बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों से पहले ही सियासी गलियारों में कई तरह की अटकलें तेज हैं. अगर इस बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) जनता दल (यू) से ज़्यादा सीटें जीतती है, तो सत्ता का पूरा समीकरण बदल सकता है.

यह स्थिति NDA के भीतर एक नए शक्ति-संतुलन को जन्म दे सकती है. BJP तब न केवल सरकार गठन में निर्णायक भूमिका निभाएगी, बल्कि मुख्यमंत्री पद के लिए भी नैतिक दबाव बना सकती है.

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

अगर बीजेपी निकली आगे, तो क्या जेडीयू फिर बदलेगी पाला?

ऐसे में सबसे अहम सवाल यह होगा कि क्या नीतीश कुमार, जिन्होंने अब तक कई बार अपने अनुभव और राजनीतिक कौशल से सत्ता की दिशा मोड़ी है, इस दबाव को स्वीकार करेंगे या कोई नया दांव खेलेंगे? अगर बीजेपी ने खुद का सीएम चेहरा आगे किया, तो JD(U) में असंतोष भड़क सकता है. यह असंतोष उस हद तक जा सकता है जहां JDU फिर से विपक्षी खेमे यानी RJD और कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने पर विचार करे.

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बदल सकते हैं नीतीश कुमार अपना पाला

हालांकि नीतीश कुमार कई बार सार्वजनिक मंचों से यह घोषणा कर चुके हैं कि वह अब किसी भी परिस्थिति में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के साथ नहीं जाएंगे, लेकिन बिहार की राजनीति में “कुछ भी हो सकता है” का सिद्धांत कई बार सच साबित हुआ है. अगर परिणाम ऐसी परिस्थिति बना दें जहां JD(U) को अपनी राजनीतिक अस्तित्व की रक्षा करनी पड़े, तो गठबंधन बदलने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

परिस्थितियों के अनुसार बदलते रहे हैं नीतीश कुमार

इतिहास गवाह है कि नीतीश कुमार परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने में माहिर रहे हैं. उन्होंने पहले भी बीजेपी से अलग होकर महागठबंधन बनाया और फिर लौटकर NDA में शामिल हो गए. इसलिए अगर इस बार के नतीजों में बीजेपी को बढ़त मिलती है, तो बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है जहाँ नतीजे सिर्फ सरकार नहीं, बल्कि भविष्य की राजनीति की दिशा तय करेंगे.