गढ़वाल मंडल मुख्यालय पौड़ी आज कर्मचारी आक्रोश का केंद्र बन गया, जब राष्ट्रीय पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा, उत्तराखंड के बैनर तले सैकड़ों शिक्षक एवं कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर विशाल रैली निकालते हुए कमिश्नरी का घेराव किया। यह रैली पौड़ी बस अड्डे से शुरू होकर एजेंसी चौक और कंडोलिया होते हुए कमिश्नरी परिसर तक पहुँची, जहां प्रदर्शनकारियों ने जोरदार नारेबाजी कर सरकार के खिलाफ अपना रोष प्रकट किया।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
रैली के दौरान कर्मचारियों ने साफ शब्दों में कहा कि वर्षों से चल रहे आंदोलन और बार-बार की मांगों के बावजूद सरकार पुरानी पेंशन बहाली को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। इससे कर्मचारियों में भारी असंतोष व्याप्त है।
मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीपी सिंह रावत ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पुरानी पेंशन बहाली पर निर्णय नहीं लिया गया, तो कर्मचारी वर्ग मतदान के जरिए अपना जवाब देगा।
प्रदेश अध्यक्ष मनोज अवस्थी ने कहा कि बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा के लिए पुरानी पेंशन ही एकमात्र सहारा है, जिसे कर्मचारियों से छीन लिया गया है।
प्रदेश प्रभारी विक्रम सिंह रावत ने सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जहां एक दिन के विधायक और सांसद को पेंशन मिलती है, वहीं दशकों तक सेवा देने वाले कर्मचारियों को इससे वंचित रखा जा रहा है।
संगठन के मुख्य संयोजक जयदीप रावत ने कर्मचारियों से आह्वान किया कि वे आगामी चुनाव में उसी राजनीतिक दल का समर्थन करें, जो अपने घोषणा पत्र में पुरानी पेंशन बहाली का स्पष्ट वादा करेगा।
प्रदेश महिला अध्यक्षा रानीता विश्वकर्मा ने इसे हर परिवार के भविष्य से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कहा कि यह केवल कर्मचारियों की नहीं, बल्कि समाज की लड़ाई है।
गढ़वाल मंडल अध्यक्ष एवं मंत्री शंकर भट्ट और राजीव उनियाल ने संयुक्त बयान में एनपीएस को बाजार आधारित और असुरक्षित व्यवस्था बताते हुए कहा कि इसमें भविष्य की कोई गारंटी नहीं है।
रैली में बड़ी संख्या में महिला कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी भी देखने को मिली। साथ ही कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि गढ़वाल कमिश्नरी मुख्यालय होने के बावजूद यहां नियमित रूप से कमिश्नर की उपस्थिति नहीं रहती, जो प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है।
कमिश्नरी पहुंचने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपा, जिसे अपर जिला अधिकारी ने कमिश्नर की ओर से प्राप्त किया।
रैली में शामिल प्रमुख नाम:
मंजू नेगी, सरिता माहारी, अनिता बिष्ट, भारती जुयाल, सूचिता, सुमित्रा रावत, प्रीति, हेमंती, सालिनी चौधरी, विधि, मंजू असवाल, निर्मला राणा, प्राची, कामिनी, रश्मि गौड़, शशि चौधरी, ऋषि सेमवाल, अनूप बरतवाल, सुबोध कुकरेती, संतोष खंडूरी, विजय नेगी, मनोज बिष्ट, संग्राम नेगी, भवान नेगी, राजपाल बिष्ट, प्रेम चन्द्र ध्यानी, जसपाल रावत, जसपाल गुसाईं, माखन लाल, अमित नौडियाल, देवी गोस्वामी, महेंद्र चौहान, संजय, संजय नेगी, रेवती नंदन डंगवाल, राकेश रावत, मनोज भंडारी, प्रवीण पंवार, सुजीत लिंगवाल, मनोज काला, विक्रम रावत, शंकर भट्ट, नरेश भट्ट, आलोक भट्ट, रणवीर सिंघवाल, सतीश कुमार, पुरण फर्स्वाण, जगत फर्स्वाण, हेमलता कोठियाल, हर्षी बहुगुणा, कैलाश, रोशन गुसाईं, सुरेंद्र बर्तवाल, राजकुमार, प्रदीप कोहली, लक्ष्मण सजवान, जगदीश विष्ट, अभिषेक नवानी, विकास रावत, अंकित भट्ट, प्रवीण घिल्डियाल, अंकित रौठान, अंकुश नौटियाल, आशीष शुक्ला, रणवीर सिंधवाल, सौरभ नौटियाल, संदीप मैठाणी, विनोद चौहान, चंद्रशेखर उनियाल, धनवीर रमोला, राकेश चंद्र, दीपक मियां, शैलेन्द्र मैठाणी, चमनेश्वर भट्ट, कुलदीप रावत, दीपक नेगी, आनंद सिंह लिंगवाल, प्रतीक पोखरियाल, रघुराज सिंह चौहान, बिजलवान, शिवदयाल भंडारी, मदन भंडारी, दीपक गोदियाल, अंकित, कीर्ति भट्ट, दिगंबर रावत, दयाशंकर उनियाल, नरेंद्र, दिनेश नेगी, आयुष चौहान, सुबोध जोशी सहित सैकड़ों कर्मचारी मौजूद रहे।
पौड़ी में हुआ यह प्रदर्शन स्पष्ट संकेत दे रहा है कि पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा अब केवल मांग नहीं, बल्कि आंदोलन का रूप ले चुका है। यदि सरकार ने समय रहते इस पर निर्णय नहीं लिया, तो इसका सीधा असर आगामी चुनावों में देखने को मिल सकता है।

