अमेरिका और ईरान के बढ़ते तनाव के बीच 28 अप्रैल से अधर में लटकी बातचीत एक बार फिर से मझधार में फंस गई है. अमेरिका ने तेहरान के बातचीत के प्रस्ताव पर किसी तरह की छूट नहीं दी है.

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ईरान की न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक अमेरिका, कुछ ठोस रियायत दिए बिना, ऐसी शर्तें तेहरान पर थोपना चाहता है जो न तो जायज हैं और ना ही किसी स्थिति में स्वीकार्य हैं. इस वजह से वार्ता में पैदा हुआ गतिरोध टूट नहीं पा रहा है. इस बीच इजरायल ने लेबनान में हिजबुल्ला की पिटाई एक बार फिर से तेज कर दी है. उधर अमेरिका ने कौन सी पांच शर्ते बातचीत आगे बढ़ाने के लिए रखी हैं, आइए आपको बताते हैं.

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड

अमेरिका की पांच मांगे

फार्स न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक अमेरिका ने जो 5 शर्तों की सूची भेजी है.

  1. तेहरान केवल एक ही परमाणु साइट चलाएगा, बाकी बंद करेगा.
  2. ईरान अपने हाई एनरिच्ड यूरेनियम की भंडार अमेरिका को देगा.
  3. अमेरिका ईरान की विदेशों में फ्रीज की गई संपत्तियों का 25% हिस्सा भी नहीं छोड़ेगा.
  4. युद्ध के दौरान ईरान को हुए नुकसान के लिए चार आने का मुआवजा नहीं दिया जाएगा.
  5. बातचीत की शुरुआत में ही सभी मोर्चों पर दुश्मनी बंद होनी चाहिए.

ईरान ने क्या प्रस्ताव भेजा था?

इससे पहले ईरान ने बातचीत आगे बढ़ाने के प्रस्ताव में सभी मोर्चों पर जंग खत्म करने की बात कही थी.
लेबनान में इजरायल के सैन्य अभियान रोके जाएं.
13 अप्रैल से बढ़ी अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाई जाए.
सारे अमेरिकी प्रतिबंध हटाए जाएं और विदेशों में फ्रीज संपत्तियां फौरन छोड़ने की मांग की थी.

लेबनान की मिडिल ईस्ट के फसाद में एंट्री तब हुई, जब ईरान द्वारा पाल पोसकर बढ़ाया गया आतंकी संगठन हिजबुल्ला ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनी की हत्या के बाद युद्ध में कूद गया था.

फार्स न्यूज़ के मुताबिक ईरान ने अपने प्रस्ताव में यह भी लिखवाया था कि तेहरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण बनाए रखेगा, जो एक मार्च से बंद है. आपको बताते चलें कि दुनिया की करीब 20 फीसदी तेल और गैस की सप्लाई होर्मुज से होती है.

इस पोस्ट ने नए युद्ध की संभावनाओं को और बढ़ा दिया है।

रिपोर्टों के अनुसार, व्हाइट हाउस ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्पों की समीक्षा कर रहा है। अमेरिकी प्रशासन “Operation Epic Fury” नामक संभावित सैन्य अभियान को फिर से शुरू करने पर विचार कर रहा है, जिसे पिछले महीने अस्थायी युद्धविराम के बाद रोक दिया गया था। सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी रक्षा विभाग ने ईरान के सैन्य ठिकानों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर बड़े हवाई हमलों की योजना बना ली है। इसके साथ ही, अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज को ईरान के इस्फहान परमाणु केंद्र में गुप्त ऑपरेशन के लिए भी तैयार रखा गया है। हालांकि, अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि ऐसे ऑपरेशनों में भारी जोखिम और जानमाल का नुकसान हो सकता है।

ट्रंप ने चीन दौरे से लौटते समय एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत में ईरान के प्रस्तावों को खारिज करते हुए कहा, “अगर मुझे पहली लाइन ही पसंद नहीं आती, तो मैं पूरा प्रस्ताव फेंक देता हूं।” इस बयान को अमेरिका के सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, ईरान ने भी खुली चेतावनी दी है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि यदि कोई आक्रामक कार्रवाई होती है, तो ईरान की सेना “करारा जवाब” देने के लिए पूरी तरह तैयार है। तनाव का मुख्य केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य बना हुआ है।

यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा प्रदान करता है। किसी भी सैन्य टकराव का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ेगा। इस बीच, चीन और रूस ने अमेरिका और ईरान दोनों से संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की है। दोनों देशों ने कहा है कि खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष बढ़ने से वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं, तो पश्चिम एशिया में एक नया बड़ा संघर्ष शुरू हो सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।

ईरान का जवाब

उधर ईरानी सशस्त्र बलों के प्रवक्ता अबोलफजल शेकर्ची ने ट्रंप को चेतावनी देते हुए कहा है कि ईरान पर दोबारा हमले हुए तो दुश्मनों को भीषण नतीजे भुगतने होंगे. हम अपने आस-पास मौजूद सभी अमेरिकी संसाधनों को बर्बाद करने में देर नहीं लगाएंगे. ईरानी नेता हामिदरेजा हाजिबाबाई ने कहा, ‘ईरान के तेल के कुओं पर निशाना बनाने पर ईरान ऐसे कदम उठाएगा जिससे अमेरिका और बाकी दुनिया को इस इलाके से तेल हासिल करने में सालों का वक्त लग जाएगा.


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