सनातन धर्म में पूर्णिमा और अमावस्या तिथि को बहुत ही खास माना गया है जो कि हर माह में एक बार पड़ती है। इस दिन स्नान दान, पूजा पाठ और तप जप का विधान होता है मान्यता है​ कि अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान करने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है।

सभी अमावस्या तिथियों में सर्वपितृ अमावस्या का खास महत्व होता है इस दिन पितृपक्ष का समापन हो जाता है। गरुड़ पुराण के अुनसार आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा […]

पितृ पक्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से शुरू होता है और सर्वपितृ अमावस्या तक चलता है. पितृपक्ष इस बार 17 सितंबर से शुरू हो चुके हैं और 2 अक्तूबर तक चलेंगे.

   पितृपक्ष में किए गए तर्पण से पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है और घर में हमेशा सुख-शांति बनी रहती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पितृ पक्ष में श्राद्ध […]

क्या लड़कियां पितरों का श्राद्ध या तर्पण कर सकती हैं? ये सवाल आपके मन में कभी न कभी तो आया ही होगा. वहीं, समाज में ऐसे भी लोग हैं जिन्हें धर्म या पुराणों का पूरा ज्ञान नहीं है, लेकिन समाज की संरचना या संकीर्ण मानसिकता के कारण वे लड़कियों को कुछ धार्मिक गतिविधियों से पूरी तरह बाहर कर देते हैं.लेकिन हमारे पुराण में हर प्रश्न का उत्तर दिया गया है.

   यदि आप मूल रूप में लिखे पुराणों को पढ़ेंगे तो आपको सही जानकारी मिलेगी. उदाहरण के लिए, गरुड़ पुराण में बेटी और बहुओं के तर्पण के बारे में कुछ […]

उत्तराखंड में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने तिरुपति लड्डू ‘प्रसादम’ पर विवाद के बीच मंगलवार को कहा कि यह घटना हिंदू भावनाओं पर ‘हमला’ है.

  उन्होंने इसमें शामिल सभी लोगों के खिलाफ ‘सख्त कार्रवाई’ की मांग की. अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने ‘पीटीआई-वीडियो’ सेवा से कहा, “यह घटना हिंदू भावनाओं पर हमला है…यह करोड़ों हिंदुओं की […]

गरुड़ पुराण कहता है कि सभी प्राणियों को उसके द्वारा किया गया कर्म कई जन्मों तक भुगतना पड़ता है। कर्म के हिसाब से ही मनुष्य का अगला जन्म तय होता है। अगला जन्म किस योनि में होगा, यह भी मृत्यु से पहले ही तय हो जाता है।

   चलिए जानते हैं कि मृत्यु के पहले ही कैसे मनुष्य का अगला जन्म तय हो जाता है? धर्म को न मानने वाला गरुड़ पुराण कहता है जो मनुष्य जीवित […]

सनातन धर्म में पितृ पक्ष का बहुत महत्व है। इस दौरान लोग पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए कई तरह के अनुष्ठान और प्रार्थना करते हैं और श्राद्ध और तर्पण जैसे अनुष्ठानों के माध्यम से अपने पूर्वजों का सम्मान करते हैं।

   धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृ पक्ष के दौरान पूर्वज पितृलोक (पूर्वजों के लोक) से पृथ्वी पर उतरते हैं। एक आम सवाल उठता है: मृत्यु के बाद आत्मा को मुक्ति […]

सनातन धर्म मैं 18 पुराण हैं, जिनमें अग्नि पुराण, भविष्य पुराण, ब्रह्मवैवर्त पुराण, लिंग पुराण, ब्रह्म पुराण, पद्म पुराण, विष्णु पुराण, वायु पुराण, भागवत पुराण, नारद पुराण, मार्कंडेय पुराण, वराह पुराण, स्कंद पुराण, वामन पुराण, कूर्म पुराण, मत्स्य पुराण, गरुड़ पुराण और ब्रह्माण्ड पुराण शामिल हैं।

  प्राचीन मान्यताओं के अनुसार ब्रह्म पुराण को सबसे पुराना माना जाता है। मत्स्य पुराण को संस्कृत साहित्य की शैली में सबसे पुराना पुराण माना जाता है। नारद पुराण में सभी 18 […]

हिन्दू धर्मग्रंथों में चार युग की संकल्पना की गई है। ये हैं- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग। माना जाता है कि हर युग में मनुष्आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ?

