उनके इस बयान के बाद नेपाल में विवाद हो गया। नेपाल में विशेषज्ञों, पूर्व राजनयिकों और सोशल मीडिया यूजर्स ने आलोचना की है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड
संसद में बयान
संसद के 11 मई को शुरू हुए मौजूदा सत्र में अपनी पहली उपस्थिति में शाह ने आगे कहा कि भारत और नेपाल ने इतिहासकारों, सर्वेक्षकों और विशेषज्ञों की मदद लेकर समाधान खोजने पर सहमति जताई है और कहा कि काठमांडू ने इस मामले को चीन और ब्रिटेन के साथ भी उठाया है। नेपाल और भारत के बीच लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को लेकर पुराना सीमा विवाद है। भारत का कहना है कि ये क्षेत्र उत्तराखंड का हिस्सा हैं और इस मुद्दे को द्विपक्षीय बातचीत के माध्यम से हल किया जाना चाहिए। नई दिल्ली ने रविवार को नेपाल के प्रधानमंत्री की टिप्पणियों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। लेकिन इस महीने की शुरुआत में, भारत ने लिपुलेख दर्रे से होकर गुजरने वाली आगामी कैलाश मानसरोवर यात्रा पर नेपाल की आपत्ति को खारिज करते हुए, इस क्षेत्र पर काठमांडू के क्षेत्रीय दावों को एकतरफा कृत्रिम विस्तार करार दिया था, जिसे नई दिल्ली अस्वीकार्य मानती है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को तथ्यों का अध्ययन कर मित्रवत तरीके से बैठकर इस मुद्दे का समाधान करना चाहिए। नेपाल और भारत के बीच कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा को लेकर लंबे समय से सीमा विवाद है। भारत का कहना है कि ये क्षेत्र उत्तराखंड का हिस्सा हैं और विवाद का समाधान द्विपक्षीय वार्ता के जरिये होना चाहिए।
चीन, ब्रिटेन के साथ भी चर्चा की
बालेन्द्र शाह ने यह भी बताया कि नेपाल ने इस मुद्दे पर चीन और ब्रिटेन के साथ भी कूटनीतिक चर्चा की है। उनके अनुसार ब्रिटेन को इसलिए शामिल किया गया, क्योंकि यह विवाद उस दौर से जुड़ा है जब ब्रिटिश शासन इस क्षेत्र में मौजूद था।
97% सीमा विवाद पहले ही सुलझाए जा चुके हैं
प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत में नेपाल के पूर्व राजदूत नीलाम्बर आचार्य ने कहा कि नेपाल द्वारा भारतीय क्षेत्र पर अतिक्रमण किए जाने की कोई जानकारी उनके पास नहीं है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच लगभग 97 प्रतिशत सीमा विवाद पहले ही सुलझाए जा चुके हैं। केवल कुछ मुद्दे शेष हैं। एक अन्य पूर्व राजदूत दीप कुमार उपाध्याय ने भी कहा कि नेपाल द्वारा भारत की भूमि पर अतिक्रमण का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। भारत ने भी कभी ऐसा मुद्दा औपचारिक रूप से नहीं उठाया है। नेपाल-भारत सीमा मामलों के विशेषज्ञ और भूगोलवेत्ता बुद्धि नारायण श्रेष्ठ ने भी प्रधानमंत्री के दावे को खारिज करते हुए कहा कि नेपाल ने कभी भारतीय क्षेत्र पर कब्जा नहीं किया।
नेपाली पीएम की संसद में पहली मौजूदगी
बालेन्द्र शाह ने संसद सत्र शुरू होने के लगभग तीन सप्ताह बाद रविवार को पहली बार प्रतिनिधि सभा में उपस्थिति दर्ज कराई। मार्च में प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने वाले शाह संसद की कार्यवाही शुरू होने के बाद पहली बार सदन में पहुंचे और सांसदों द्वारा उठाए गए विभिन्न मुद्दों पर जवाब दिया। संसद का सत्र 11 मई से शुरू हुआ था, लेकिन प्रधानमंत्री की अनुपस्थिति को लेकर विपक्षी दलों ने कई बार सदन की कार्यवाही बाधित की। विपक्षी सांसदों ने कम से कम चार बार कार्यवाही में व्यवधान डाला और एक बार बहिष्कार भी किया था।
