रुद्रपुर/संवाददाता।रुद्रपुर मंडी समिति क्षेत्र में पिछले 25 से 30 वर्षों से अपना रोजगार कर रहे फड़ कारोबारियों के सामने इन दिनों गंभीर संकट खड़ा हो गया है। कारोबारियों ने आरोप लगाया है कि कुछ लोगों द्वारा उन्हें उनकी वर्षों पुरानी कार्यस्थली से हटाने का दबाव बनाया जा रहा है तथा प्रत्येक कारोबारी से 15-15 लाख रुपये की कथित मांग की गई है। व्यापारियों का कहना है कि पैसे न देने की स्थिति में उन्हें अपनी जगह खाली करने की धमकी दी जा रही है। इस पूरे मामले ने मंडी क्षेत्र में तनाव का माहौल पैदा कर दिया है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बड़ी संख्या में फड़ कारोबारी स्थानीय विधायक शिव अरोड़ा के कार्यालय पहुंचे और उन्हें अपनी समस्याओं से अवगत कराया। व्यापारियों ने विधायक के समक्ष अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि वे दशकों से मंडी समिति में वैध रूप से अपना रोजगार चला रहे हैं और आज उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा कर दिया गया है। व्यापारियों ने आरोप लगाया कि कुछ प्रभावशाली तत्वों द्वारा धन उगाही और दबाव की राजनीति की जा रही है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड
व्यापारियों ने विधायक को बताया कि कथित रूप से प्रत्येक फड़ कारोबारी से 15 लाख रुपये की मांग की जा रही है। मांग पूरी नहीं करने पर उन्हें जगह खाली करने के लिए कहा जा रहा है। इससे छोटे व्यापारियों और उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कई व्यापारियों ने कहा कि उनकी पूरी जीविका इसी व्यवसाय पर निर्भर है और यदि उन्हें हटाया गया तो उनके परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट पैदा हो जाएगा।
व्यापारियों की शिकायत सुनने के बाद विधायक शिव अरोड़ा ने मामले को गंभीरता से लिया और स्पष्ट शब्दों में कहा कि उत्तराखंड में किसी भी प्रकार की भू-माफिया प्रवृत्ति, अवैध वसूली, दबंगई या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार पारदर्शिता और कानून व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्ध है तथा किसी भी व्यक्ति को गरीब और मेहनतकश व्यापारियों का शोषण करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
विधायक ने व्यापारियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि वे स्वयं मामले की निगरानी करेंगे और आवश्यक होने पर संबंधित अधिकारियों से वार्ता कर निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित कराएंगे। उन्होंने कहा कि यदि किसी ने व्यापारियों को अवैध रूप से परेशान करने, धन की मांग करने या रोजगार छीनने का प्रयास किया है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
इस बीच व्यापारियों ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि क्षेत्र में चबूतरे के शौचालय निर्माण कार्य के नाम पर वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। उनका दावा है कि निर्माण कार्य के लिए स्वीकृत धनराशि और वास्तविक खर्च के बीच लगभग 10 लाख रुपये का अंतर दिखाई देता है। व्यापारियों ने इस अंतर की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
व्यापारियों का कहना है कि सार्वजनिक धन से किए गए विकास कार्यों में पूर्ण पारदर्शिता होनी चाहिए। यदि किसी निर्माण कार्य में धनराशि के उपयोग को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो संबंधित विभागों को इसकी जांच कर सच्चाई जनता के सामने लानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह केवल धनराशि का मामला नहीं है बल्कि जनता के विश्वास से भी जुड़ा हुआ विषय है।
शिकायतकर्ताओं के अनुसार जब उन्होंने निर्माण कार्य और व्यय संबंधी जानकारी प्राप्त करने का प्रयास किया तो उन्हें विभिन्न माध्यमों से दबाव में लेने तथा सवाल न उठाने की सलाह दी गई। व्यापारियों का आरोप है कि इस प्रकार की परिस्थितियों ने उनके बीच भय और असुरक्षा का वातावरण पैदा कर दिया है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए ताकि वे बिना किसी दबाव के अपनी बात रख सकें।
व्यापारी प्रतिनिधियों ने यह भी आरोप लगाया कि उत्तराखंड राज्य गठन के बाद क्षेत्र में भू-माफिया गतिविधियों में बढ़ोतरी हुई है। उनका कहना है कि समय-समय पर विभिन्न सार्वजनिक और व्यावसायिक स्थलों पर कब्जे तथा दबाव बनाने जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों पर सख्ती से कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता है ताकि आम लोगों का कानून व्यवस्था पर विश्वास बना रहे।
मंडी समिति के फड़ कारोबारियों ने सामूहिक रूप से हस्ताक्षरित एक प्रार्थना पत्र तैयार कर संबंधित अधिकारियों तथा जनप्रतिनिधियों को सौंपा है। इस पत्र में उन्होंने अपनी समस्याओं का विस्तार से उल्लेख करते हुए निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है। व्यापारियों ने कहा कि वे किसी प्रकार का टकराव नहीं चाहते, बल्कि केवल अपने रोजगार की सुरक्षा और विकास कार्यों में पारदर्शिता चाहते हैं।
विधायक शिव अरोड़ा ने व्यापारियों को भरोसा दिलाया कि मामले को अनदेखा नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि कहीं भी भ्रष्टाचार, अनियमितता या दबंगई के तथ्य सामने आते हैं तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों से भी अपेक्षा जताई कि वे शिकायतों का गंभीरता से संज्ञान लें और तथ्यों की निष्पक्ष जांच कराएं।
व्यापारियों का कहना है कि मंडी समिति क्षेत्र में वर्षों से कार्य कर रहे छोटे कारोबारी क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में उनकी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर सुना जाना चाहिए। उनका मानना है कि यदि प्रशासन और जनप्रतिनिधि मिलकर इस मामले का समाधान निकालते हैं तो न केवल व्यापारियों का विश्वास मजबूत होगा बल्कि क्षेत्र में पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था स्थापित करने में भी मदद मिलेगी।
स्थानीय लोगों का भी मानना है कि मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। यदि वित्तीय अनियमितता, अवैध वसूली या दबाव बनाने जैसी शिकायतों में तथ्य पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, वहीं यदि आरोप निराधार साबित होते हैं तो वास्तविक स्थिति भी सार्वजनिक की जानी चाहिए। इससे अफवाहों पर रोक लगेगी और जनता के बीच विश्वास कायम रहेगा।
फिलहाल व्यापारियों को विधायक शिव अरोड़ा के आश्वासन से कुछ राहत मिली है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई और संभावित जांच पर टिकी हुई हैं। व्यापारियों का कहना है कि वे कानून और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भरोसा रखते हैं तथा उम्मीद करते हैं कि उनकी शिकायतों पर निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई होगी।
