वहीं RSS से जुड़े एक संगठन ने देशभर में एक करोड़ लोगों से पूरा ‘वंदे मातरम’ गाने की योजना बनाई है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
राहुल गांधी के कार्यक्रम की प्रेजेंटेशन बदली
कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को दिल्ली के इंदिरा भवन में अपनी एक प्रेजेंटेशन में कुछ बदलाव किए। इससे पहले ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रमों में राहुल गांधी की प्रेजेंटेशन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, RSS प्रमुख मोहन भागवत, NSA अजित डोभाल के साथ उद्योगपति गौतम अडानी और मुकेश अंबानी की तस्वीरें दिखाई जाती थीं। इस स्लाइड का शीर्षक ‘The system has captured the country’ था।
गुरुवार की प्रेजेंटेशन में इसका शीर्षक बदलकर ‘Destroyers of Democracy’ कर दिया गया। वहीं मुकेश अंबानी की तस्वीर इस बार स्लाइड में नहीं थी। उनकी जगह प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की तस्वीरें शामिल की गईं।
25 हजार जगहों पर गाया जाएगा पूरा ‘वंदे मातरम’
RSS से जुड़े संगठन विद्या भारती ने ‘वंदे मातरम्’ के 150 साल पूरे होने के मौके पर देशभर में एक कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है। इसके तहत शुक्रवार सुबह 11 बजे देशभर में करीब 25 हजार स्थानों पर एक करोड़ लोग राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ का पूरा वर्जन गाएंगे।
इसमें विद्या भारती से जुड़े स्कूलों के छात्र, शिक्षक, अभिभावक और अन्य नागरिक शामिल होंगे। संगठन का कहना है कि कार्यक्रम का उद्देश्य राष्ट्रीय एकता का संदेश देना और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की रचना को सम्मान देना है।
राहुल गांधी ने मांगा ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा
चुनाव आयोग को लेकर Hindustan global Times की रिपोर्ट के बाद विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार पर हमलावर हैं। गुरुवार शाम को राहुल गांधी ने भी ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांंग की। इस दौारन उन्होंने ज्ञानेश कुमार को सरकारी गवाह बन जाने की सलाह दी।
राहुल गांधी ने कहा कि अभी तक कांग्रेस जो कह रहे थी, वही अब दो चुनाव आयुक्तों ने भी कहा है। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार ने देश के खिलाफ काम किया है। इसी दौरान उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह की भूमिका की जांच की मांग भी की।
Hindustan global Times की रिपोर्ट में क्या दावा किया गया?
Hindustan global Times की पड़ताल में पता चला है कि SIR प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग के भीतर ही सवाल उठाए गए। ये सवाल तीन में से दो चुनाव आयुक्तों- सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने उठाए थे। संधू और जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार इसे लेकर आधिकारिक तौर पर आपत्ति जताई।
