यहाँ 200 शब्दों में सारांश प्रस्तुत है:
उत्तराखंड के दयारा बुग्याल से युवती बबीता पांडे के रहस्यमयी ढंग से लापता होने के बाद एक बार फिर हिमालयी लोककथाएँ चर्चा में आ गई हैं। व्यापक खोज अभियान के बावजूद उनका कोई सुराग नहीं मिलने से लोगों के बीच अनेक सवाल उठ रहे हैं। कुछ लोग इसे दुर्घटना या मानवीय अपराध मानते हैं, जबकि कई स्थानीय लोग इसे पहाड़ों से जुड़ी प्राचीन मान्यताओं से जोड़कर देख रहे हैं।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड।
गढ़वाल और कुमाऊँ की लोकपरंपराओं में “आंछरी” या “आचारी” नामक दिव्य वन देवियों का उल्लेख मिलता है, जिन्हें ऊँचे पर्वतों, बुग्यालों और जंगलों की संरक्षक माना जाता है। टिहरी गढ़वाल का खैट पर्वत “परियों का देश” कहलाता है, जहाँ नौ परियों के निवास की लोकमान्यता प्रचलित है। जीतू बगड़वाल की कथा तथा नौ बहनों के परियों में परिवर्तित होने की कहानी आज भी जागर परंपरा में सुनाई जाती है।
स्थानीय विश्वासों के अनुसार परियाँ शोर, अभद्र व्यवहार और प्रकृति के अपमान को पसंद नहीं करतीं। इसलिए खैट पर्वत से जुड़े कई पारंपरिक नियम आज भी माने जाते हैं। दूसरी ओर वैज्ञानिक दृष्टिकोण इन कथाओं को कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, मौसम, दिशा-भ्रम और मानसिक प्रभावों से जोड़ता है। इस प्रकार खैट पर्वत और दयारा बुग्याल का रहस्य आस्था, लोकसंस्कृति, प्रकृति और अनसुलझे प्रश्नों का अनूठा संगम बनकर आज भी लोगों को आकर्षित करता है।
मान्यता है कि जो इस पर्वत पर जाएगा, वह गायब हो जाएगा। माना जाता है कि एमबीए की छात्रा बबिता पांडेय इसी पर्वत पर गई थीं, जो इस समय गुमशुदा हैं। पिछले कई दिनों से पुलिस अधिकारी उनकी तलाश कर रहे हैं। इसी घटना के बाद यह पर्वत चर्चा का केंद्र बन गया है।
उत्तराखंड में ऋषिकेश के पास स्थित यह पर्वत देखने में बेहद खूबसूरत और मनमोहक लगता है। इसकी सुंदरता को देखकर उत्तराखंड सरकार ने इसे ‘परियों का देश’ माना है। लोक मान्यताओं के मुताबिक, इस पहाड़ पर जाने के कुछ खास नियम हैं, जिनका उल्लंघन करने पर व्यक्ति गायब हो सकता है। अब सवाल उठता है कि इस पर्वत को लेकर लोककथाएं क्या कहती हैं?
क्या है खैट पर्वत की कहानी?
लोक मान्यता के मुताबिक, सदियों पहले आशा रावत नाम के एक व्यक्ति ने एक महिला से शादी की थी। शादी के कुछ साल बाद उनके यहां 9 बेटियों का जन्म हुआ, जो बेहद खूबसूरत थीं। माना जाता है कि जब वे 12 साल की हुईं, तो एक दिन उन्हें चारों तरफ अंधेरा और एक रहस्यमयी रोशनी दिखाई दी। उस रोशनी को देखकर नौों कन्याएं मोहित हो गईं और पर्वत की ओर चली गईं। हालांकि, वे पर्वत से कभी लौटकर नहीं आईं। तभी से खैट पर्वत को 9 परियों का गांव माना जाता है।
दूसरी लोक कहानी के मुताबिक, एक जीतू नामक किसान अपनी पत्नी के साथ उसी जगह रहते थे जो अक्सर पर्वत पर बैठकर बांसुरी बजाते थे। उनकी बांसुरी की मधुर आवाज सुन परियां उनके पास आईं और किसान को अपने साथ ले गईं। जिसके बाद वह किसान कभी किसी को नहीं दिखा। इसलिए माना जाता है कि इस पर्वत पर इंसानों को नहीं जाना चाहिए वरना परियां उन्हें अपने साथ ले जाएंगी।
कहां है खैट पर्वत
खैट पर्वत उत्तराखंड के गढ़वाल जिले में स्थित है जो समुद्र तल से लगभग 10000 फीट ऊंचा है। यह पर्वत इतना खूबसूरत है कि कई लोग इसे जन्नत मानते हैं। इस पर्वत पर जाने के लिए आपको सबसे पहले उत्तराखंड के ऋषिकेश पहुंचना होगा उसके बाद बस या कार में बैठकर गढ़वाल जिले के फेगुलीपट्टी के थात गांव तक जाना होगा। इसी थात गांव में खैट पर्वत है जहां आप जा सकते हैं।
