Parliament Special Session 2026 LIVE: बजट सत्र का विस्तार करते हुए सरकार ने तीन दिन का विशेष सत्र बुलाया है, जो गुरुवार (16 अप्रैल, 2026) को शुरू हो गया। इसमें तीन मुख्य विधेयक संविधान (131वां) संशोधन विधेयक, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किए गए।

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सरकार ने कहा है कि इन विधेयकों का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण के कार्यान्वयन में तेजी लाना है। मंगलवार (14 अप्रैल, 2026) को केंद्र सरकार ने सांसदों के बीच ड्राफ्ट बिल बांटे। ये बिल महिलाओं के लिए आरक्षण कानून ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लागू करने और नए सिरे से परिसीमन करने से जुड़े थे।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)

इन प्रस्तावों के तहत 2029 से लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने की व्यवस्था की जाएगी.

तीनों बिलों का मकसद 2029 तक महिलाओं के लिए आरक्षण कानून को लागू करना और लोकसभा की सदस्य संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करना है. सरकार ने जो तीन बिल पेश किए हैं, उनमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन आयोग के गठन के लिए परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक), 2026 शामिल हैं.

संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026
यह सबसे अहम बिल है क्योंकि इसके तहत कुछ अनुच्छेद में बदलाव करके जनसंख्या की नई परिभाषा और आंकड़ों को स्पष्ट करने के साथ महिला आरक्षण लागू करना शामिल है. सबसे अहम ये है कि बढ़ती आबादी के मद्देनजर संसद में सदस्यों की संख्या को बढ़ाना है. इसके तहत संविधान के अनुच्छेद 81 में बदलाव किया जाना है. लोकसभा में कुल सीटों की अधिकतम संख्या 850 करने का प्रस्ताव रखा गया है, जबकि राज्यों में 815 और केंद्र शासित प्रदेशों में 35 सीटें निर्धारित की जा सकती हैं. सीटों के निर्धारण के लिए परिसीमन की प्रक्रिया भी लागू की जाएगी.

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केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026
दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण तय करना है और सीटों के पुननिर्धारण को लागू करना है.

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परिसीमन विधेयक 2026
सरकार ने कहा है कि 1976 के बाद से लोकसभा सीटों में बदलाव नहीं हुआ है इसलिए परिसीमन समय की मांग है. राज्यों के लिए सीटों की संख्या भी तय नहीं है. सरकार का कहना है कि परिसीमन प्रक्रिया आखिरी बार हुई जनगणना 2011 के आधार पर पूरी की जाएगी. इसके लिए हर राज्य में परिसीमन आयोग बनेगा, जो राज्य के सभी दलों से चर्चा के बाद सीटों का अंतिम निर्धारण करेगा.


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