प्रवर्तन निदेशालय (ED) और हरियाणा पुलिस ने एक संयुक्त ऑपरेशन में देश के सबसे बड़े पोंजी स्कैम (Ponzi Scheme) में से एक की मास्टरमाइंड और ‘हीरा ग्रुप ऑफ कंपनीज’ की फाउंडर नौहेरा शेख को गुरुग्राम से गिरफ्तार कर लिया है.

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शरिया कानून के नाम पर देश भर के लाखों मुसलमानों को झांसा देकर 3000 करोड़ रुपये की महाठगी करने वाली नौहेरा पिछले एक महीने से फरार चल रही थी.

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड

हैरानी की बात यह है कि अदालतों और जांच एजेंसियों की आंखों में धूल झोंककर भाग रही नौहेरा गुरुग्राम के सेक्टर-45 में अपनी पहचान बदलकर रह रही थी. उसने जांच से बचने के लिए फर्जी पहचान पत्र का सहारा लिया था, जिसमें उसने अपना नाम ‘शेख खामर जहां’ रख लिया था.

शरिया कानून की आड़ में बुना ठगी का ताना-बाना

शरिया कानून के मुताबिक ब्याज (रिबा) कमाना या देना पूरी तरह हराम माना जाता है. इसी धार्मिक आस्था के चलते कई मुसलमान बैंकों में अपना पैसा जमा करने से बचते हैं. नौहेरा शेख ने इसी बात का फायदा उठाया और बेहद शातिर कूटनीति के तहत एक पोंजी स्कीम तैयार की. नौहेरा ने ‘हीरा ग्रुप’ नाम से कंपनियां बनाईं और खासतौर पर मुस्लिम समुदाय के लोगों को टारगेट किया. उसने लोगों को लालच दिया कि उसकी कंपनी शरिया के नियमों का पूरी तरह पालन करते हुए व्यापार करती है और इसमें निवेश करने वालों को सालाना 36 फीसदी का बंपर मुनाफा मिलेगा. शुरुआत में भरोसा जीतने के लिए कुछ निवेशकों को मोटा मुनाफा दिया भी गया, जिससे जाल और बड़ा होता गया.

1.72 लाख निवेशकों की गाढ़ी कमाई डूबी

ईडी (ED) के मुताबिक, नौहेरा शेख और उसके सहयोगियों ने इस लुभावने ऑफर के जरिए देश भर के मासूम लोगों से 5978 करोड़ रुपये (लगभग 6,000 करोड़) से अधिक की रकम जुटा ली. जब मुनाफे और मूलधन (Principal Amount) को वापस करने की बारी आई, तो कंपनी हाथ खड़े कर गई. इस महाघोटाले में करीब 1.72 लाख से अधिक निवेशकों के 3000 करोड़ रुपये डूब गए. सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत खारिज किए जाने और आत्मसमर्पण करने के आदेश के बाद नौहेरा एक महीने से फरार थी. इस दौरान उसने अदालतों को यह कहकर गुमराह करने की भी कोशिश की कि उसने हैदराबाद पुलिस के सामने सरेंडर किया था, लेकिन पुलिस ने उसे हिरासत में लेने से मना कर दिया.

छापेमारी में मिलीं 12 लग्जरी गाड़ियां

ईडी की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, नौहेरा की आलीशान जिंदगी के राज खुलते गए. साल 2024 में जब जांच एजेंसी ने नौहेरा के ठिकानों पर छापेमारी की थी, तब वहां से बीएमडब्ल्यू (BMW) और मर्सिडीज बेंज जैसी 12 लग्जरी कारें और 92 लाख रुपये कैश बरामद हुए थे. इतना ही नहीं, इस गिरोह के हौसले इतने बुलंद थे कि नौहेरा के एक सहयोगी ने अपना नाम ‘कल्याण बनर्जी’ बताते हुए खुद को सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का बड़ा अधिकारी घोषित कर दिया था, ताकि जांच को रोका जा सके. पुलिस ने उस फर्जी अधिकारी को इसी साल जनवरी में गिरफ्तार किया था.

400 करोड़ की संपत्ति जब्त

सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद ईडी ने अब तक नौहेरा शेख और उसके रिश्तेदारों की 400 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त कर ली हैं. अदालत ने इन संपत्तियों की नीलामी करके पीड़ितों को उनकी डूबी हुई रकम वापस लौटाने की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है. हालांकि, आरोपी और उसके वकीलों ने कई फर्जी हलफनामे (Affidavits) दायर कर इस नीलामी को लटकाने की पूरी कोशिश की, लेकिन गुरुग्राम से हुई इस ताजा गिरफ्तारी के बाद अब ‘लेडी नटवरलाल’ के साम्राज्य का पूरी तरह अंत हो गया है.


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