उत्तराखंड के कपकोट के उच्च हिमालयी गांव सुमटी-बैसानी की पहाड़ियों पर दौड़ती वह छोटी-सी बच्ची आज भारतीय महिला क्रिकेट की नई पहचान बन चुकी है।

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कभी अपने भाइयों के साथ खेतों तथा घर के आंगन में क्रिकेट खेलने वाली प्रेमा रावत ने अपने सपनों को हकीकत में बदलकर न केवल बागेश्वर बल्कि पूरे उत्तराखंड का मान बढ़ाया है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड।

पड़ोसियों की भी सुनीं डांट

जब गांव की अधिकांश लड़कियां पारंपरिक गतिविधियों तक सीमित रहती थीं, तब प्रेमा के हाथों में बल्ला तथा गेंद हुआ करती थी। भाइयों के साथ खेलते-खेलते उन्होंने क्रिकेट के गुर सीखे। कई बार गेंद खेतों में चली जाती, कभी पड़ोसियों की डांट सुननी पड़ती, लेकिन खेल के प्रति उनका जुनून कभी कम नहीं हुआ।

प्रेमा की क्रिकेट यात्रा किसी बड़े शहर या आलीशान अकादमी से शुरू नहीं हुई। पहाड़ के सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने अपने सपनों को आकार दिया। परिवार ने भी उनकी रुचि को समझा और हर कदम पर साथ दिया। यही समर्थन आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।

उत्तराखंड टीम में चयन बना पहला बड़ा मुकाम

बचपन का शौक धीरे-धीरे जुनून में बदल गया। मेहनत तथा प्रतिभा के दम पर वर्ष 2021 में उनका चयन उत्तराखंड महिला क्रिकेट टीम में हुआ। यह उपलब्धि इसलिए भी खास थी क्योंकि वह बागेश्वर जिले की पहली महिला क्रिकेटरों में शामिल रहीं जिन्होंने राज्य स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई।

राज्य टीम में जगह बनाने के बाद प्रेमा ने घरेलू क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन किया। उनकी लेग स्पिन गेंदबाजी ने बल्लेबाजों को खूब परेशान किया। सीनियर महिला टी-20 प्रतियोगिताओं में उन्होंने अपनी उपयोगिता साबित की और उत्तराखंड की ओर से कई महत्वपूर्ण मुकाबले खेले।

घरेलू क्रिकेट से राष्ट्रीय पहचान तक

प्रेमा का प्रदर्शन लगातार बेहतर होता गया। राष्ट्रीय स्तर की विभिन्न प्रतियोगिताओं में उन्होंने अपनी गेंदबाजी से चयनकर्ताओं का ध्यान आकर्षित किया।

सीनियर विमेंस टी-20 टूर्नामेंट में शानदार विकेट लेने के साथ उन्होंने कई मैचों में टीम को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। उत्तराखंड प्रीमियर लीग में भी उन्होंने बेहतरीन खेल दिखाया। बड़े खिलाड़ियों के बीच अपनी अलग पहचान बनाकर उन्होंने साबित कर दिया कि प्रतिभा अवसरों की मोहताज नहीं होती।

डब्लूपीएल और इंडिया-ए तक का सफर

प्रेमा के करियर में बड़ा मोड़ तब आया जब महिला प्रीमियर लीग (डब्ल्यूपीएल) में उन्हें मौका मिला। देश और दुनिया के दिग्गज खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करना उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा था।

इसके बाद इंडिया-ए टीम में चयन ने उनके करियर को नई ऊंचाई दी। यहां उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के खिलाफ खेलते हुए अपनी क्षमता का परिचय दिया। हर मैच के साथ उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया और भारतीय टीम के दरवाजे उनके लिए खुलते चले गए।

गांव के बच्चों को दिए इस वर्ष टिप्स

क्रिकेटर प्रेमा रावत इस वर्ष अपने पैतृक गांव सुमटी में एक निजी कार्यक्रम के तहत आईं। हाईस्कूल बैसानी में छात्र-छात्राओं ने उनका भव्य स्वागत किया। प्रेमा का परिवार बरेली में निवास करता है। उनके पिता केदार सिंह रावत एयर फोर्स में कार्यरत हैं, जबकि माता बसंती देवी गृहिणी हैं।

प्रेमा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव से प्राप्त की थी, जिसके बाद उनका परिवार बरेली चला गया। उन्होंने अपने भाइयों हेमंत सिंह रावत और विमल रावत के साथ क्रिकेट खेलना सीखा।

खेल के प्रति उनके जुनून को देखते हुए परिवार ने उन्हें क्रिकेट खेलने के लिए प्रोत्साहित किया। बचपन से ही क्रिकेट का शौक रखने वाली प्रेमा ने बरेली क्रिकेट एकेडमी ज्वाइन की और उनका पंजीकरण क्रिकेट एसोसिएशन आफ बागेश्वर में था।

रुद्रपुर स्टेडियम की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, खिलाड़ियों ने जांच की मांग की

रुद्रपुर। ऊधमसिंह नगर स्थित रुद्रपुर स्टेडियम की व्यवस्थाओं को लेकर कुछ परशुराम चौक पर अवैध कट, बढ़ते हादसे और राजनीति: क्या सुरक्षा से बड़ा कोई मुद्दा है?परशुराम जी की मूर्ति पर भी उठ रहे सवाल ? मरने से अच्छा है थोड़ा घूमकर चला जाए”
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड।
https://hindustanglobaltimes.com/nainital/illegal-cuts-at-parashuram-chowk-increasing-accidents-and-politics-is-there-any-bigger-issue-than-security-questions-are-being-raised-on-the-statue-of-parashuram-ji-it-is-better-than-dying/म में प्रतिभा और प्रदर्शन के बजाय सिफारिश तथा पक्षपात को प्राथमिकता दिए जाने की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि चयन और परीक्षण प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी दिखाई देती है। आरोप है कि कई बार प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को पर्याप्त अवसर नहीं मिलते, जबकि कुछ चुनिंदा खिलाड़ियों को प्राथमिकता दी जाती है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

कुछ लोगों ने यह भी दावा किया है कि खेल गतिविधियों और खिलाड़ियों की सुविधाओं पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जाता। खिलाड़ियों का कहना है कि चयन प्रक्रिया, प्रशिक्षण व्यवस्था और संसाधनों के उपयोग की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

स्थानीय खेल प्रेमियों का मानना है कि यदि आरोप निराधार हैं तो जांच से स्टेडियम प्रशासन की छवि मजबूत होगी, और यदि अनियमितताएं हैं तो उन्हें दूर करने का अवसर मिलेगा। खिलाड़ियों ने खेल विभाग और संबंधित अधिकारियों से पारदर्शी जांच कराकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।


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