देहरादून/रुद्रपुर। उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया पूरी होने के बाद सामने आए आपत्तियों के आंकड़ों ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। पांच विधानसभा क्षेत्रों में नाम हटाने के लिए बड़ी संख्या में आवेदन दाखिल किए जाने और इनमें कई मामलों में एक ही व्यक्ति द्वारा सैकड़ों से हजारों फॉर्म जमा किए जाने का पैटर्न चर्चा का विषय बना हुआ है। खास बात यह है कि उपलब्ध विवरण के अनुसार इन प्रमुख मामलों में आपत्तियां दाखिल करने वाले कई लोग भारतीय जनता पार्टी से जुड़े बूथ लेवल एजेंट या पदाधिकारी बताए जा रहे हैं और चार विधानसभा क्षेत्रों में जिन मतदाताओं के नामों पर आपत्ति दर्ज कराई गई, वे मुस्लिम समुदाय से संबंधित बताए गए हैं।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
इसी बीच आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने भी अपनी राजनीतिक सक्रियता तेज करने की तैयारी कर ली है। पार्टी सितंबर से राष्ट्रीय नेताओं को उत्तराखंड के अलग-अलग क्षेत्रों में उतारने की योजना बना रही है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को मैदानी जिलों हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर में सभाओं व रैलियों के लिए उतारने की तैयारी है, जबकि कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के चमोली और अल्मोड़ा दौरे प्रस्तावित हैं। इस तरह SIR को लेकर उठे सवाल और कांग्रेस की बढ़ती चुनावी सक्रियता प्रदेश के राजनीतिक माहौल को और गरमाने वाली है।
किच्छा में 4,855 आपत्तियां एक व्यक्ति की ओर से
SIR के दौरान सबसे अधिक चर्चा ऊधम सिंह नगर की किच्छा विधानसभा सीट की हो रही है। यहां नाम हटाने को लेकर कुल 4,857 आपत्तियां दाखिल होने की जानकारी सामने आई है। इनमें से 4,855 आवेदन अकेले राजेश तिवारी नामक व्यक्ति द्वारा दाखिल किए जाने का दावा किया गया है। तिवारी को भाजपा का बूथ लेवल एजेंट बताया जा रहा है।
इन आवेदनों में शामिल मतदाताओं के नाम मुस्लिम समुदाय से जुड़े बताए गए हैं। आवेदन में कई मामलों में मतदाता के पहले से दूसरी जगह पंजीकृत होने या दूसरी जगह स्थानांतरित होने जैसी वजहें दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
भाजपा के पूर्व विधायक राजेश शुक्ला का दावा है कि पार्टी की बूथ स्तरीय आंतरिक जांच में किच्छा क्षेत्र में आठ हजार से अधिक ऐसे मतदाताओं की पहचान हुई है, जिनके नाम उत्तर प्रदेश के बरेली, पीलीभीत और रामपुर क्षेत्र की मतदाता सूचियों में भी दर्ज बताए गए हैं। भाजपा का तर्क है कि दोहरी प्रविष्टियों की पहचान के बाद चुनाव आयोग के समक्ष नियमानुसार आपत्तियां दाखिल की गईं।
गदरपुर में भी एक व्यक्ति ने दाखिल की सैकड़ों आपत्तियां
गदरपुर विधानसभा क्षेत्र में कुल 1,370 आवेदन दाखिल किए जाने की जानकारी है। इनमें से 670 आवेदन चंकित हुरिया की ओर से दाखिल किए गए बताए गए हैं। उन्हें भाजपा का बीएलए बताया गया है।
हुरिया के अनुसार पार्टी स्तर पर की गई जांच के बाद करीब 900 ऐसे मतदाताओं की सूची तैयार की गई थी, जिनके नाम उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की सीमावर्ती क्षेत्रों की मतदाता सूचियों में दो जगह दर्ज होने की आशंका सामने आई। इसके आधार पर आपत्तियां दाखिल की गईं।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है। ऐसे में एक ही व्यक्ति द्वारा बड़ी संख्या में आपत्तियां दाखिल किए जाने की प्रक्रिया और उसके आधार की प्रशासनिक जांच चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता के लिहाज से महत्वपूर्ण हो जाती है।
खटीमा में 394 में से 392 आपत्तियां एक व्यक्ति की