सतयुग

चारों युगों में से सबसे पहला सतयुग है। वह युग जहां पाप, अधर्म, अन्याय और झूठ के लिए कोई जगह नहीं होता है, सतयुग कहा गया है। पुराणों के अनुसार, सतयुग का प्रारंभ कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। ग्रंथों में इस युग की अवधि लगभग 17 लाख 28 हजार वर्ष बताई गई है।

इस युग में देवी-देवता पृथ्वी पर मनुष्य की भांति ही रहते थे। कहते हैं, उनकी आयु लगभग 2 लाख वर्ष होती थी। पुष्कर इस युग का सबसे महान तीर्थ था। इस युग में भगवान विष्णु के 10 मुख्य अवतारों में से मत्स्य, कच्छप, वराह और नरसिंह अवतार हुए थे।

त्रेतायुग

ग्रंथों में त्रेतायुग की अवधि लगभग 12 लाख 28 हजार मानी गई है। इस युग की शुरुआत वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से हुई थी। इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 10,000 वर्ष हुआ करती थी। कहते हैं इस युग सबसे महान तीर्थ नैमिषारण्य था। इस युग में अधर्म का नाश करने के लिए भगवान विष्णु के श्री राम, वामन, परशुराम के अवतार हुए थे।

द्वापरयुग

पुराणों के मुताबिक, द्वापर युग की अवधि लगभग 8 लाख 64 हजार है। यह युग माघ माह के कृष्ण अमावस्या से शुरू हुआ था। हिंदू धर्म ग्रंथों में इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 1000 वर्ष बताई गई है। इस युग का सर्वश्रेष्ठ तीर्थ कुरुक्षेत्र को माना गया है। द्वापर युग में भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण ने धरती पर जन्म लेकर कंस जैसे दुष्टों का संहार किया था।

कलियुग

वर्तमान युग यानी कलियुग की अवधि तीनों युगों में सबसे कम है। इस युग की अवधि 4 लाख 32 हजार वर्ष बताई जाती है। कलियुग की शुरुआत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से मानी जाती है। यह तिथि इस साल सोमवार 30 सितंबर, 2024 को पड़ रही है।

हैरत की बात है कि इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 100 वर्ष ही रह गई है। वहीं, गंगा नदी को कलियुग का सबसे पवित्र तीर्थ स्थान बताया गया है। इस युग में भगवान विष्णु के 9वें अवतार भगवान बुद्ध का जन्म हुआ। भगवान विष्णु का 10वां अवतार कल्कि के रूप में कलियुग के अंत में होगा।

कब खत्म होगा कलियुग?

भारतीय काल-निर्णय के अनुसार कलियुग का अंत होने में अभी 4 लाख 26 हजार 875 साल बाकी हैं। इस समय कलियुग का प्रथम चरण चल रहा है और कलियुग के मात्र 5 हजार 125 साल हुए हैं। बता दें कि कलयुग के कुल अवधि 4 लाख 32 हजार साल के बताई गई है।य की बनावट से लेकर उसके व्यवहार और उम्र में कुछ परिवर्तन आए हैं।

   आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ? सतयुग […]

वन नेशन वन इलेक्शन (ONOE) पर कोविंद समिति के प्रस्ताव को मोदी सरकार ने मंजूरी दे दी है. प्रस्ताव को मंजूरी देने के बाद सरकार अब संसद में विधेयक लाएगी और वहीं पर उसका असली टेस्ट होगा.

    बिल को संसद के ऊपरी सदन यानी राज्यसभा से पास कराने में सरकार को मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ेगा, लेकिन लोकसभा में लड़ाई मुश्किल दिख रही है. निचले […]

देश में वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर चर्चा और तेज हो गई है। केंद्र की मोदी सरकार ने राम नाथ कोविंद वाली कमेटी के सभी प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है, ऐसे में अब वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर बिल लाने की तैयारी है।

   लेकिन कागज पर यह जितना आसान दिखाई देता है, असल में अभी एक लंबा रास्ता तय होना है। इसमें सभी को साथ लेकर चलने की जरूरत तो है ही, […]