूल निवासियों का सवाल: पात्रता की पारदर्शिता कहां है?
उत्तराखंड में आवास योजना को लेकर सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि लाभार्थियों का चयन किन नियमों और दस्तावेजों के आधार पर किया गया। राज्य के कई क्षेत्रों में स्थानीय परिवार आवास, भूमि, रोजगार और आर्थिक सुरक्षा को लेकर कठिनाइयों का सामना करते हैं। ऐसे में सरकार से यह अपेक्षा स्वाभाविक है कि वह योजना के क्रियान्वयन का पूरा और पारदर्शी विवरण जनता के सामने रखे।
कुछ लोगों की ओर से यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल से आए परिवारों को भी योजना का लाभ मिला है और यदि मिला है तो किस पात्रता के आधार पर? इस सवाल का उत्तर अनुमान या किसी व्यक्ति की धार्मिक अथवा क्षेत्रीय पहचान के आधार पर नहीं, बल्कि योजना के नियमों और सत्यापित लाभार्थी रिकॉर्ड से दिया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण में पात्रता का निर्धारण निर्धारित सरकारी मानकों के अनुसार होता है। किसी व्यक्ति का उत्तर प्रदेश, बिहार या पश्चिम बंगाल से संबंध होना अपने आप में लाभ पाने या उससे वंचित होने का आधार नहीं है। इसी तरह, केवल मुस्लिम होने के आधार पर किसी लाभार्थी को अपात्र ठहराना उचित नहीं होगा। वास्तविक सवाल यह है कि क्या प्रत्येक लाभार्थी निर्धारित पात्रता पूरी करता है और क्या किसी पात्र स्थानीय परिवार को अनुचित तरीके से वंचित किया गया?
यदि किसी वार्ड, ग्राम पंचायत या गांव में अपात्र लोगों को लाभ दिए जाने अथवा पात्र परिवारों की अनदेखी किए जाने की शिकायत है, तो उसकी जांच लाभार्थी सूची, चयन प्रक्रिया और संबंधित अभिलेखों के आधार पर होनी चाहिए।
धामी सरकार से पांच सीधे सवाल
वर्ष 2022 से अब तक लाभान्वित 39,815 परिवारों की ग्राम पंचायत और ब्लॉकवार सूची सार्वजनिक की जाएगी?
कितने पात्र परिवारों को आवास स्वीकृत हुआ, कितने मकान पूरे बने और कितने निर्माणाधीन हैं?
क्या चयनित लाभार्थियों की पात्रता का नियमित सत्यापन किया गया है?
क्या किसी पात्र परिवार की शिकायत पर जांच और अपील की व्यवस्था है?
क्या सरकार जिलेवार यह बताएगी कि कितने जरूरतमंद परिवार अब भी पक्के मकान की प्रतीक्षा कर रहे हैं?
इन सवालों के जवाब मिलने से योजना के वास्तविक प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा और अपात्र लाभार्थियों से जुड़ी शिकायतों की भी निष्पक्ष जांच संभव होगी।
उपलब्धि का दावा तभी मजबूत होगा, जब आंकड़े भी बोलेंगे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड में आवास योजना के विस्तार को सरकारें अपनी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रही हैं। पक्की छत किसी भी परिवार के लिए सम्मान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य का आधार है। इसलिए इस योजना की सफलता का आकलन राजनीतिक दावों से आगे बढ़कर यह देखकर किया जाना चाहिए कि कितने जरूरतमंद परिवारों को वास्तव में लाभ मिला और कितने अभी भी प्रतीक्षा कर रहे हैं।
सरकार को लाभार्थियों के नाम, पात्रता की स्थिति और निर्माण की प्रगति से संबंधित जानकारी नियमानुसार सार्वजनिक करनी चाहिए, साथ ही लाभार्थियों की निजता और सुरक्षा का भी ध्यान रखना चाहिए। यदि योजना में कहीं अनियमितता है तो निष्पक्ष जांच हो और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई की जाए।
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स का सवाल: क्या उत्तराखंड में पक्की छत का सपना हर पात्र जरूरतमंद परिवार तक पहुंच रहा है, या सरकारी आंकड़ों के पीछे अब भी ऐसे परिवार हैं जो अपने घर के इंतजार में हैं? इसका स्पष्ट जवाब आंकड़ों की पारदर्शिता, निष्पक्ष जांच और सरकार की जवाबदेही से ही मिलेगा।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर
मोदी के 25 साल के शासन का दावा, धामी सरकार में उत्तराखंड के 39,815 परिवारों को मिली पक्की छत; लाभार्थियों की पहचान और स्थानीय हक पर उठें सवाल हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | रुद्रपुर विशेष रिपोर्ट
