उत्तराखंड का निर्माण केवल एक नए राज्य के गठन का विषय भर नहीं था, यह उन लाखों राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष, बलिदान और उस संकल्प का परिणाम था जिसमें अपनी संस्कृति, संसाधनों, पहचान और जनहित आधारित प्रशासन की परिकल्पना निहित थी। इसी भावना के अनुरूप यह माना जाता है कि राज्यों की मजबूती से ही राष्ट्र मजबूत बनता है। जब प्रत्येक राज्य अपनी जनसंख्या, संसाधनों और प्रशासनिक व्यवस्था को पारदर्शी एवं व्यवस्थित रखता है, तभी भारत जैसे विशाल लोकतंत्र की नींव और अधिक सुदृढ़ होती है।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
इसी दृष्टि से उत्तराखंड में चल रहा विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरुषोत्तम के अनुसार प्रदेश में विसंगति एवं अनमैप्ड मतदाताओं से संबंधित नोटिसों की सुनवाई निरंतर जारी है। अब तक 24.30 लाख नोटिसों के सापेक्ष 20.27 लाख मतदाताओं तक नोटिस पहुंचाए जा चुके हैं। यह आंकड़ा प्रशासन की सक्रियता और व्यापक स्तर पर किए जा रहे प्रयासों को दर्शाता है।
देहरादून सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया गया कि 14 जुलाई से 5 अगस्त के बीच फार्म-6 के 57 हजार, फार्म-7 के 22,668 तथा फार्म-8 के 26,145 आवेदन प्राप्त हुए हैं। निर्वाचन विभाग राजनीतिक दलों से लगातार संवाद स्थापित कर रहा है तथा विधानसभा, जिला और राज्य स्तर पर नियमित समीक्षा बैठकों के माध्यम से पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जा रही है। 65 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग मतदाताओं के घर पहुंचकर सुनवाई कराने की व्यवस्था इस अभियान को संवेदनशील और नागरिक हितैषी भी बनाती है।
लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति निष्पक्ष और विश्वसनीय मतदाता सूची होती है। यदि मतदाता सूची पूरी तरह प्रमाणिक होगी तो चुनाव प्रक्रिया पर जनता का विश्वास और अधिक मजबूत होगा। एसआईआर अभियान का मूल उद्देश्य भी यही है कि प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में सुरक्षित रहे तथा किसी प्रकार की विसंगति का समय रहते समाधान किया जा सके।
समर्थकों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने सुशासन, पारदर्शिता, डिजिटल प्रशासन और जवाबदेही को प्राथमिकता दी है। मतदाता सूची का शुद्धिकरण भी उसी व्यापक सोच का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें प्रत्येक सरकारी व्यवस्था को अधिक सटीक, आधुनिक और विश्वसनीय बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इस प्रकार की पहल लोकतांत्रिक संस्थाओं को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
उत्तराखंड सीमांत राज्य होने के कारण राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में मतदाता सूची का अद्यतन और सत्यापन प्रशासनिक दृष्टि से भी उपयोगी माना जाता है। समर्थकों का मत है कि इससे रिकॉर्ड अधिक व्यवस्थित होंगे, पात्र मतदाताओं के अधिकार सुरक्षित रहेंगे तथा भविष्य की निर्वाचन प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी बन सकेगी।
प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि निर्वाचन विभाग द्वारा जारी नोटिस का समय पर उत्तर दे, आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए तथा अपने मतदाता विवरण को अद्यतन रखने में सहयोग करे। मतदान केवल अधिकार ही नहीं, लोकतंत्र के प्रति जिम्मेदारी भी है। जब नागरिक स्वयं आगे आकर सत्यापन प्रक्रिया में सहयोग करते हैं तो शासन व्यवस्था और अधिक प्रभावी बनती है।
एसआईआर अभियान से कई संभावित लाभ भी जुड़े हुए हैं। मतदाता सूची अधिक सटीक होगी, पात्र मतदाताओं के अधिकार सुरक्षित रहेंगे, प्रशासनिक रिकॉर्ड बेहतर होंगे, चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा लोकतंत्र के प्रति जनता का विश्वास और मजबूत होगा। यह अभियान भविष्य में निर्वाचन संबंधी विवादों को कम करने और चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को और सुदृढ़ करने में भी सहायक माना जा सकता है।
इस दौरान समाज के प्रत्येक वर्ग से अपेक्षा की जाती है कि वह अपुष्ट सूचनाओं, अफवाहों और भ्रामक प्रचार से दूर रहे। किसी भी अभियान के संबंध में सही जानकारी के लिए केवल निर्वाचन विभाग और अधिकृत सरकारी स्रोतों पर ही भरोसा किया जाना चाहिए। तथ्य आधारित संवाद लोकतंत्र की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
उत्तराखंड राज्य आंदोलन का मूल उद्देश्य केवल अलग राज्य बनाना भर नहीं था, बल्कि ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित करना भी था जिसमें स्थानीय हितों, पारदर्शिता, जनभागीदारी और सुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता मिले। यदि राज्य की व्यवस्थाएं मजबूत होंगी तो राज्य आंदोलन के सपनों को भी नई दिशा मिलेगी और उत्तराखंड विकास के नए आयाम स्थापित करेगा।
“पहले राज्य, फिर राष्ट्र” का भाव किसी विभाजन का प्रतीक नहीं, बल्कि इस विचार का विस्तार है कि मजबूत राज्य ही मजबूत भारत की आधारशिला बनते हैं। उत्तराखंड यदि प्रशासनिक रूप से सशक्त, पारदर्शी और व्यवस्थित होगा तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे राष्ट्र पर दिखाई देगा। इसी सोच के साथ एसआईआर जैसे अभियान लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक विश्वसनीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में देखे जा रहे हैं।
