राज्य आन्दोलनकारियों ने मुख्यमंत्री से की आयु सीमा में छूट बहाल करने की मांग

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राज्य आन्दोलनकारियों ने उठाई आयु सीमा में छूट बहाली की मांग, मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन?क्षैतिज आरक्षण के साथ आयु-छूट भी मिले: राज्य आन्दोलनकारियों की सरकार से मांग

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड।



आयु सीमा में छूट नहीं मिलने से वंचित हो रहे आन्दोलनकारी, सीएम से हस्तक्षेप की अपील
उत्तराखण्ड आन्दोलनकारियों के आश्रितों को भी मिले आयु-छूट का लाभ, उठी मांग
राज्य आन्दोलनकारियों ने कहा—आयु छूट के बिना आरक्षण का लाभ अधूरा
सरकारी भर्तियों में आयु सीमा छूट बहाल करने की मांग तेज, आन्दोलनकारियों ने सौंपा ज्ञापन
आन्दोलनकारियों का सरकार से सवाल: जब आरक्षण है तो आयु-छूट क्यों नहीं?
राज्य निर्माण आन्दोलनकारियों के सम्मान और न्याय के लिए आयु सीमा में छूट बहाल करने की मांग
भर्ती प्रक्रियाओं से वंचित आन्दोलनकारियों ने मुख्यमंत्री से लगाई गुहार
उत्तराखण्ड आन्दोलनकारियों और आश्रितों को पूर्ववत् आयु-छूट देने की मांग

मंत्री से सरकारी नौकरियों में पूर्ववत् आयु सीमा में छूट का लाभ पुनः लागू करने की मांग की है। इस संबंध में आन्दोलनकारियों द्वारा मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन प्रेषित कर कहा गया है कि वर्तमान में उन्हें क्षैतिज आरक्षण का लाभ तो दिया जा रहा है, लेकिन आयु सीमा में छूट न मिलने के कारण बड़ी संख्या में पात्र आन्दोलनकारी और उनके आश्रित विभिन्न भर्ती प्रक्रियाओं से वंचित हो रहे हैं।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि शासनादेश संख्या 1270/XXX-2/2004 दिनांक 11 अगस्त 2004 के तहत राज्य आन्दोलनकारियों को नियुक्तियों में आयु सीमा में छूट का प्रावधान किया गया था। इसका उद्देश्य राज्य निर्माण आन्दोलन में सक्रिय भागीदारी के कारण रोजगार और शैक्षिक अवसरों से वंचित हुए आन्दोलनकारियों को सरकारी सेवाओं में वास्तविक अवसर उपलब्ध कराना था। इसके बाद जारी विभिन्न शासनादेशों में भी आन्दोलनकारियों के हितों की रक्षा और उन्हें विशेष अवसर प्रदान करने की भावना व्यक्त की गई थी।
आन्दोलनकारियों का कहना है कि उच्च न्यायालय में विचारित मामलों में भी यह तथ्य दर्ज है कि वर्ष 2004 के शासनादेश में आयु सीमा में छूट का प्रावधान मौजूद था। ऐसे में वर्तमान भर्ती विज्ञापनों में केवल आरक्षण का लाभ देकर आयु छूट न देना राज्य सरकार की मूल मंशा के विपरीत है।
ज्ञापन में कहा गया है कि अनेक चिन्हित राज्य आन्दोलनकारी एवं उनके आश्रित आयु सीमा पार हो जाने के कारण पिछले वर्षों में आयोजित विभिन्न सरकारी भर्तियों में आवेदन तक नहीं कर पाए। इससे वे स्वयं को उपेक्षित और न्याय से वंचित महसूस कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री से की गई प्रमुख मांगों में राज्य आन्दोलनकारियों के लिए पूर्व में उपलब्ध आयु सीमा छूट की समीक्षा कर उसे पुनः प्रभावी बनाना, सभी सरकारी सेवाओं में पात्र आन्दोलनकारियों एवं उनके आश्रितों को आयु सीमा में उचित छूट प्रदान करने हेतु स्पष्ट शासनादेश जारी करना तथा सभी भर्ती आयोगों और चयन संस्थाओं को भर्ती विज्ञापनों में आयु छूट का स्पष्ट उल्लेख करने के निर्देश देना शामिल है।
इसके अतिरिक्त, आन्दोलनकारियों ने आयु सीमा में छूट के अभाव में पूर्व में भर्ती प्रक्रियाओं से वंचित हुए अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा के लिए विशेष व्यवस्था करने तथा राज्य आन्दोलनकारियों को प्रदत्त क्षैतिज आरक्षण को प्रभावी बनाने हेतु आवश्यक विधिक और प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित करने की भी मांग की है।
आन्दोलनकारियों ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य निर्माण आन्दोलन में योगदान देने वाले लोगों के सम्मान, सामाजिक न्याय तथा वैध अपेक्षा के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार से इस विषय पर संवेदनशील और सकारात्मक निर्णय की अपेक्षा है।


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