रुद्रपुर। ऊधम सिंह नगर जिले में साइबर अपराध से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस और साइबर सेल की जांच में जिले के विभिन्न बैंकों में संचालित 850 से अधिक म्यूल खातों (मनी म्यूल अकाउंट) का पता चला है, जिनमें साइबर ठगी से प्राप्त करीब 60 करोड़ रुपये जमा पाए गए हैं। पुलिस के निर्देश पर संबंधित बैंकों ने इन खातों से धन निकासी पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन खातों का संचालन कौन कर रहा था और साइबर अपराध से अर्जित धन को किस प्रकार इधर-उधर भेजा जा रहा था।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड
जिले के जसपुर, काशीपुर, बाजपुर, गदरपुर, रुद्रपुर, किच्छा, सितारगंज, नानकमत्ता और खटीमा क्षेत्रों के विभिन्न बैंकों में ये खाते सक्रिय पाए गए हैं। साइबर सेल और पुलिस की संयुक्त जांच के दौरान सामने आया कि इन खातों का इस्तेमाल देशभर में होने वाली साइबर ठगी की रकम को छिपाने और ट्रांसफर करने के लिए किया जा रहा था।
क्या होता है म्यूल खाता?
म्यूल खाता ऐसा बैंक खाता होता है जिसका उपयोग साइबर अपराधी ठगी से प्राप्त धन को अपने असली स्रोत से दूर ले जाने और उसे वैध दिखाने के लिए करते हैं। ऐसे खातों को आम भाषा में “मनी म्यूल” या “खच्चर खाता” भी कहा जाता है। अपराधी इन खातों के जरिए ठगी की रकम को कई खातों में घुमाकर जांच एजेंसियों को भ्रमित करने का प्रयास करते हैं।
तीन तरह के होते हैं म्यूल खाते
जांच में सामने आया है कि जिले में सक्रिय म्यूल खातों को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है।
पहली श्रेणी उन खातों की है जिन्हें खाताधारक जानबूझकर अपराधियों को उपलब्ध कराते हैं। ऐसे लोग कमीशन या आर्थिक लाभ के बदले अपना बैंक खाता साइबर गिरोहों को इस्तेमाल करने देते हैं।
दूसरी श्रेणी उन खातों की है जिनका उपयोग खाताधारकों की जानकारी के बिना किया जाता है। नौकरी, लोन, इनाम या निवेश के नाम पर ठगे गए लोग अनजाने में अपने बैंक खाते और दस्तावेजों की जानकारी साझा कर देते हैं, जिसके बाद अपराधी उनका दुरुपयोग करते हैं।
तीसरी श्रेणी किराए पर लिए गए खातों की है। इसमें अपराधी आर्थिक रूप से कमजोर या जरूरतमंद लोगों को कुछ धनराशि देकर उनके बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम को ट्रांसफर करने के लिए करते हैं।
सैकड़ों खातों पर दर्ज हैं शिकायतें
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि 850 सक्रिय म्यूल खातों में से लगभग 750 खातों के खिलाफ एक-एक साइबर शिकायत दर्ज है, जबकि करीब 100 खातों के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों में 10 से अधिक प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं। इससे स्पष्ट होता है कि इन खातों का उपयोग लंबे समय से संगठित तरीके से साइबर अपराधों में किया जा रहा था।
अब तक पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) 26 से अधिक म्यूल खातों के खिलाफ अलग-अलग मामलों में प्राथमिकी दर्ज कर चुकी है। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ यह संख्या और बढ़ सकती है।
60 करोड़ रुपये की रकम हुई फ्रीज
जांच के दौरान सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि इन खातों में साइबर ठगी के माध्यम से प्राप्त 60 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा है। पुलिस ने बैंक अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर इन खातों से धन निकासी पर रोक लगवा दी है, ताकि रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोका जा सके और पीड़ितों को न्याय दिलाया जा सके।
विशेषज्ञों के अनुसार साइबर अपराधी आमतौर पर ठगी की रकम को कुछ घंटों के भीतर कई खातों में ट्रांसफर कर देते हैं, जिससे धन का वास्तविक स्रोत तलाशना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में खातों को समय रहते फ्रीज करना जांच की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
पीड़ितों को मिल सकती है राहत
पुलिस अधिकारियों के अनुसार जिन लोगों की धनराशि साइबर ठगी के माध्यम से इन खातों तक पहुंची है, उन्हें राहत मिलने की संभावना है। जांच पूरी होने के बाद संबंधित राज्यों की पुलिस को विस्तृत रिपोर्ट भेजी जाएगी। इसके आधार पर साइबर ठगी के पीड़ित न्यायालय अथवा साइबर थाना पुलिस की रिपोर्ट के माध्यम से अपनी धनराशि वापस प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर सकेंगे।
एसएसपी ने दी जानकारी
ऊधम सिंह नगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति ने बताया कि जिले के विभिन्न बैंकों में 850 से अधिक सक्रिय म्यूल खातों की पहचान की गई है। इन खातों से निकासी पर रोक लगा दी गई है और विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है। यह रिपोर्ट संबंधित राज्यों की पुलिस को भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे साइबर अपराध के मामलों की जांच को गति मिलेगी और पीड़ितों को उनकी रकम वापस दिलाने में मदद मिल सकेगी।
साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई
विशेषज्ञों का मानना है कि ऊधम सिंह नगर में सामने आया यह मामला साइबर अपराध के बढ़ते नेटवर्क की गंभीरता को दर्शाता है। इंटरनेट और डिजिटल बैंकिंग के विस्तार के साथ साइबर ठग नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में म्यूल खातों पर कार्रवाई न केवल अपराधियों की आर्थिक कमर तोड़ने का काम करेगी, बल्कि भविष्य में होने वाली साइबर ठगी की घटनाओं पर भी अंकुश लगाने में मददगार साबित होगी।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति के कहने पर अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक या ओटीपी साझा न करें। साथ ही नौकरी, निवेश, लोन अथवा इनाम के नाम पर मांगी जाने वाली बैंकिंग जानकारी देने से बचें। सतर्कता और जागरूकता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।
