बलात्कारी बाबा आसाराम को हाईकोर्ट से बड़ा झटका, उम्रकैद की सजा बरकरार

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जोधपुर। नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम बापू को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर बेंच ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखते हुए राहत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने आसाराम को तुरंत सरेंडर करने का आदेश भी दिया है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड


जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की डिवीजन बेंच ने बुधवार, 27 मई को यह फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि नाबालिग पीड़िता से दुष्कर्म के मामले में ट्रायल कोर्ट के फैसले में किसी प्रकार का बदलाव करने का आधार नहीं बनता। हालांकि मामले में सह-आरोपी शिल्पी और शरतचंद को राहत देते हुए बरी कर दिया गया।
गौरतलब है कि अगस्त 2013 में जोधपुर स्थित आश्रम में एक नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के आरोप में आसाराम को गिरफ्तार किया गया था। लंबी सुनवाई के बाद विशेष पॉक्सो कोर्ट ने 25 अप्रैल 2018 को उसे दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। वहीं सह-आरोपियों शरद और शिल्पी को 20-20 वर्ष की सजा दी गई थी।
ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सभी आरोपियों ने राजस्थान हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। हाईकोर्ट में 16 फरवरी से 20 अप्रैल 2026 तक लगातार डे-टू-डे सुनवाई चली। बचाव और अभियोजन पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने 20 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिस पर बुधवार को निर्णय सुनाया गया।
मामला उस समय देशभर में सुर्खियों में आया था, जब एक नाबालिग लड़की ने आरोप लगाया था कि धार्मिक उपचार और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के बहाने उसे आश्रम बुलाकर यौन शोषण और दुष्कर्म किया गया। पुलिस जांच, मेडिकल रिपोर्ट, गवाहों के बयान और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आसाराम को दोषी माना था।
फिलहाल आसाराम पैरोल पर बाहर चल रहा था, लेकिन हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब उसे दोबारा जेल जाकर सरेंडर करना होगा।


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