पितृ पक्ष की शुरुआत हो गयी है और प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध कर्म आज पितरों के लिए उनके वंशज करेंगे. प्रतिपदा तिथि पर उन लोगों का श्राद्ध किया जाता है जिनकी मृत्यु किसी भी माह के कृष्ण या शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर हुई हो.

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मान्यता है कि जो लोग अपने पितरों का तर्पण इस तिथि पर पर करते हैं उनके सभी दुखों का नाश होता है. सुख में वृद्धि होता है. पितृ पक्ष 7 सितंबर 2025 से शुरू होकर 21 सितंबर 2025 तक चलने वाला है. इन 16 दिनों की अवधि में पितरों का विधि पूर्वक श्राद्ध किया जाता है. आइए पितृ पक्ष की प्रतिपदा श्राद्ध का मुहूर्त जान लें.

✍️ अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

प्रतिपदा श्राद्ध मुहूर्त 2025 (Pratipada Shradh Muhurat 2025)
8 सितंबर 2025, दिन सोमवार को प्रतिपदा श्राद्ध आश्विन, कृष्ण प्रतिपदा तिथि पर है.
प्रतिपदा तिथि कब शुरू होगी- सितंबर 07, 2025 को रात 11:38 बजे से.
प्रतिपदा तिथि कब समाप्त होगी- सितंबर 08, 2025 को रात 09:11 बजे.
कुतुप मुहूर्त – सुबह 11:09 से लेकर सुबह 11:59 बजे तक.
रौहिण मुहूर्त – सुबह 11:59 से लेकर दोपहर 12:49 बजे तक.
अपराह्न काल – दोपहर 12:49 से लेकर दोपहर 03:18 बजे तक.
प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ – सितंबर 07, 2025 को रात 11:38 बजे तक.
प्रतिपदा तिथि समाप्त – सितंबर 08, 2025 को रात 09:11 बजे तक.
Shraddha Ritual Timings

घर पर श्राद्ध कैसे करें (Ghar Par Shradh Kaise Kare)

  • पितृ पक्ष में पितरों की आत्मा की शांति के लिए उनके वंशज उनका तर्पण और श्राद्ध करते हैं.
  • पितर की देहांत तिथि के अनुसार सबसे पहले पितृ पक्ष की एक तिथि चुन लें.
  • इसके बाद श्राद्ध की तिथि पर सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण कर लें.
  • अब तर्पण के लिए तिल, जौ, कुशा, गंगाजल से लेकर खीर, पूड़ी, दाल और चावल के साथ ही मिठाई, फल, धूप-दीप आदि सामग्री लेकर बैठें.
  • दोपहर के समय तय मुहूर्त पर दक्षिण दिशा की ओर अपना मुख करें और तर्पण शुरू करें.
  • एक तांबे के पात्र में गंगाजल लें, अब तिल और जौ को उसी जल में मिलाएं.
  • अब जल से भरे लोटे को लेकर पितरों का नाम और गोत्र का नाम लें और तर्पण करें.
  • एक थाली में पितरों के नाम का भोजन परोसकर कर उन्हें भोग अर्पित करें.
  • अगर गाय, कौए और कुत्ते को भोजन कराएं. इसके साथ ही “ॐ पितृभ्य: नम:” मंत्र का मन ही मन जाप करें.
  • अंत में ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोज कराएं और दान की चीजें भी दे दें.


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