पुरी जगन्नाथ मंदिर (Puri Jagannath Temple) में स्नान पूर्णिमा यानी स्नान यात्रा ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण उत्सव है, जो प्रसिद्ध रथ यात्रा की शुरुआत का प्रतीक है.

Spread the love

इस दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को 108 कलशों के पवित्र जल से स्नान कराया जाता है. ओडिशा के पुरी में स्नान पूर्णिमा के मौके पर जगन्नाथ मंदिर में भक्तों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए सख्त सुरक्षा-व्यवस्था की गई है. सेंट्रल आईजी सत्यजीत नायक ने बताया कि स्नान पूर्णिमा के मौके पर जगन्नाथ मंदिर में भक्तों के सुरक्षित और सुचारू दर्शन सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, बैरिकेडिंग और आपातकालीन इंतजाम किए गए हैं. इसके लिए 729 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है.

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड

स्नान पूर्णिमा की विशेषताएं

महास्नान और जल- मंदिर के ‘सुन कुआं’ (सोने के कुएं) से निकाले गए जल में जड़ी-बूटियों और सुगंधित इत्र को मिलाकर 108 घड़ों से अभिषेक किया जाता है.

हाथी वेश- स्नान के बाद, भगवान जगन्नाथ और बलभद्र को ‘गजानन वेश’ या हाथी के रूप में सजाया जाता है.

अनवसर काल- स्नान पूर्णिमा के बाद माना जाता है कि भगवान को बुखार आ गया है (वे अस्वस्थ हो जाते हैं), इसलिए वे अगले 15 दिनों के लिए एकांतवास में चले जाते हैं.

नवयौवन दर्शन- 15 दिनों तक बंद रहने के बाद, जब भगवान पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं, तब भक्त उन्हें अपने ‘नवयौवन रूप’ में दर्शन देते हैं.

कैसे है तैयारी

सेंट्रल आईजी सत्यजीत नायक ने स्नान पूर्णिमा के मौके पर पहुंचने वाले सभी श्रद्धालुओं का अभिनंदन करते हुए कहा कि महाप्रभु की स्नान यात्रा को देखने के लिए यहां भक्तों की काफी भीड़ उमड़ती हैं. भक्तों की संख्या करीब 3 से 4 लाख तक पहुंच जाती है. श्रद्धालुओं को प्रभु के दर्शन बिना किसी रुकावट के हो सके. इसके लिए यहां 700 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है, जिसमें 15 एसपी रैंक के ऑफिसर, 30 डीएसपी रैंक के ऑफिसर, 87 इंस्पेक्टर रैंक के ऑफिसर और 350 से अधिक एएसआई और एसआई रैंक के ऑफिसर को तैनात किया गया है.✧ धार्मिक और अध्यात्मिक


Spread the love