

रुद्रपुर की राजनीति इन दिनों एक दिलचस्प मोड़ पर खड़ी दिखाई देती है, जहां धर्म, जनसंपर्क और सियासी समीकरण एक साथ मिलकर नई दिशा तय कर रहे हैं। ट्रांजिट कैंप स्थित श्री श्री राधा गोविंद मंदिर में आयोजित अखंड महानाम संकीर्तन का भव्य समापन हो या इंद्रा कॉलोनी के रामलीला मैदान में बाबा श्याम कृपा महोत्सव—इन दोनों बड़े धार्मिक आयोजनों में एक नाम लगातार केंद्र में बना रहा, वह है पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल।
रविवार को श्री श्री राधा गोविंद मंदिर में संकीर्तन के समापन अवसर पर भक्ति का ऐसा वातावरण बना कि पूरा क्षेत्र “हरे रामा-हरे कृष्णा” के महामंत्र से गूंज उठा। इससे एक दिन पूर्व शनिवार शाम को राजकुमार ठुकराल ने संकीर्तन में पहुंचकर संतों का आशीर्वाद लिया, कीर्तन श्रवण किया और आयोजन समिति द्वारा उनका भव्य स्वागत व सम्मान किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि महानाम संकीर्तन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने वाला माध्यम है, जो आपसी प्रेम और भाईचारे को मजबूत करता है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड) रही थी।
इस संकीर्तन में श्री राधा कृष्ण सम्प्रदाय, मानव मुक्ति सम्प्रदाय, श्री कृष्ण सम्प्रदाय, राधे सम्प्रदाय, जय जगन्नाथ सम्प्रदाय और श्री गुरु भजन सम्प्रदाय सहित कई कीर्तन मंडलियों ने प्रस्तुति दी। ढोल-मंजीरों की थाप और भक्ति रस में डूबे श्रद्धालुओं ने पूरे ट्रांजिट कैंप को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया। कार्यक्रम के समापन पर विशेष पूजा, तुलसी परिक्रमा और महाप्रसाद वितरण किया गया।
इस अवसर पर विधायक तिलकराज बेहड़, तरुण दत्ता, अजय नारायण, मंदिर समिति अध्यक्ष पिंटू राय, सचिव एडवोकेट शुभम एम स्वर्णकार, उपाध्यक्ष कृष्ण पद विश्वास, कोषाध्यक्ष केना मंडल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
दूसरी ओर, इंद्रा कॉलोनी के रामलीला मैदान में बाबा श्याम के लाडले परिवार द्वारा आयोजित चतुर्थ श्री श्याम कृपा महोत्सव भी भक्ति और उत्साह का केंद्र बना रहा। पूरी रात चले इस संकीर्तन में श्याम प्रेमियों ने भजनों पर झूमकर बाबा श्याम की महिमा का गुणगान किया। कार्यक्रम का शुभारंभ गूगा लाल सिंगला और मनोज सिंगला ने ज्योति प्रज्वलित कर किया।
इस महोत्सव में भी राजकुमार ठुकराल की उपस्थिति ने विशेष ध्यान खींचा। उन्होंने बाबा श्याम की अखंड ज्योति के दर्शन कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की और आयोजकों ने उन्हें स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। अपने संबोधन में ठुकराल ने कहा कि बाबा श्याम की भक्ति व्यक्ति को मानसिक शांति और जीवन में संबल प्रदान करती है।
कार्यक्रम में विख्यात भजन गायक विवेक शर्मा, अजय शर्मा और कान्हा व्यास ने अपनी मधुर प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध किया, जबकि नरेश म्यूजिकल ग्रुप की धुनों ने माहौल को और भी भावपूर्ण बना दिया। फूलों की होली इस आयोजन का मुख्य आकर्षण रही, जिसमें श्रद्धालु भक्ति के रंगों में पूरी तरह सराबोर नजर आए। अंत में भव्य आरती और छप्पन भोग के साथ प्रसाद वितरण किया गया।
इस दौरान अंकित गुप्ता, रेखा अग्रवाल, राज अग्रवाल, वीरेन्द्र गुप्ता, सुरेश सचदेवा, मुकेश गोयल, चेतन चुघ, पंकज खुराना, आकाश अरोरा, विक्की चिलाना, शिव कुमार, दीपक नारंग, विजय छाबड़ा, उमेश कौशिक सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
राजनीति में धर्म की धुरी और ठुकराल का प्रभाव
रुद्रपुर विधानसभा की सियासत को समझने के लिए इन आयोजनों को केवल धार्मिक दृष्टि से देखना पर्याप्त नहीं होगा। यहां एक गहरी राजनीतिक परत भी साफ नजर आती है। कभी भारतीय जनता पार्टी में रहते हुए राजकुमार ठुकराल की पहचान “हिंदू हृदय सम्राट” के रूप में स्थापित थी। धार्मिक आयोजनों में उनकी सक्रियता और जनसंपर्क शैली ने उन्हें एक मजबूत जननेता के रूप में खड़ा किया।
समय के साथ राजनीतिक परिस्थितियां बदलीं और ठुकराल ने कांग्रेस का दामन थामा, मगर उनकी धार्मिक छवि में कोई कमी नहीं आई। बल्कि मौजूदा परिदृश्य में यह छवि और अधिक प्रभावी होती दिख रही है। रुद्रपुर में अब हालात ऐसे बनते जा रहे हैं जहां हर छोटे-बड़े धार्मिक आयोजन में ठुकराल की मौजूदगी चर्चा का विषय बन जाती है।
एक समय था जब धार्मिक मंचों पर भारतीय जनता पार्टी का वर्चस्व माना जाता था और कांग्रेस की उपस्थिति सीमित रहती थी। मगर अब तस्वीर बदलती दिख रही है। मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा हो, संकीर्तन हो, जागरण हो या गृह प्रवेश—हर जगह ठुकराल की सक्रिय भागीदारी ने राजनीतिक समीकरणों को नई दिशा दी है।
बीजेपी में बढ़ती बेचैनी और बदलते समीकरण
रुद्रपुर में ठुकराल की बढ़ती सक्रियता ने भारतीय जनता पार्टी के भीतर हलचल पैदा कर दी है। कारण स्पष्ट है—धार्मिक मंच केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि जनसंपर्क का सबसे प्रभावी माध्यम भी है। यहां से सीधा जुड़ाव वोटर के दिल तक पहुंचता है।
ठुकराल इस रणनीति को बखूबी समझते हैं और लगातार धार्मिक आयोजनों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर जनता के साथ भावनात्मक रिश्ता मजबूत कर रहे हैं। यही कारण है कि अब भाजपा के परंपरागत वोट बैंक में भी हलचल महसूस की जा रही है।
मिशन 2027 की जमीन तैयार
इन तमाम घटनाक्रमों को अगर एक सूत्र में पिरोया जाए तो स्पष्ट संकेत मिलता है कि रुद्रपुर में मिशन 2027 की पटकथा लिखी जा रही है—और इस पटकथा के केंद्र में राजकुमार ठुकराल नजर आते हैं।
उनकी रणनीति स्पष्ट है—धर्म, जनसंपर्क और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से व्यापक जनाधार तैयार करना। धार्मिक आयोजनों में उनकी निरंतर उपस्थिति न केवल उनकी छवि को मजबूत कर रही है, बल्कि उन्हें हर वर्ग तक पहुंचाने का काम भी कर रही है।