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की परंपरागत विधानसभा सीट खटीमा में भी इसी तरह का पैटर्न सामने आया है। यहां कुल 394 आवेदन दाखिल हुए, जिनमें से 392 आवेदन भाजपा के जिला उपाध्यक्ष और बूथ लेवल एजेंट अमित कुमार पांडे की ओर से दाखिल किए जाने की जानकारी है। उपलब्ध विवरण के अनुसार इन आपत्तियों में शामिल सभी नाम मुस्लिम मतदाताओं के बताए गए हैं।
खटीमा राजनीतिक रूप से संवेदनशील विधानसभा क्षेत्र रहा है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी भुवन चंद्र कापड़ी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को यहां पराजित किया था। ऐसे में SIR के दौरान सामने आए आंकड़ों ने इस सीट को लेकर राजनीतिक चर्चा को और बढ़ा दिया है।
नानकमत्ता और रुद्रपुर में भी बड़ी संख्या में आवेदन
नानकमत्ता विधानसभा क्षेत्र में दाखिल 391 फॉर्म-7 में से 353 आवेदन भाजपा बीएलए किशोर जोशी की ओर से दिए जाने की जानकारी है। इनमें भी मुस्लिम मतदाताओं के नाम शामिल बताए गए हैं। 351 आवेदनों में मतदाता के दूसरी जगह चले जाने यानी ‘शिफ्टेड’ होने का कारण दर्ज बताया गया है।
किशोर जोशी का कहना है कि भाजपा के 142 बीएलए की सहायता से की गई आंतरिक जांच में ऐसे लोगों की पहचान की गई, जिन्होंने उत्तर प्रदेश में अपना पंजीकरण समाप्त कराए बिना उत्तराखंड में भी नाम दर्ज कराया है।
रुद्रपुर विधानसभा क्षेत्र में कुल 2,818 आवेदन दाखिल होने की जानकारी सामने आई है। इनमें भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के शहर महासचिव और बीएलए सनी पासवान की ओर से 230 नाम हटाने की मांग की गई है। इसके अलावा चार अन्य लोगों ने भी 100 से अधिक नामों पर आपत्ति दर्ज कराई। उपलब्ध विवरण के अनुसार इन सूचियों में भी मुस्लिम मतदाताओं के नाम शामिल हैं।
नियमों में बदलाव ने बढ़ाई बहस
बड़ी संख्या में फॉर्म दाखिल किए जाने के पीछे निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े नियमों में बदलाव को भी चर्चा का विषय बनाया जा रहा है। 2023 के वोटर लिस्ट मैनुअल में बीएलए के लिए एक दिन में अधिकतम 10 आवेदन दाखिल करने की व्यवस्था और बड़ी संख्या में आवेदन आने पर अतिरिक्त सत्यापन का प्रावधान बताया गया था। बाद में कुछ राज्यों में यह सीमा बढ़ाकर 50 आवेदन प्रतिदिन किए जाने की बात सामने आई।
इस वर्ष जनवरी में पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भेजे गए एक पत्र में आवेदन संख्या की सीमा हटाने का उल्लेख होने का दावा भी किया गया है। इसी आधार पर उत्तराखंड के एक निर्वाचन अधिकारी ने भी कहा कि एक व्यक्ति कितने भी फॉर्म जमा कर सकता है। हालांकि उत्तराखंड के SIR के लिए इस संबंध में अलग से कोई स्पष्ट आदेश जारी हुआ या नहीं, इस पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होने की आवश्यकता है।
सुनवाई के बाद ही तय होगा किसका नाम रहेगा
SIR के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने की प्रक्रिया 13 अगस्त को समाप्त हो चुकी है। अब 11 सितंबर तक नोटिस और सुनवाई की प्रक्रिया चलेगी। इसके बाद 15 सितंबर को अंतिम मतदाता सूची जारी किए जाने का कार्यक्रम है।
14 जुलाई को जारी ड्राफ्ट सूची में करीब 71.3 लाख मतदाता दर्ज थे, जबकि इससे पहले मतदाताओं की संख्या लगभग 79.6 लाख बताई गई थी। इतनी बड़ी संख्या में अंतर के कारण भी SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज है।
निर्वाचन अधिकारियों के अनुसार ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से बड़ी संख्या में आपत्तियां प्राप्त हुई हैं। प्रत्येक मामले का क्रॉस वेरिफिकेशन किया जाना है। प्रभावित मतदाता को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। फील्ड वेरिफिकेशन, नोटिस और सुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम फैसला किया जाएगा।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता विनोद चमोली ने कहा है कि यदि किसी व्यक्ति को लगता है कि कोई मतदाता गलत तरीके से सूची में दर्ज है या उसका नाम किसी अन्य स्थान की मतदाता सूची में भी मौजूद है तो वह आपत्ति दर्ज करा सकता है। उनके अनुसार अंतिम फैसला चुनाव आयोग की जांच के आधार पर होगा। उन्होंने यह भी कहा कि आपत्तियां धर्म के आधार पर दर्ज कराने की बात सही नहीं है और नाम सही पाए जाने पर उसे सूची से हटाया जाएगा।
