हाल के दिनों में वे राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) में सैन्य सलाहकार के रूप में देश की सुरक्षा रणनीति में अहम भूमिका निभा रहे थे। नए सीडीएस के कंधों पर अब भारतीय सेनाओं के आधुनिकीकरण और तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बढ़ाने (थिएटराइजेशन मॉडल) की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड
प्रारंभिक जीवन और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक योग्यता
14 दिसंबर 1985 को प्रतिष्ठित ‘गढ़वाल राइफल्स’ की 8वीं बटालियन में कमीशन पाने वाले जनरल सुब्रमणि राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) और भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) के पूर्व छात्र रहे हैं। उन्होंने न केवल देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी सैन्य शिक्षा का लोहा मनवाया है। वे ब्रिटेन के जॉइंट सर्विसेज कमांड स्टाफ कॉलेज और नई दिल्ली के नेशनल डिफेंस कॉलेज के पूर्व छात्र हैं। उनके पास किंग्स कॉलेज लंदन से मास्टर ऑफ आर्ट्स (MA) और मद्रास विश्वविद्यालय से रक्षा अध्ययन में एम.फिल (M.Phil) की उच्च डिग्रियां हैं।
चीन और पश्चिमी सीमा का लंबा अनुभव
जनरल सुब्रमणि को भारत की सबसे संवेदनशील और कठिन भौगोलिक सीमाओं पर सेना का नेतृत्व करने का व्यापक अनुभव है। असम में ‘ऑपरेशन राइनो’ के तहत उन्होंने उग्रवाद विरोधी अभियान के दौरान 16 गढ़वाल राइफल्स की कमान सफलतापूर्वक संभाली थी। इसके साथ उन्होंने जम्मू-कश्मीर में 168 इन्फैंट्री ब्रिगेड और सेंट्रल सेक्टर में 17 माउंटेन डिवीजन का नेतृत्व किया है। उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक पश्चिमी मोर्चे पर भारतीय सेना की प्रमुख स्ट्राइक कोर, ‘2 कोर’ (खड़गा कोर) की कमान संभालना रही है। इसके अलावा वे उप थल सेनाध्यक्ष (VCOAS) और मध्य कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ जैसे शीर्ष पदों पर रह चुके हैं।
कूटनीतिक और सैन्य खुफिया मामलों के विशेषज्ञ
फील्ड में कमान संभालने के साथ-साथ जनरल सुब्रमणि ने कई महत्वपूर्ण कूटनीतिक और स्टाफ नियुक्तियों पर भी शानदार कार्य किया है। वे कजाकिस्तान में भारत के डिफेंस अटाशे (Defence Attache) के रूप में देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने रक्षा मंत्रालय के एकीकृत मुख्यालय में सैन्य खुफिया विभाग (Military Intelligence) के उप महानिदेशक के रूप में भी अपनी सेवाएं दी हैं. उत्तरी कमान के चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने चीन और पाकिस्तान दोनों सीमाओं की परिचालन स्थितियों और चुनौतियों को बेहद करीब से समझा है।
सर्वोच्च पदकों से सम्मानित
देश के प्रति उनकी इस असाधारण, विशिष्ट और समर्पित सेवा के लिए उन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा कई सर्वोच्च सैन्य सम्मानों से नवाजा जा चुका है। इनमें परम विशिष्ट सेवा पदक (PVSM), अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM), सेना पदक (SM) और विशिष्ट सेवा पदक (VSM) शामिल हैं।
