आसपास के लोगों को भी उसने यही नाम बताया था। पुलिस को भी मौके पर उसकी पहचान सदाराम के तौर पर ही मिली थी। लेकिन उसकी जेब से मिले आधार कार्ड ने पूरा राज खोल दिया। कार्ड पर सुरेंद्र कोली का नाम देखकर पुलिसकर्मी भी दंग रह गए। इसके बाद पुलिस ने आनन-फानन में दस्तावेजों और अन्य माध्यमों से जानकारी जुटाई तो उसकी पहचान निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली के रूप में हुई।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
पुलिस की शुरुआती जानकारी के मुताबिक कोली पिछले कुछ समय से हरिद्वार में अलग-अलग स्थानों पर रह रहा था। वह सबसे पहले पथरी क्षेत्र के मुस्तफाबाद में कुछ दिन रहा। इसके बाद रोशनाबाद क्षेत्र में रहने की जानकारी सामने आई। बाद में वह सप्तऋषि क्षेत्र के भूपतवाला में पहुंच गया। यहां लालमाता मंदिर के सामने उसने चाय का खोखा किराये पर लिया था। बताया जा रहा है कि चार दिन पहले ही उसने अनिल शर्मा नाम के शख्स से यह दुकान किराए पर ली थी। दुकान का मासिक किराया करीब 12 हजार रुपए था और छह महीने का किराया उसने एडवांस में दिया था। इसी खोखे में वह रहता भी था और चाय बेचता था। पहचान छिपाने के लिए उसने आसपास के लोगों को अपना नाम सदाराम बताया था। पुलिस के मुताबिक उसके पास मिले दस्तावेजों में असली पहचान दर्ज थी। जेब से आधार कार्ड के अलावा वोटर कार्ड भी मिला।
खोखा हटाए जाने से भी था परेशान
आधार कार्ड पर सुरेंद्र कोली का नाम सामने आने के बाद पुलिस ने उसके बारे में जानकारी जुटानी शुरू की। इसके बाद निठारी कांड से जुड़े उसके पुराने रिकॉर्ड और पहचान का मिलान किया गया। पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि कोली ने कुछ समय सुरक्षा गार्ड की नौकरी भी की थी, लेकिन यह काम उसे रास नहीं आया। इसके बाद वह अलग-अलग जगहों पर रहने लगा। परिवार से अलग रहने की बात भी प्रारंभिक जांच में सामने आई है। हालांकि हरिद्वार में उसके रहने की वास्तविक वजह और पिछले कुछ महीनों की गतिविधियों को लेकर पुलिस अभी जांच कर रही है। जिस खोखे में उसका शव मिला, उसे लेकर भी पुलिस कई बिंदुओं पर जांच कर रही है।
इन दिनों क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई चल रही थी और खोखा भी इसकी जद में बताया जा रहा है। प्रारंभिक तौर पर यह बात सामने आई है कि खोखा हटाए जाने को लेकर वह परेशान था। हालांकि पुलिस ने अभी इसे आत्महत्या की वजह के तौर पर आधिकारिक रूप से पुष्ट नहीं किया है। पुलिस उसके संपर्क में रहे लोगों से पूछताछ कर रही है और आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। सुरेंद्र कोली के नाम से सामने आए पुराने मामले के कारण पुलिस अब उसके हरिद्वार में बिताए समय की भी पड़ताल कर रही है। वह किन लोगों के संपर्क में था, कहां-कहां रहा, किन लोगों से मिला और सदाराम नाम से रहने की वजह क्या थी।
सिटी सीओ शिशु पाल सिंह नेगी ने कहा, चर्चित निठारी कांड के आरोपी ने आत्महत्या की है। एफएसएल की टीम ने मौके पर पहुंच कर जांच की है। आत्महत्या के कारणों की जांच चल रही है। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा गया है।
कोर्ट ने कर दिया था बरी
2005-06 के बीच हुए निठारी कांड का जब खुलासा हुआ था तो पूरा देश सन्न रह गया था। 19 साल जेल में रहने के बाद नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट से सुरेंद्र कोली बरी हो गया था।
बिना सत्यापन के रह रहा था, नाम भी गलत बताया
सुरेंद्र कोली भूपतवाला क्षेत्र में जिस खोखे में रह रहा था, वहां उसकी मौजूदगी को महज चार दिन हुए थे। ऐसे में बड़ा सवाल है कि किराये पर दुकान देने से पहले उसका सत्यापन कराया गया था या नहीं। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि मकान या दुकान किराये पर देने के दौरान पहचान संबंधी दस्तावेज लिए गए थे या नहीं। यदि दस्तावेज लिए गए थे तो उनका सत्यापन क्यों नहीं कराया गया। सुरेंद्र की मौत की घटना सामने आने से सत्यापन व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