SIR के बीच कांग्रेस ने तेज की चुनावी तैयारी
मतदाता सूची को लेकर चल रही इस बहस के बीच कांग्रेस ने आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को गति देने का फैसला किया है। सितंबर से पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं के उत्तराखंड दौरे प्रस्तावित हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर जैसे मैदानी जिलों में सभाओं और रैलियों के माध्यम से पार्टी के अभियान को धार देने की तैयारी है।
वहीं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के चमोली और अल्मोड़ा में कार्यक्रम प्रस्तावित किए जा रहे हैं। पार्टी हाईकमान से विमर्श के बाद कार्यक्रमों की तिथियां तय होने की संभावना है।
राहुल गांधी पहले देहरादून में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के माध्यम से युवाओं और छात्रों से संवाद कर चुके हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आठ अगस्त को हल्द्वानी में रैली कर पार्टी के चुनावी अभियान का संकेत दिया था। अब SIR की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कांग्रेस राष्ट्रीय नेताओं के जरिए प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की तैयारी में है।
मैदानी और पर्वतीय मुद्दों पर अलग रणनीति
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी के मैदानी क्षेत्रों के कार्यक्रमों में युवा, रोजगार, महंगाई और विकास प्रमुख मुद्दे रहेंगे। ऊधम सिंह नगर और हरिद्वार जैसे क्षेत्रों में औद्योगिक विकास, रोजगार, किसानों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को उठाने की रणनीति बनाई जा रही है।
प्रियंका गांधी के पर्वतीय जिलों के कार्यक्रमों में पलायन, महिलाओं की भागीदारी, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य को प्रमुखता देने की योजना है। कांग्रेस का प्रयास है कि राष्ट्रीय नेताओं की रैलियां केवल भीड़ जुटाने तक सीमित न रहें, बल्कि स्थानीय समस्याओं को चुनावी विमर्श का हिस्सा बनाया जाए।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, महासचिव केसी वेणुगोपाल, वरिष्ठ नेता सचिन पायलट समेत अन्य नेताओं के उत्तराखंड दौरे भी प्रस्तावित बताए जा रहे हैं। प्रदेश नेतृत्व का मानना है कि राष्ट्रीय नेतृत्व की सक्रियता से संगठन को बूथ स्तर तक मजबूती मिलेगी।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के अनुसार राष्ट्रीय नेताओं के उत्तराखंड दौरे की रूपरेखा तैयार की जा रही है और जल्द ही राहुल गांधी, प्रियंका गांधी तथा अन्य वरिष्ठ नेताओं के कार्यक्रम तय किए जाएंगे।
कुल मिलाकर उत्तराखंड में SIR के दौरान सामने आए बड़े पैमाने पर आपत्तियों के आंकड़े और कांग्रेस की सितंबर से प्रस्तावित चुनावी सक्रियता ने प्रदेश की सियासत को दो महत्वपूर्ण मुद्दों के केंद्र में ला दिया है। एक ओर मतदाता सूची की शुचिता, दोहरी प्रविष्टियों और आपत्तियों की निष्पक्ष जांच का सवाल है, दूसरी ओर आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की सक्रियता बढ़ रही है। अब सबकी निगाहें 11 सितंबर तक चलने वाली सुनवाई और 15 सितंबर को जारी होने वाली अंतिम मतदाता सूची पर टिकी हैं। इसी के साथ कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं के दौरे प्रदेश के चुनावी माहौल को नई दिशा देने की भूमिका में दिखाई दे रहे हैं।
