संपादकीय:इसका समाधान कैसे हो सकता है? 1. कानूनी कार्यवाही और पुलिस सुधार स्वतंत्र जांच – इस मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी (जैसे महिला आयोग, मानवाधिकार आयोग या SIT) से करवाई जानी चाहिए। पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई – आरोपित पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय जांच होनी चाहिए। एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य बनाना – पुलिस द्वारा शिकायत को टालना अपराध की श्रेणी में आता है, इसलिए ऐसी घटनाओं में FIR दर्ज करना अनिवार्य बनाया जाए। फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सुनवाई – पीड़िता को त्वरित न्याय दिलाने के लिए मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में होनी चाहिए। 2. महिला सुरक्षा और पुनर्वास महिला हेल्पलाइन नंबर (1091) पर शिकायत – पीड़िता महिला हेल्पलाइन, राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW), और राज्य महिला आयोग में शिकायत दर्ज करा सकती है। वन-स्टॉप सेंटर (One Stop Center) की सहायता – उत्तराखंड सरकार द्वारा चलाए जा रहे वन-स्टॉप सेंटर से महिलाओं को कानूनी, मानसिक और सामाजिक सहायता मिल सकती है। आश्रय गृह (Shelter Home) की सुविधा – पीड़िता और उसकी बेटियों को सुरक्षित स्थान प्रदान करने के लिए सरकार को तत्काल कदम उठाने चाहिए। 3. सामाजिक जागरूकता और निगरानी सामाजिक संस्थाओं और मीडिया की भूमिका – इस तरह के मामलों को उजागर करना जरूरी है ताकि पुलिस तंत्र में सुधार हो सके। स्थानीय महिला संगठनों की भागीदारी – महिला अधिकार संगठनों को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके। जनता की सतर्कता – समाज को पुलिस की जवाबदेही तय करने के लिए आवाज उठानी होगी ताकि भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो। 4. पुलिस व्यवस्था में सुधार लोकपाल प्रणाली लागू हो – पुलिस की कार्यप्रणाली की स्वतंत्र निगरानी के लिए लोकपाल जैसी संस्था होनी चाहिए। महिला पुलिस बल की संख्या बढ़े – ताकि महिलाओं से जुड़े मामलों की जांच महिला पुलिस अधिकारी करें और निष्पक्षता बनी रहे। सामुदायिक पुलिसिंग लागू हो – जनता और पुलिस के बीच पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सामुदायिक पुलिसिंग मॉडल अपनाना चाहिए। निष्कर्ष यह घटना पुलिस की निष्क्रियता, महिला उत्पीड़न और न्याय प्रणाली की खामियों को उजागर करती है। यदि सरकार, प्रशासन और समाज इस मामले में उचित कदम उठाते हैं, तो भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सकता है। पुलिस को “मित्र पुलिस” की छवि बनाए रखने के लिए जवाबदेह और पारदर्शी बनना होगा।

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“यह घटना पुलिस की निष्क्रियता, महिला उत्पीड़न और न्याय प्रणाली की खामियों को उजागर करती है जब रक्षक ही बन जाए भक्षक: उत्तराखंड पुलिस पर लगे गंभीर आरोप, पीड़िता न्याय के लिए भटकती रही!”

रक्षक ही भक्षक बन जाए तो कौन बचाएगा पहाड़ की बेटी को…वाह रे उत्तराखंड की मित्र पुलिस…उत्तराखंड पुलिस के पुलिसकर्मियों ने एक बार फिर अपने कर्मों और कार्यवाही से शर्मसार किया है। मामला सूबे के जनपद ऊधम सिंह नगर जुड़ा है। जहाँ पहले मित्र पुलिस के एक इंस्पेक्टर पर अपनी ही पत्नी और बच्चों के उत्पीड़न के आरोप है। तो वही इसी मामले में जनपद के पुलिस मुखिया पर भी गंभीर आरोप लगे है। इन आरोपों से जहां एक और मानवता शर्मसार हुई है तो वही मित्र पुलिस की कार्यप्रणाली से ऊधम सिंह नगर पुलिस की छवि भी फिर एक बार धूमिल हुई है। दअरसल उत्तराखंड में पुलिस अधिकारियों के द्वारा महिलाओं पर किए जा रहे उत्पीड़न रुकने का नाम नहीं ले रहे है। एक ऐसा ही मामला रुद्रपुर से सामने आया है जहां एसएसपी के पेशकार रहे इंस्पेक्टर पर अपनी पत्नी को पहले खुद पीटने और फिर बाहरी गुंडों को घर में बुलाकर पिटवाने के आरोप लगे है। हद तो तब हो गई जब पीड़िता के पिता ने सिड़कुल चौकी में तहरीर दी और पुलिस ने दबंगों पर कोई कार्रवाही नहीं की जिसके बाद पीढ़िता एफआईआर दर्ज न होने पर न्याय मांगने एसएसपी के पास गई तो एसएसपी साहब ने पारिवारिक मामला कहकर पल्ला झाड़ लिया। मामले में वैजयंती देवी के अनुसार उनकी दो बेटियाँ है। पहली बेटी की उम्र 7 वर्ष है और दूसरी बेटी ढाई साल की है। वैजयंती देवी का आरोप है कि जब से दूसरी बेटी का जन्म हुआ है तब से लड़की पैदा होने के ताने देकर उनको परेशान किया जा रहा है और आए दिन उनके साथ मारपीट की जा रही है। वैजयंती देवी के अनुसार उनके पति इंस्पेक्टर आशुतोष कुमार सिंह ने मंगलवार को शाम 6 बजे रुद्रपुर के दबंगो से भी उनके घर पर जानलेवा हमला करवाया। हमला करने वाले दबंगों में एक अनिल सिंह नाम का व्यक्ति है और दूसरा दारा सिंह है। दोनों पर कई केस दर्ज है और अनिल सिंह तो कुछ दिन पहले ही जेल से बाहर आया है। पीढ़िता के पिता हर्ष बहादुर चंद ने दबंगों पर कार्रवाही करने के लिए मंगलवार को सिड़कुल पुलिस चौकी में तहरीर सौंप दी थी लेकिन पुलिस ने जांच के नाम पर मामले को टाल दिया जिसके बाद वैजयंती देवी एसएसपी ऑफिस रुद्रपुर पहुंची और न्याय की गुहार लगाने लगी जिस पर एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने पारिवारिक मामला बताते हुए पल्ला झाड़ लिया।

