मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में खाली रह गईं कुर्सियां, मंच पर बैठने की होड़, लेकिन भीड़ जुटाने में पिछड़े स्थानीय नेता!


गांधी पार्क में ,3000 से भी कम कुर्सियों की व्यवस्था, आधी से अधिक खाली नजर आईं; महापौर विकास शर्मा और विधायक शिव अरोड़ा के बीच पुरानी खींचतान का असर भी चर्चा में

अवतार सिंह बिष्ट,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स | उत्तराखंड, देश-दुनिया और जन सरोकारों की खबरों पर नजर


रुद्रपुर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के रुद्रपुर स्थित गांधी पार्क में आयोजित कार्यक्रम में अपेक्षित भीड़ नजर नहीं आई। कार्यक्रम के लिए 2000 से भी कम कुर्सियां लगाई गई थीं, लेकिन इनमें से लगभग आधी कुर्सियां खाली रह गईं। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में खाली कुर्सियों का दृश्य राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया।
कार्यक्रम में एक दिलचस्प नजारा यह भी देखने को मिला कि मंच पर बैठने के लिए नेताओं और पदाधिकारियों में उत्साह और होड़ दिखाई दी, लेकिन मंच तक पहुंचने वाले नेताओं के साथ जनसमर्थकों की भीड़ अपेक्षा के अनुरूप नजर नहीं आई। सवाल उठ रहा है कि नेताओं में मंच पर जगह पाने की होड़ तो है, लेकिन अपने साथ जनता और कार्यकर्ताओं की भीड़ लाने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?
भीड़ जुटाने और कार्यक्रम को सफल बनाने की जिम्मेदारी स्थानीय संगठन तथा जनप्रतिनिधियों की मानी जा रही थी। ऐसे में महापौर विकास शर्मा की भूमिका भी चर्चा के केंद्र में रही। गांधी पार्क में खाली कुर्सियों का नजारा आयोजन की तैयारियों और जनसंपर्क को लेकर सवाल खड़े करता नजर आया।
राजनीतिक चर्चाओं में महापौर विकास शर्मा और क्षेत्रीय विधायक शिव अरोड़ा के बीच पूर्व में सामने आई खींचतान को भी इस स्थिति से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, खाली कुर्सियों के पीछे वास्तविक कारणों की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय राजनीतिक समीकरणों और संगठनात्मक तालमेल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
मुख्यमंत्री का कार्यक्रम केवल मंचीय संबोधनों और नेताओं की मौजूदगी से सफल नहीं माना जाता। असली परीक्षा तब होती है जब जनप्रतिनिधि अपने साथ जनता का विश्वास और भागीदारी लेकर पहुंचते हैं। गांधी पार्क का खाली कुर्सियों वाला दृश्य स्थानीय राजनीति के लिए एक बड़ा सवाल छोड़ गया है—मंच पर बैठने की होड़ तो खूब है, लेकिन जनता को साथ लाने की जिम्मेदारी आखिर कौन निभाएगा?
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