देहरादून/चम्पावत। उत्तराखंड में एक ओर देहरादून के क्लेमेनटाउन क्षेत्र में 26 वर्षीय महिला काजल की गोली मारकर हत्या से सनसनी फैल गई है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश में नए जिलों और कमिश्नरियों के गठन की मांग फिर जोर पकड़ने लगी है। दोनों घटनाएं राज्य में सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक पहुंच से जुड़े अलग-अलग सवाल सामने ला रही हैं।
क्लेमेनटाउन थाना क्षेत्र में काजल की गोली मारकर हत्या का मामला सामने आया।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
पुलिस के अनुसार, महिला के पति ने कथित तौर पर पुलिस कंट्रोल रूम में फोन कर पत्नी को गोली मारने की सूचना दी। इसके बाद उसका मोबाइल बंद मिला। पुलिस ने कॉल लोकेशन के आधार पर मौके पर पहुंचकर एक प्लॉट के कमरे से काजल का शव बरामद किया। फॉरेंसिक और फील्ड यूनिट ने मौके से साक्ष्य जुटाए हैं। मृतका के भाई की तहरीर पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर आरोपी पति की तलाश की जा रही है। परिजनों के अनुसार दंपती के बीच लंबे समय से पारिवारिक विवाद चल रहा था।
इसी बीच प्रदेश में सात नए जिलों और चार कमिश्नरियों के गठन की मांग भी फिर मुखर हो गई है। सेवानिवृत्त ऑफिसर्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर कुमाऊं में काशीपुर, खटीमा, डीडीहाट और रानीखेत तथा गढ़वाल में रुड़की, गैरसैंण और गंगोत्री को नए जिले बनाने की मांग की है। साथ ही देहरादून और पिथौरागढ़ को नई कमिश्नरी बनाने की मांग उठाई गई है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. डीएन तिवारी और सचिव पूर्व अभियंता गंगा सिंह मटियानी का कहना है कि नए प्रशासनिक जिलों और कमिश्नरियों के गठन से विकास योजनाओं की निगरानी, रोजगार के अवसर और प्रशासनिक पहुंच मजबूत हो सकती है तथा पलायन रोकने में मदद मिल सकती है।
उत्तराखंड में वर्तमान में 13 प्रशासनिक जिले हैं। वहीं भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में 19 जिले हैं। डीडीहाट, रानीखेत, खटीमा और काशीपुर को जिला बनाने की मांग को लेकर विभिन्न समय पर आंदोलन भी होते रहे हैं।
एक तरफ अपराध की चुनौती, दूसरी तरफ प्रशासनिक विस्तार की मांग—27 साल बाद उत्तराखंड में सुरक्षा, विकास और शासन की पहुंच को लेकर बहस फिर तेज हो गई है।
