देहरादून में बेरोजगार युवाओं की महारैली शुरू, परेड ग्राउंड में उमड़ा युवाओं का हुजूम; भर्ती विज्ञप्ति जारी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान


देहरादून में बेरोजगार युवाओं की महारैली शुरू, परेड ग्राउंड में उमड़ा युवाओं का हुजूम; भर्ती विज्ञप्ति जारी होने तक आंदोलन जारी रखने का ऐलान
विभागों की ओर से रातों-रात रिक्त पदों का विवरण सार्वजनिक करने के बावजूद युवाओं का आक्रोश बरकरार, बोले—सिर्फ पद बताने से नहीं मिलेगी नौकरी, अब विज्ञप्ति और नियुक्ति चाहिए

अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर


देहरादून, 30 अक्टूबर। उत्तराखंड में बेरोजगारी और लंबित भर्तियों के मुद्दे पर आज युवाओं का आक्रोश सड़कों पर दिखाई दे रहा है। उत्तराखंड बेरोजगार संघ के आह्वान पर आज देहरादून के परेड ग्राउंड में बेरोजगार युवाओं की महारैली शुरू हो चुकी है। प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों से युवा रोजगार की मांग को लेकर आंदोलन में शामिल होने पहुंच रहे हैं। युवाओं का साफ संदेश है कि अब केवल आश्वासन और घोषणाओं से काम नहीं चलेगा, उन्हें सरकारी विभागों में रिक्त पदों पर भर्ती विज्ञप्तियां और समयबद्ध नियुक्तियां चाहिए।
महारैली शुरू होने से पहले ही प्रदेश के विभिन्न विभागों की ओर से देर रात रिक्त पदों का विवरण सार्वजनिक किए जाने की खबर सामने आई थी। इसे आंदोलन से पहले प्रशासनिक स्तर पर हुई महत्वपूर्ण हलचल माना जा रहा है। हालांकि बेरोजगार संघ ने इस पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा है कि पदों का विवरण सार्वजनिक कर देना अपने आप में रोजगार उपलब्ध कराना नहीं है। जब तक इन पदों पर विधिवत भर्ती विज्ञप्तियां जारी नहीं होतीं और चयन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती, तब तक युवाओं का आंदोलन जारी रहेगा।
रातों-रात पद सार्वजनिक, लेकिन युवाओं को चाहिए भर्ती विज्ञप्ति
बेरोजगार युवाओं का कहना है कि प्रदेश में विभिन्न विभागों में हजारों पद रिक्त होने की जानकारी समय-समय पर सामने आती रही है। समाचार पत्रों में भी भर्ती और रोजगार से संबंधित घोषणाएं प्रकाशित होती हैं, लेकिन धरातल पर भर्ती प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पाती। कई प्रतियोगी परीक्षाओं के कैलेंडर में बदलाव, परीक्षाओं की तिथियों में फेरबदल और लंबित चयन प्रक्रियाओं ने युवाओं की चिंता बढ़ा दी है।
संघ का कहना है कि युवाओं की उम्र लगातार निकल रही है। वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के बाद भी उन्हें रोजगार के अवसरों के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे में केवल रिक्त पदों की सूची सार्वजनिक करना पर्याप्त नहीं है। सरकार को प्रत्येक विभाग के रिक्त पदों पर भर्ती विज्ञप्ति जारी करने और पूरी प्रक्रिया के लिए निश्चित समयसीमा निर्धारित करनी चाहिए।
कई विभागों के पद अभी आने बाकी
आंदोलन से जुड़े युवाओं का कहना है कि फिलहाल कुछ विभागों के रिक्त पदों का विवरण ही सार्वजनिक हुआ है, जबकि कई अन्य विभागों में भी पद खाली हैं। संघ की मांग है कि सभी विभागों के रिक्त पदों का पूरा ब्योरा सार्वजनिक किया जाए और उनके सापेक्ष तत्काल भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए।
युवाओं ने स्पष्ट किया है कि 30 अक्टूबर की महारैली केवल पदों की घोषणा के विरोध या समर्थन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रोजगार के अधिकार और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था की मांग को लेकर व्यापक आंदोलन है।
चुनावी साल में रोजगार को लेकर सरकार पर सवाल
उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनावों की राजनीतिक सरगर्मी के बीच बेरोजगार युवाओं का यह आंदोलन सरकार के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बन सकता है। युवाओं का सवाल है कि जब चुनावी वर्ष में भी रोजगार के मुद्दे पर ठोस परिणाम सामने नहीं आ रहे हैं तो आने वाले समय में युवाओं को क्या उम्मीद करनी चाहिए?
आंदोलनकारियों का कहना है कि प्रदेश के युवाओं ने लंबे समय तक इंतजार किया है। अब उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि रिक्त पदों पर विज्ञप्ति, निष्पक्ष परीक्षा, समय पर परिणाम और नियुक्ति चाहिए। युवाओं ने प्रदेश के कोने-कोने से बेरोजगार अभ्यर्थियों से एकजुट होकर आंदोलन में भाग लेने का आह्वान किया है।
जल, जंगल, जमीन और स्थानीय रोजगार का मुद्दा भी गरमाया
महारैली के बीच उत्तराखंड के स्थानीय संसाधनों और प्रदेशवासियों के अधिकारों का सवाल भी चर्चा में है। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि उत्तराखंड के जल, जंगल और जमीन पर स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा होनी चाहिए। सरकारी ठेकों, पर्यटन, धार्मिक स्थलों और अन्य आर्थिक गतिविधियों में स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलने चाहिए।
केदारनाथ क्षेत्र में फूलों के ठेके को लेकर गुजराती ठेकेदार को काम दिए जाने संबंधी आरोपों का उल्लेख करते हुए भी स्थानीय भागीदारी का सवाल उठाया जा रहा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि देवभूमि के संसाधनों से होने वाली आर्थिक गतिविधियों में उत्तराखंड के युवाओं और स्थानीय निवासियों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
सिक्किम तक पहुंची उत्तराखंड के अधिकारों की आवाज
इस बीच सिक्किम में भी उत्तराखंड के जल, जंगल, जमीन और स्थानीय अधिकारों से जुड़े सवालों पर चर्चा होने की बात सामने आई है। सिक्किम पहुंचे लोगों की पूर्व सांसद एवं निर्दलीय प्रत्याशी भरत बासनेट से मुलाकात हुई। बताया गया है कि भरत बासनेट स्वयं अपने क्षेत्र में जल, जंगल और जमीन के अधिकारों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।
मुलाकात के दौरान अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर सिक्किम में भी एक बड़े आंदोलन की संभावनाओं पर चर्चा हुई। भरत बासनेट की ओर से उत्तराखंड के साथ मिलकर इन मुद्दों पर काम करने का आश्वासन दिए जाने की बात कही गई है। इससे अंकिता भंडारी न्याय आंदोलन को राज्य से बाहर भी समर्थन मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
अंकिता भंडारी न्याय की मांग और प्रदेश की अस्मिता का सवाल
उत्तराखंड में अंकिता भंडारी प्रकरण आज भी जनभावनाओं से जुड़ा हुआ है। युवाओं और सामाजिक संगठनों का मानना है कि रोजगार, महिला सुरक्षा, न्याय और स्थानीय अधिकार जैसे मुद्दे प्रदेश के भविष्य से सीधे जुड़े हैं। यही कारण है कि बेरोजगार युवाओं के आंदोलन के व्यापक सामाजिक और राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं।
अब सरकार के अगले कदम पर टिकी निगाहें
आज 30 अक्टूबर को परेड ग्राउंड में शुरू हुई महारैली ने उत्तराखंड में रोजगार के सवाल को फिर से केंद्र में ला दिया है। बेरोजगार संघ का रुख स्पष्ट है कि रिक्त पदों का विवरण सार्वजनिक करना शुरुआत हो सकती है, लेकिन अंतिम समाधान नहीं। जब तक भर्ती विज्ञप्तियां जारी नहीं होतीं और नियुक्तियों की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ती, युवाओं की लड़ाई जारी रहेगी।
अब देखना होगा कि सरकार और संबंधित विभाग इस आंदोलन के बाद युवाओं की मांगों पर क्या निर्णय लेते हैं और सार्वजनिक किए गए रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया कब शुरू होती है।
हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | अवतार सिंह बिष्ट, उत्तराखंड | देश-दुनिया की खबरों पर नजर