सुरक्षा एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि आखिर एक ‘व्यंग्य’ के रूप में शुरू हुआ आनलाइन पेज कुछ ही दिनों में दिल्ली की सड़कों पर लाठीचार्ज और अराजकता की वजह कैसे बन गया? पुलिस सूत्रों के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए कई प्रदर्शनकारी छात्र नहीं थे।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
संदिग्ध हैंडल्स के जरिए फैलाई गई भ्रामक जानकारी
हिंसा में अन्य बाहरी तत्वों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस इस मामले में इंटरनेट मीडिया गतिविधियों की बारीकी से जांच कर रही है। अधिकारियों ने बताया कि कई संदिग्ध हैंडल्स के जरिए भ्रामक जानकारी फैलाई गई थी, जिनमें से कुछ अकाउंट्स कथित तौर पर पाकिस्तान से संचालित हो रहे थे।

अशोक रोड पर प्रदर्शकारियों को हटाने के लिए छोड़ी गई आंसू गैस के शैल को वापस फेंकता प्रदर्शनकारी। जागरण
इनमें झूठा दावा किया गया था कि हिंसा के दौरान सात प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई, 391 घायल हुए और 250 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
इस पूरे मार्च को हवा देने के लिए मुख्य रूप से इंस्टाग्राम और एक्स जैसे इंटरनेट मीडिया का इस्तेमाल किया गया है। सीजेपी के इंस्टाग्राम हैंडल ने महज कुछ ही दिनों में दो करोड़ से अधिक फालोअर्स बटोरे, जिसने देश की स्थापित राजनीतिक पार्टियों को भी पीछे छोड़ दिया।
आईपी एड्रेस खंगालने में जुटी पुलिस
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी तेजी से बिना किसी ‘पेड बोट्स’ या ‘विदेशी रीच’ के बड़ी संख्या में युवाओं को जोड़ना सामान्य नहीं है। सुरक्षा एजेंसियां अब उन सभी मुख्य इंटरनेट मीडिया हैंडल्स और आइपी एड्रेस को खंगाल रही हैं, जहां से इस ‘टूलकिट’ को आपरेट किया जा रहा था।

संसद मार्ग पर बैरिकेड तोड़ते प्रदर्शनकारी। जागरण
बता दें पिछले महीने केंद्र सरकार के आदेश पर सीजेपी के आधिकारिक एक्स हैंडल को ब्लाक किया गया था, लेकिन महज कुछ ही मिनटों में काकरोच इज बैक नाम से नई आइडी तैयार कर ली गई और इंस्टाग्राम पर इसके तेजी से फालोअर्स बढ़ गए।
सोमवार को इस पेज को फालो करने वालों की संख्या दो करोड़ 30 लाख से अधिक हो चुकी थी। इसी आइडी के जरिये दोबारा नैरेटिव सेट किया जाने लगा।
जांच में सामने आया है कि इस आंदोलन के घोषणापत्र, वेबसाइट और पोस्टर्स को बनाने के लिए चैटजीपीटी और क्लाउड जैसे आधुनिक एआइ टूल्स का संगठित तरीके से इस्तेमाल किया गया, ताकि युवाओं को भड़काया जा सके।

संसद भवन के समीप आंसू गैस के गोले छोड़ने पर तिरंगा लहराते हुए नारे बाजी करते पदर्शनकारी।
सीजेपी के अधिकारिक हैंडल पर सोमवार तक 2.91 लाख फालोअर्स जुड़ चुके थे, जबकि काकरोच इज बैक की आइडी को फालो करने वालों की संख्या तीन लाख को पार कर गई थी।
विदेशी फंडिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट की हो रही जांच
सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके हाल ही में अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर लौटे हैं। सुरक्षा एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि कहीं इस डिजिटल मूवमेंट को विदेशों से फंडिंग या लॉजिस्टिक सपोर्ट तो नहीं मिल रहा है? जैसा कि हाल ही में बांग्लादेश और नेपाल के छात्र आंदोलनों में देखा गया था।
विपक्षी दल व वाम संगठन प्रदर्शन को विरोध के लिए कर रहे इस्तेमाल
इस तथाकथित गैर-राजनीतिक आंदोलन के पीछे विपक्ष के छिपे हुए हाथ होने के आरोप भी लग रहे हैं। नीट पेपर लीक के विरोध व शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर 20 जून से जंतर-मंतर पर शुरू हुए प्रदर्शन को कांग्रेस, आप और सपा जैसी विपक्षी पार्टियों की सहभागिता ने इसे सरकार विरोधी माहौल बनाने के मोहरे के रूप में तब्दील कर दिया।

इसमें वामपंथी छात्र संगठनों स्टूडेंट्स फेडरेशन आफ इंडिया (एसएफआइ), आल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा), आल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआइएसएफ), बिरसा आंबेडकर फुले स्टूडेंट्स एसोसिएशन (बापसा) व क्रांतिकारी युवा संगठन आदि भी पूरी तरह से सक्रिय हैं।
