रुद्रपुर देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लंबे कार्यकाल की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने के लिए राज्यभर में प्रदर्शनी, जनसंवाद और जागरूकता कार्यक्रमों की घोषणा की है। सरकार का दावा है कि जनता को विकास कार्यों की पूरी जानकारी दी जाएगी, हालांकि सोशल मीडिया पर कुछ लोग अभी भी उस ऐतिहासिक बयान की जानकारी खोज रहे हैं जिसमें एक मंत्री ने दावा किया था कि एक विशेष ऐप की मदद से जहां चाहें वहां बारिश कराई जा सकती है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड
प्रदेश में उपलब्धियों की प्रदर्शनी लगने वाली है, लेकिन जनता की दिलचस्पी इस बात में ज्यादा दिखाई दे रही है कि कहीं उस चमत्कारी ऐप का स्टॉल भी लगाया जाएगा या नहीं। कई लोगों का मानना है कि यदि ऐप से बारिश कराना संभव है तो फिर मानसून विभाग, बादल और मौसम वैज्ञानिकों की जरूरत पर भी पुनर्विचार होना चाहिए।
सोशल मीडिया पर लोगों ने मजाक में सुझाव दिया है कि सूखे इलाकों में टैंकर भेजने के बजाय अब मोबाइल चार्जर और इंटरनेट पैक भेजे जाएं। बस ऐप खोलिए, लोकेशन चुनिए और बारिश शुरू कर दीजिए।
इधर राज्य के कई मंत्री उपलब्धियों की जानकारी देने में जुटे हैं, जबकि विपक्ष और सोशल मीडिया विशेषज्ञ उनकी सामान्य ज्ञान परीक्षा लेने में व्यस्त हैं। कुछ लोगों का कहना है कि जनता को विकास योजनाओं के साथ-साथ मंत्रियों की “डिजिटल और वैज्ञानिक उपलब्धियों” की प्रदर्शनी भी दिखाई जानी चाहिए, ताकि नई पीढ़ी को पता चल सके कि कल्पनाशक्ति की कोई सीमा नहीं होती।
फिलहाल सरकार जनसंवाद की तैयारी में है और जनता इंतजार कर रही है कि अगली प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहीं कोई नया ऐप सूरज उगाने, बर्फबारी कराने या ट्रैफिक जाम हटाने का दावा तो नहीं कर देता। तब तक उत्तराखंड की राजनीति में “ऐप से बारिश” वाला किस्सा व्यंग्य प्रेमियों के लिए सदाबहार सामग्री बना हुआ है।
उत्तराखंड में 12 से 14 जून तक उपलब्धि प्रदर्शनी लगने जा रही है। सरकार का कहना है कि जनता को विकास कार्यों की जानकारी दी जाएगी, जबकि जनता यह जानने को ज्यादा उत्सुक है कि प्रदर्शनी में वह प्रसिद्ध “बारिश वाला ऐप” भी देखने को मिलेगा या नहीं।
सूत्रों के अनुसार, हर विकासखंड में जनकल्याण शिविर लगाए जाएंगे, जहां लोग योजनाओं की जानकारी लेने के साथ-साथ यह भी पूछ सकते हैं कि अगर ऐप से बारिश कराई जा सकती है तो गर्मी में बादलों की होम डिलीवरी कब शुरू होगी।
जिला स्तरीय संवाददाता सम्मेलन में मंत्री और अधिकारी उपलब्धियां गिनाएंगे, जबकि पत्रकार इस बात का इंतजार करेंगे कि कहीं कोई नया ऐप लॉन्च न हो जाए जो गड्ढों को सड़क और वादों को हकीकत में बदल दे।
भाजपा कार्यकर्ता घर-घर जाकर रिपोर्ट कार्ड दिखाएंगे। हालांकि कुछ नागरिकों का सुझाव है कि रिपोर्ट कार्ड के साथ सामान्य ज्ञान की छोटी परीक्षा भी रखी जाए, ताकि जनता को नेताओं की रचनात्मक प्रतिभा का भी पता चल सके।
फिलहाल सरकार तैयारियों में जुटी है और जनता उत्सुकता से इंतजार कर रही है कि प्रदर्शनी में विकास ज्यादा दिखाई देगा या कल्पनाशक्ति। उत्तराखंड की राजनीति में यह सवाल फिलहाल मानसून से भी ज्यादा चर्चित है।
