रुद्रपुर। शहर की राजनीति में शनिवार को उस समय नया मोड़ दिखाई दिया, जब यूथ कांग्रेस के प्रस्तावित कलेक्ट्रेट घेराव कार्यक्रम के बीच भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मेट्रोपोलिस कॉलोनी के गेट पर कांग्रेस का पुतला दहन कर दिया। भाजपा की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में मेयर विकास शर्मा, विधायक शिव अरोड़ा समेत पार्टी के नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
“कलेक्ट्रेट घेराव बनाम मेट्रोपोलिस गेट पर पुतला दहन: खरगे के ‘शुद्धिकरण’ से मनुस्मृति तक, रुद्रपुर में ब्राह्मणवाद की सियासत गरमाई”
“कांग्रेस का पहले से घोषित कलेक्ट्रेट घेराव, जवाब में भाजपा का पुतला दहन: खरगे प्रकरण ने छेड़ी मनुस्मृति और ब्राह्मणवाद पर बहस”
“खरगे के शुद्धिकरण पर सियासी संग्राम: कलेक्ट्रेट घेराव के जवाब में भाजपा का पुतला दहन, मनुस्मृति और ब्राह्मणवाद पर उठे सवाल”
“पहले कलेक्ट्रेट घेराव का ऐलान, फिर भाजपा का पुतला दहन: रुद्रपुर में खरगे प्रकरण से मनुस्मृति और ब्राह्मणवाद की बहस तक”
“रुद्रपुर में आमने-सामने कांग्रेस-भाजपा: कलेक्ट्रेट घेराव और पुतला दहन के बीच मनुस्मृति, शुद्धिकरण और ब्राह्मणवाद पर सवाल
राजनीतिक रूप से इस घटनाक्रम को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यूथ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव कार्यक्रम पहले से निर्धारित था। कांग्रेस कार्यकर्ता दर्ज मुकदमे के विरोध में कलेक्ट्रेट पहुंचने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान भाजपा ने मेट्रोपोलिस गेट को अपने विरोध प्रदर्शन के लिए चुना और कांग्रेस के खिलाफ पुतला दहन किया।
रुद्रपुर की राजनीति में विपक्ष के कार्यक्रम के जवाब में तत्काल इस तरह का समानांतर राजनीतिक प्रदर्शन चर्चा का विषय बन गया है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या भाजपा अब कांग्रेस के हर आंदोलन का जवाब सड़क पर उतरकर देने की रणनीति अपना रही है?
आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए यह घटनाक्रम और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। वर्ष 2027 का चुनाव अब दूर नहीं है और रुद्रपुर में राजनीतिक दल अपनी-अपनी जमीन मजबूत करने में जुटे हैं। कांग्रेस जहां सरकार के खिलाफ स्थानीय मुद्दों को लेकर आक्रामक दिखाई दे रही है, वहीं भाजपा अपने संगठन और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से विपक्ष पर राजनीतिक हमला तेज कर रही है।
भाजपा के सामने सबसे बड़ा सवाल विकास के दावों को लेकर भी खड़ा हो रहा है। शहर में सड़क, जल निकासी, यातायात, अतिक्रमण और विस्थापन जैसे मुद्दे लगातार जनता की चर्चा में हैं। दूसरी ओर ध्वस्तीकरण की कार्रवाइयों को लेकर प्रभावित दुकानदारों और परिवारों के बीच असंतोष की बातें भी सामने आती रही हैं। नंदलाल की दुकान समेत दुकानों के टूटने के मामले में आजीविका, पुनर्वास और प्रशासनिक कार्रवाई की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे हैं।
यहीं से भाजपा के जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही का प्रश्न सामने आता है। जनता यह जानना चाहती है कि विकास परियोजनाओं के नाम पर यदि किसी गरीब या छोटे व्यापारी की रोजी-रोटी प्रभावित होती है तो उसके पुनर्वास की जिम्मेदारी कौन लेगा?
इसी तरह प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों को लेकर भी राजनीतिक बहस चल रही है। यदि किसी पात्र परिवार को सरकारी आवास मिलता है तो वह योजना की पात्रता और सरकारी नियमों के आधार पर होना चाहिए। इस मुद्दे को धार्मिक या सामुदायिक आधार पर देखने के बजाय सरकार को लाभार्थियों की पात्रता और चयन प्रक्रिया सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करनी चाहिए।
रुद्रपुर की राजनीति में आज का पुतला दहन इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक संघर्ष अब सीधे सड़क पर दिखाई देने लगा है। एक ओर कांग्रेस कलेक्ट्रेट घेराव के माध्यम से सरकार और प्रशासन से सवाल पूछ रही है, दूसरी ओर भाजपा कांग्रेस के खिलाफ पुतला दहन करके अपनी राजनीतिक स्थिति स्पष्ट कर रही है।
सवाल यह है कि 2027 के चुनाव से पहले रुद्रपुर में राजनीति मुद्दों पर होगी या केवल विरोध-प्रदर्शनों पर?
शहर को नारों से ज्यादा समाधान चाहिए। व्यापारियों को सुरक्षित रोजगार चाहिए। प्रभावित परिवारों को न्यायपूर्ण पुनर्वास चाहिए। युवाओं को रोजगार चाहिए। शहर को बेहतर यातायात और जल निकासी व्यवस्था चाहिए। जनता चाहती है कि जनप्रतिनिधि इन सवालों पर अपना रिपोर्ट कार्ड सामने रखें।
मेट्रोपोलिस गेट पर हुआ पुतला दहन इसलिए महज एक राजनीतिक कार्यक्रम के रूप में देखने के बजाय आने वाले चुनावी संघर्ष की शुरुआती तस्वीर के रूप में भी देखा जा रहा है।
कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव और उसके जवाब में भाजपा का पुतला दहन—दोनों घटनाएं संकेत दे रही हैं कि रुद्रपुर में 2027 की राजनीतिक जमीन पर संघर्ष शुरू हो चुका है।
अब फैसला नारों का नहीं, जनता के मुद्दों का होगा।