बताया गया है कि उसके पति ने पहले भी दो शादियां की हैं, जिसमें एक पत्नी के साथ हर्जाने को लेकर समझौता हो गया है, जबकि एक अन्य पत्नी के साथ अभी भी समझौते पर विचार चल रहा है
उत्तराखंड पुलिस के पुलिसकर्मियों ने एक बार फिर अपने कर्मों और कार्यवाही से शर्मसार किया है। मामला सूबे के जनपद ऊधम सिंह नगर जुड़ा है। जहाँ पहले मित्र पुलिस के एक इंस्पेक्टर पर अपनी ही पत्नी और बच्चों के उत्पीड़न के आरोप है। तो वही इसी मामले में जनपद के पुलिस मुखिया पर भी गंभीर आरोप लगे है। इन आरोपों से जहां एक और मानवता शर्मसार हुई है तो वही मित्र पुलिस की कार्यप्रणाली से ऊधम सिंह नगर पुलिस की छवि भी फिर एक बार धूमिल हुई है

प्रिंट मीडिया, शैल ग्लोबल टाइम्स/ हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स। दिनेश बम रुद्रपुर, (उत्तराखंड)
दअरसल उत्तराखंड में पुलिस अधिकारियों के द्वारा महिलाओं पर किए जा रहे उत्पीड़न रुकने का नाम नहीं ले रहे है। एक ऐसा ही मामला रुद्रपुर से सामने आया है जहां एसएसपी के पेशकार रहे इंस्पेक्टर पर अपनी पत्नी को पहले खुद पीटने और फिर बाहरी गुंडों को घर में बुलाकर पिटवाने के आरोप लगे है। हद तो तब हो गई जब पीड़िता के पिता ने सिड़कुल चौकी में तहरीर दी और पुलिस ने दबंगों पर कोई कार्रवाही नहीं की जिसके बाद पीढ़िता एफआईआर दर्ज न होने पर न्याय मांगने एसएसपी के पास गई तो एसएसपी साहब ने पारिवारिक मामला कहकर पल्ला झाड़ लिया।

मामले में वैजयंती देवी के अनुसार उनकी दो बेटियाँ है। पहली बेटी की उम्र 7 वर्ष है और दूसरी बेटी ढाई साल की है। वैजयंती देवी का आरोप है कि जब से दूसरी बेटी का जन्म हुआ है तब से लड़की पैदा होने के ताने देकर उनको परेशान किया जा रहा है और आए दिन उनके साथ मारपीट की जा रही है। वैजयंती देवी के अनुसार उनके पति इंस्पेक्टर अशोक कुमार सिंह ने मंगलवार को शाम 6 बजे रुद्रपुर के दबंगो से भी उनके घर पर जानलेवा हमला करवाया। हमला करने वाले दबंगों में एक अनिल सिंह नाम का व्यक्ति है और दूसरा दारा सिंह है। दोनों पर कई केस दर्ज है और अनिल सिंह तो कुछ दिन पहले ही जेल से बाहर आया है। पीढ़िता के पिता हर्ष बहादुर चंद ने दबंगों पर कार्रवाही करने के लिए मंगलवार को सिड़कुल पुलिस चौकी में तहरीर सौंप दी थी लेकिन पुलिस ने जांच के नाम पर मामले को टाल दिया जिसके बाद वैजयंती देवी एसएसपी ऑफिस रुद्रपुर पहुंची और न्याय की गुहार लगाने लगी जिस पर एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने पारिवारिक मामला बताते हुए पल्ला झाड़ लिया।


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