द्वाराहाट में खेत बचाओ-हर्बल मिशन को मिलेगा नया आयाम, किसानों को जैविक एवं औषधीय खेती से आत्मनिर्भर बनाने की पहल

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पूरन चंद्र भट्ट की पहल से द्वाराहाट में ‘खेत बचाओ-हर्बल मिशन’ को गति, किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी

अल्मोड़ा/द्वाराहाट। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि भूमि को उपयोगी बनाने, किसानों की आय बढ़ाने और औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती को बढ़ावा देने की दिशा में द्वाराहाट विकासखंड में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू हुई है। खेत बचाओ योजना तथा गैर काष्ठ वनोपज/हर्बल मिशन को गांव-गांव तक पहुंचाने के उद्देश्य से प्रगतिशील कृषक सहकारी समिति लिमिटेड, द्वाराहाट का गठन किया गया है। समिति को सहकारिता विभाग द्वारा विधिवत पंजीकृत कर निबंधन संख्या 3040 प्रदान की गई है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड


समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व शिवसेना कुमाऊं मंडल प्रमुख पूरन चंद्र भट्ट के नेतृत्व में किसानों को एक मंच पर लाकर जैविक खेती, औषधीय पौधों की खेती और हर्बल उत्पादों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की योजना तैयार की गई है। समिति का कार्यालय दामोदर निवास, ग्राम धनखलगांव, ग्राम सभा विजयपुर, पोस्ट द्वाराहाट में है।
सहकारिता विभाग से मिला विधिवत पंजीकरण
उत्तराखंड सहकारी समिति अधिनियम, 2003 की धारा 8 के तहत समिति का पंजीकरण 28 जुलाई 2026 को किया गया। उप निबंधक सहकारी समितियां, उत्तराखंड कुमाऊं मंडल अल्मोड़ा की ओर से जारी प्रमाण-पत्र में समिति को जनपद अल्मोड़ा की निबंधन संख्या 3040 के रूप में पंजीकृत किए जाने की पुष्टि की गई है।
पंजीकरण प्रमाण-पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि समिति द्वारा क्रेडिट एवं बचत संबंधी कार्य नहीं किया जाएगा। समिति को कार्यशील बनाने तथा उसका डेटाबेस एनसीडी पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश भी संबंधित विभाग को दिए गए हैं।
किसानों को विभागीय योजनाओं की जानकारी देने की तैयारी
समिति का मुख्य उद्देश्य द्वाराहाट विकासखंड की निजी, बंजर, ग्राम सभा तथा वन पंचायत भूमि पर जैविक एवं औषधीय/हर्बल खेती को प्रोत्साहित करना है। इसके लिए किसानों को सरकारी योजनाओं, अनुदानों, तकनीकी जानकारी, उत्पादन पद्धति और बाजार की संभावनाओं से जोड़ने की योजना बनाई गई है।
इसी उद्देश्य से समिति ने उपजिलाधिकारी द्वाराहाट को पत्र भेजकर संयुक्त बैठक आयोजित कराने का अनुरोध किया था। उपजिलाधिकारी द्वाराहाट की ओर से 13 जुलाई 2026 को संबंधित विभागों के अधिकारियों को पत्र भेजकर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
प्रस्तावित संयुक्त बैठक में कृषि, उद्यान, पशुपालन, वन विभाग और भेषज संघ से जुड़े अधिकारियों को शामिल किए जाने की योजना है। इसके साथ ही न्याय पंचायत क्षेत्र के ग्राम प्रधानों, सरपंचों और वन पंचायत अध्यक्षों को भी बैठक में आमंत्रित करने का प्रस्ताव रखा गया है।
विजयपुर न्याय पंचायत को बनाया गया केंद्र
समिति ने विजयपुर न्याय पंचायत क्षेत्र से इस अभियान को धरातल पर उतारने की पहल की है। समिति की ओर से विकासखंड अधिकारी द्वाराहाट को भेजे गए पत्र में सितंबर 2026 में संयुक्त बैठक आयोजित करने का अनुरोध किया गया है। समिति ने बैठक के लिए कत्यूर देवता मंदिर परिसर, धनखलगांव, ग्राम सभा विजयपुर का सुझाव दिया है।
समिति के अनुसार परिसर में तीन शेड उपलब्ध हैं, जिससे बैठक के लिए अतिरिक्त टेंट आदि की आवश्यकता नहीं होगी। यह स्थान न्याय पंचायत क्षेत्र के किसानों के लिए सुविधाजनक होने का भी उल्लेख किया गया है।
किसानों के लिए आय के नए अवसर
हर्बल खेती को पर्वतीय क्षेत्रों में किसानों के लिए आय के वैकल्पिक स्रोत के रूप में देखा जा रहा है। समिति का प्रयास है कि किसानों को ऐसी फसलों और औषधीय पौधों की जानकारी दी जाए, जिनकी बाजार में मांग है और जिन्हें स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार उगाया जा सकता है।
समिति का प्रस्ताव है कि किसान, वन पंचायत और सहकारी समिति मिलकर क्लस्टर आधारित खेती की दिशा में आगे बढ़ें। इससे छोटे और सीमांत किसानों को सामूहिक रूप से उत्पादन, तकनीकी प्रशिक्षण, प्रसंस्करण तथा बाजार से जोड़ने में सहायता मिल सकती है।
सरकारी विभागों और किसानों के बीच बनेगा समन्वय
प्रस्तावित बैठक का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य किसानों और सरकारी विभागों के बीच सीधा संवाद स्थापित करना है। समिति ने संबंधित अधिकारियों से ग्राम प्रधानों, वन पंचायत प्रतिनिधियों तथा ग्राम स्तर पर उपलब्ध भूमि संबंधी आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया है।
समिति का मानना है कि यदि कृषि, उद्यान, वन, पशुपालन और भेषज क्षेत्र की योजनाओं को एकीकृत रूप से किसानों तक पहुंचाया जाए तो पर्वतीय क्षेत्रों में कृषि को नई दिशा दी जा सकती है। इससे बंजर भूमि के उपयोग, पलायन को रोकने और ग्रामीण युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में भी मदद मिल सकती है।
शिवसेना की पहल से जुड़ा अभियान
समिति के अध्यक्ष पूरन चंद्र भट्ट का कहना है कि किसानों के हित में शुरू किए गए इस अभियान को राजनीतिक गतिविधि तक सीमित रखने के बजाय गांवों के स्तर पर व्यावहारिक रूप देने का प्रयास किया जा रहा है। उनका लक्ष्य है कि किसानों को सरकारी योजनाओं की जानकारी के साथ उत्पादन से लेकर बाजार तक की पूरी व्यवस्था से जोड़ा जाए।
उन्होंने कहा कि “किसान का हित ही प्राथमिकता है और खेतों को बचाकर ही पहाड़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।”
द्वाराहाट में शुरू की गई यह पहल अब आगामी संयुक्त बैठक पर केंद्रित है। यदि संबंधित विभागों, ग्राम पंचायतों, वन पंचायतों और किसानों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित होता है, तो विजयपुर न्याय पंचायत क्षेत्र से शुरू होने वाला यह मॉडल भविष्य में द्वाराहाट के अन्य गांवों तक भी विस्तार पा सकता है।
समिति ने किसानों से इस पहल से जुड़ने और प्रस्तावित बैठक में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने का आह्वान किया है। उद्देश्य साफ है—खेतों को उपयोगी बनाना, किसानों की आय बढ़ाना और पहाड़ में खेती को रोजगार एवं आत्मनिर्भरता का आधार बनाना।


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