हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स अवतार सिंह बिष्ट | उत्तराखंड उत्तर प्रदेश, संपूर्ण भारत, देश-विदेश, खेल, आध्यात्मिक, राजनीतिक और जन सरोकारों की खबरें।

प्रतापा, उम्र 41 वर्ष, निवासी कर्नाटक।
बद्रीनाथ धाम की खूबसूरत यात्रा से लौट रहा एक हेलीकॉप्टर हादसे का शिकार हो गया, कर्नाटक से आए उन श्रद्धालुओं की हैं, जो गुरुवार की सुबह बड़े अरमानों के साथ बद्रीनाथ धाम पहुंचे थे। सुबह करीब 10 बजे उनका हेलीकॉप्टर धाम की जमीन पर उतरा था।

एच.एस. नटराजा, उम्र 51 वर्ष, निवासी कर्नाटक।
चेहरे पर भगवान बद्री विशाल के दर्शन की अलौकिक खुशी थी। दर्शन के बाद वे भारत के अंतिम छोर, खूबसूरत ”माना गांव” पहुंचे। वहां उन्होंने भीम पुल देखा, सरस्वती नदी के उद्गम की दिव्यता को महसूस किया।

प्रतापा, उम्र 41 वर्ष, निवासी कर्नाटक।
बद्रीनाथ धाम की खूबसूरत यात्रा से लौट रहा एक हेलीकॉप्टर हादसे का शिकार हो गया, कर्नाटक से आए उन श्रद्धालुओं की हैं, जो गुरुवार की सुबह बड़े अरमानों के साथ बद्रीनाथ धाम पहुंचे थे। सुबह करीब 10 बजे उनका हेलीकॉप्टर धाम की जमीन पर उतरा था।

एच.एस. नटराजा, उम्र 51 वर्ष, निवासी कर्नाटक।
चेहरे पर भगवान बद्री विशाल के दर्शन की अलौकिक खुशी थी। दर्शन के बाद वे भारत के अंतिम छोर, खूबसूरत ”माना गांव” पहुंचे। वहां उन्होंने भीम पुल देखा, सरस्वती नदी के उद्गम की दिव्यता को महसूस किया।

वी.बी. शंकर गौड़ा, उम्र 39 वर्ष, निवासी कर्नाटक।
हर कोई उस पल में खुश था, मानो ज़िंदगी की सबसे बड़ी मुराद पूरी हो गई हो। माणा गांव से लौटने के बाद उन श्रद्धालुओं ने अपने गाइड से पूछा था ‘क्या हम आज ही वापस लौट सकते हैं?’ मौसम ने उस वक्त इजाजत नहीं दी, लेकिन किसे पता था कि ये कुदरत का नहीं, बल्कि मौत का इंतजार था।

अरुण सालुंके, उम्र 44 वर्ष, निवासी कर्नाटक।
नियमों के मुताबिक, इन यात्रियों को शुक्रवार सुबह ही वापस लौटना था, लेकिन खराब मौसम और कम विजिबिलिटी (दृश्यता) के चलते उड़ान में देरी हुई।

वी.बी. शंकर गौड़ा, उम्र 39 वर्ष, निवासी कर्नाटक।
हर कोई उस पल में खुश था, मानो ज़िंदगी की सबसे बड़ी मुराद पूरी हो गई हो। माणा गांव से लौटने के बाद उन श्रद्धालुओं ने अपने गाइड से पूछा था ‘क्या हम आज ही वापस लौट सकते हैं?’ मौसम ने उस वक्त इजाजत नहीं दी, लेकिन किसे पता था कि ये कुदरत का नहीं, बल्कि मौत का इंतजार था।

अरुण सालुंके, उम्र 44 वर्ष, निवासी कर्नाटक।
नियमों के मुताबिक, इन यात्रियों को शुक्रवार सुबह ही वापस लौटना था, लेकिन खराब मौसम और कम विजिबिलिटी (दृश्यता) के चलते उड़ान में देरी हुई।

