रुद्रपुर। उत्तराखंड में सियासी पारा अचानक उबल पड़ा है। दिसंबर 2026 से मार्च 2027 के बीच होने वाले विधानसभा चुनावों की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है, और इसका सबसे बड़ा अखाड़ा बना है रुद्रपुर। रुद्रपुर की हालिया तनावपूर्ण घटना (जिसमें प्रशासनिक चूक साफ दिखी) अब आम जनता के जख्मों पर मरहम लगाने के बजाय नेताओं के लिए ‘सहानुभूति बटोरने’ का जरिया बन चुकी है। यह घटना उत्तराखंड के मतदाताओं के लिए एक बड़ा आईना है कि कैसे उनके असल मुद्दे पल भर में गायब कर दिए जाते हैं।
रुद्रपुर की इस घटना के बाद से ही ‘मिशन 2027’ की आक्रामक शुरुआत हो चुकी है। शहर की सड़कों पर पुतले फूंके जा रहे हैं, धरने प्रदर्शनों का दौर जारी है, और कांग्रेस-भाजपा के दिग्गजों में आरोप-प्रत्यारोप की होड़ मची है। मीडिया को अपनी टीआरपी मिल रही है और नेताओं को पाला बदलने और सुर्खियां बटोरने का नया मसाला। लेकिन इस पूरे ड्रामे के बीच, जनता से जुड़े ‘जन सरोकार’ के असली मुद्दे पूरी तरह हाशिए पर चले गए हैं।
अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड
चुनावी मौसम आते ही विकास के बड़े-बड़े वादे हवा होने लगे हैं। जिन गरीबों और छोटे रोजगार करने वालों के सिर पर बुलडोजर का खौफ मंडरा रहा था, उनके लिए मार्च 2027 तक ‘चुनावी राहत’ का लॉलीपॉप थमा दिया गया है। आनन-फानन में नए प्रोजेक्ट्स के शिलान्यास और कार्य पत्थरों (शिलापटों) की बाढ़ आने वाली है, जिनकी धरातल पर उतरने की कोई गारंटी नहीं है। राजनीतिक दल अब सिर्फ यह हिसाब लगाने में व्यस्त हैं कि सूबे का वोटर किस पाले में जाएगा और कहां उनकी ‘आओ-भगत’ बेहतर होगी।
सबसे बड़ा दर्द उत्तराखंड के उस आम मतदाता का है, जिसकी नियति सिर्फ ‘लाइन’ में खड़ा होना बनकर रह गई है। कभी वोटर लिस्ट में नाम ढूंढने की लाइन, कभी थानों में एफआईआर की लाइन, कभी आधार अपडेट, तो कभी बैंक और पेंशन की कतारें। अब वही वोटर एक बार फिर अपनी किस्मत का फैसला करने के लिए चुनाव की लाइन में खड़े होने को मजबूर है, जबकि प्रशासनिक जिम्मेदारियां और जनता की मूल जरूरतें नेताओं की इस नूराकुश्ती में कहीं गुम हो चुकी हैं।
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रुद्रपुर में लाठीचार्ज और पुतला दहन: एसएसपी दफ्तर पर भिड़े कांग्रेसी, भाजपा का पलटवार, छावनी बना शहर
रुद्रपुर। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 की आहट के बीच रुद्रपुर में सियासी संग्राम चरम पर पहुंच गया है। आज रुद्रपुर उस समय युद्ध का मैदान बन गया जब एसएसपी कार्यालय का घेराव करने जा रहे कांग्रेसी कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने तीखा लाठीचार्ज कर दिया। जिला प्रशासन द्वारा लगाई गई मजबूत बैरिकेडिंग को तोड़ने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा, जिसके बाद कांग्रेसी वहीं धरने पर बैठ गए। दूसरी तरफ, भाजपा विधायक शिव अरोड़ा के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस का पुतला दहन कर इस घेराव को राजनीतिक नौटंकी करार दिया।
बैरिकेडिंग पर टकराव और पुलिसिया एक्शन
रुद्रपुर की हालिया घटना को लेकर कांग्रेस ने आज एसएसपी कार्यालय के घेराव का ऐलान किया था। भारी संख्या में कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए आगे बढ़े, लेकिन जिला प्रशासन ने भारी पुलिस बल के साथ पहले ही बैरिकेडिंग कर रास्ता रोक दिया था। जैसे ही कांग्रेसियों ने बैरिकेडिंग लांघने का प्रयास किया, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प हो गई। माहौल बिगड़ता देख पुलिस ने लाठीचार्ज शुरू कर दिया, जिससे अफरा-तफरी मच गई। लाठीचार्ज के विरोध में कांग्रेसियों ने सड़क पर ही तंबू गाड़कर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
भाजपा विधायक शिव अरोड़ा का तीखा पलटवार
इस हंगामे के तुरंत बाद सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी भी सड़कों पर उतर आई। क्षेत्रीय विधायक शिव अरोड़ा के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ताओं ने मुख्य चौक पर एकत्र होकर कांग्रेस का पुतला फूंका। विधायक शिव अरोड़ा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस रुद्रपुर के शांत माहौल को खराब करना चाहती है और प्रशासनिक जिम्मेदारियों पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस खुद गुंडागर्दी पर आमादा है।
‘मिशन 2027’ की टीआरपी पॉलिटिक्स में पिसती जनता
आज का यह घटनाक्रम साफ बयां करता है कि कैसे आगामी चुनावों के लिए राजनीतिक रोटियां सेकने का काम शुरू हो चुका है। एक तरफ लाठियां चल रही हैं, धरने हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ पुतले जल रहे हैं। नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह दौर मीडिया के लिए टीआरपी का बड़ा जरिया बन चुका है, लेकिन रुद्रपुर का आम नागरिक इस सियासी ड्रामे और भारी पुलिस बंदोबस्त के बीच खुद को असुरक्षित और ठगा हुआ महसूस कर रहा है। जन सरोकार के मुद्दे एक बार फिर इस भारी हंगामे के शोर में पूरी तरह दब गए हैं।
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