सुधीर के., उम्र 50 वर्ष, निवासी कर्नाटक।
आखिरकार, दोपहर एक बजकर 12 मिनट पर उस हेलीकॉप्टर ने बद्रीनाथ धाम से उड़ान भरी। शायद किसी को अंदाज़ा नहीं था कि ये उड़ान इन सभी यात्रियों के लिए इस धरती की आखिरी उड़ान साबित होगी।
मृतकों में कर्नाटक के 2007 बैच के अधिकारी अरुण सालुंके भी शामिल थे, जो केंद्रीय अपराध शाखा (सीसीबी) में कार्यरत थे। उनका परिवार बेंगलुरु और उनके पैतृक गांव अरतला, बेलगावी जिले में रहता है। हेलीकॉप्टर के बद्रीनाथ सिविल हेलीपैड से उड़ान भरने के ठीक दो मिनट बाद, दोपहर 1:14 बजे जोशीमठ के पास संपर्क टूटने के तुरंत बाद पांडुकेश्वर और जोशीमठ से पुलिस, एसडीआरएफ और सेना कर्मियों को शामिल कर तलाशी अभियान शुरू किया गया था।
घटना के बाद, मुख्यमंत्री कार्यालय ने पुष्टि की कि सीएम धामी ने दुर्घटना के कारणों की विस्तृत और गहन जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जोर दिया कि सच्चाई का पता लगाने के लिए दुर्घटना के सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच की जानी चाहिए। इसके अतिरिक्त, जिला प्रशासन को प्रभावित परिवारों को तत्काल सभी आवश्यक सहायता और राहत प्रदान करने का निर्देश दिया गया है।
ट्रांस भारत एविएशन द्वारा संचालित यह दुर्भाग्यपूर्ण हेलीकॉप्टर 30 अक्टूबर को बद्रीनाथ धाम से देहरादून के लिए उड़ान भरने के बाद लापता हो गया था। उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (यूसीएडीए) के सीईओ प्रतीक जैन ने पुष्टि की कि पायलट और पांच यात्रियों सहित हेलीकॉप्टर में सवार सभी छह लोगों की दुर्घटना में मृत्यु हो गई।
उत्तराखंड: चमोली जिले में हुए दुखद हेलीकॉप्टर दुर्घटना में छह लोगों की मौत पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की और शोक संतप्त परिवारों के प्रति हार्दिक संवेदना व्यक्त की।
ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि आखिर खराब मौसम के बावजूद हेलीकॉप्टर को उड़ाने का निर्देश किसने दिया था? जिसके चलते पायलट हिमांशु सब्बरवाल सहित 6 तीर्थ यात्रियों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा. जबकि, खराब मौसम को लेकर सिविल एविएशन मंत्रालय और उत्तराखंड विमानन अथॉरिटी की साफ गाइडलाइंस हैं.
दुर्घटना के दौरान हो रही भारी बर्फबारी
जोशीमठ की इस घाटी में क्रैश हुए ट्रांस भारत एविएशन एयरलाइंस के हेलीकॉप्टर के रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बनाए गए वीडियो से साफ दिखाई पड़ता है कि उस वक्त जमकर बर्फबारी हो रही थी. साफ है कि जब दोपहर 1.14 बजे पर ये हेलीकॉप्टर VT-HCX के दौरान जब इस हेलीकॉप्टर ने बद्रीनाथ धाम से पांच यात्रियों के साथ उड़ान भरी, तो ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम खराब था. इसके बावजूद, हेलीकॉप्टर ने उड़ान भरी.
पिछले साल यानी 2025 में चारधाम यात्रा से जुड़े एक प्राइवेट एयरलाइंस के हेलीकॉप्टर क्रैश के बाद DGCA ने पहाड़ों में उड़ान की समीक्षा करते हुए चार्टर हेलीकॉप्टर से जुड़े सख्त रूल्स एंड रेगुलेशन जारी किए थे. इसके तहत देहरादून स्थित सहस्त्रधारा हेलीपैड और केदारनाथ के करीब कंट्रोल रूम में एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) ऑफिसर और एक IMD के अधिकारी की तैनाती की गई थी, ताकि खराब मौसम की जानकारी पायलट और एयरलाइंस से साझा की जा सके.
दरअसल, अगले 15 दिनों में चारधाम यात्रा समाप्त हो रही है. ऐसे में आखिरी वक्त में तीर्थ यात्रियों की तादाद बढ़ जाती है. ऐसे में प्राइवेट एयरलाइंस पर यात्रियों को फ्लाई कराने का जबरदस्त दबाव रहता है.
चारधाम यात्रा के इस सीजन में यह पहला क्रैश- प्रतीक जैन
उत्तराखंड एविएशन अथॉरिटी के CEO प्रतीक जैन ने कहा, ‘चारधाम यात्रा के इस सीजन का ये पहला क्रैश जरूर है, लेकिन पिछले हफ्ते यानी 24 अक्टूबर को ही ट्रांस-भारत एविएशन के एक हेलीकॉप्टर ने टिहरी में इमरजेंसी लैंडिंग की थी. ये हेलीकॉप्टर सहस्त्रधारा से गुप्तकाशी के लिए उड़ान भर रहा था. 2023 में भी इसी एयरलाइंस के एक हेलीकॉप्टर ने केदारनाथ धाम के करीब इमरजेंसी लैंडिंग की थी. यही वजह है कि शुक्रवार की घटना के तुरंत बाद उत्तराखंड एविएशन अथॉरिटी ने एयरलाइंस की पूरी फ्लीट को अगले आदेश तक ग्राउंडेड कर दिया है.’
भारतीय सेना में कर्नल रैंक से रिटायर हुए थे हेलीकॉप्टर के पायलट
ट्रांस-भारत एयरलाइंस की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, राजधानी दिल्ली के टी-1 टर्मिनल में ऑफिस है और इसकी फ्लीट में कुल 3 हेलीकॉप्टर है. ये सभी बैल-407 हेलीकॉप्टर हैं, जिसमें कुल 6 यात्री उड़ान भर सकते हैं. कंपनी का दावा है कि ये हेलीकॉप्टर मध्य प्रदेश और चारधाम यात्रा के लिए ऑपरेट करते हैं. मध्य प्रदेश के इंदौर में भी कंपनी का एक ऑफिस है. एयरलाइंस का 11 पायलट की सेवाओं का दावा है. पायलट हिमांशु सब्बरवाल उनमें से एक थे, जो शुक्रवार को जोशीमठ की घटना में मारे गए. दिल्ली के रहने वाले हिमांशु सब्बरवाल, भारतीय सेना के कर्नल रैंक से रिटायर हुए थे और आर्मी एविएशन से जुड़े थे. रिटायरमेंट के बाद उन्होंने ट्रांस भारत एविएशन ज्वाइन की थी.
