भारी सुरक्षा बल के बीच डीडीए ने कश्मीरी गेट स्थित यमुना बाजार घाट किनारे स्थित मकानों को तोड़ना शुरू कर दिया है। सुबह से ही छह से अधिक बुलडोजर इस काम में लगे रहे।

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हालांकि, यहां विरोध कि जगह रहने वाले लोगों की मायूसी, भविष्य को लेकर चिंता और आक्रोश देखने को मिला।

यमुना बाजार में तोड़ फोड़ की कार्रवाई के दौरान दुखी बुजुर्ग महिला। हरीश कुमार

क्योंकि, पिछले माह मिले डीडीए व डीडीएमए के नोटिस पर हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलने तथा प्रशासन के सख्त रुख को देखते हुए लाेगों ने एक सप्ताह पहले से सामानों को समेटना और दिल्ली के अन्य स्थानों पर बसना शुरू कर दिया था। तब भी कुछ लाेग थे जो सामानों को समेटे या बेबसी से अपने आशियाने को गिरते देखते रहे।

यमुना बाजार में तोड़ फोड़ की कार्रवाई के दौरान सामान लिए सड़क पर बैठे लोग। हरीश कुमार

निवासियों के अनुसार, 30 घाटों पर मौजूद 300 से अधिक घर गिरा दिए गए, जिससे एक हजार से अधिक लोग बेघर हुए हैं। इसके पूर्व एक मई को जिला प्रशासन ने डीएमए एक्ट के तहत तो 15 मई को डीडीए ने इस बसावट को बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र में अवैध बताते हुए 15 दिन में खाली करने का नोटिस दिया था। डीडीए के अनुसार, यह इलाका यमुना के ओ-जोन में आता है, जो निर्माण-मुक्त सुरक्षित बाढ़-मैदान (फ्लडप्लेन) है।

यमुना बाजार में तोड़ फोड़ की कार्रवाई के बाद टूटे मकानों का मलबा। हरीश कुमार

माना जा रहा है कि बृहस्पतिवार को शुरू हुई यह कार्रवाई अभी कुछ दिन जारी रह सकती है। जिसे देखते यहां रहने वाले पंडे, बाल बनाने वाले, गोताखोर, नाविक व किरायेदारों के चेहरों पर मायूसी के साथ आंखों में आंसू थे। कई परिवार इस उलझन में है कि वे कहां जाए। क्योंकि, आस-पास कोई ऐसी कॉलोनी नहीं है, जहां उनके बजट के अनुसार किराये पर कमरा मिल सके। वैसे, प्रशासन ने आश्रय गृह का विकल्प दे रखा है।

कश्मीरी गेट में काम करने वाले बिजली मैकेनिक नागेंद्र मिश्रा कहते हैं कि वह करीब 20 वर्ष से इस इलाके में रह रहे हैं, लेकिन आशियाना उजड़ने के साथ परिवार समेत आश्रय गृह में नहीं रह सकते, क्योंकि उनकी बेटियां वहां सुरक्षित महसूस नहीं करतीं। कई लोगों ने बुराड़ी, वजीराबाद, शास्त्री पार्क व उस्मान पुर जैसे स्थानों का रुख किया है।

भरे गले से नागेंद्र मिश्रा बताते हैं कि यहां उनका तीन कमरों का घर था। अब आस-पास के इलाकों में उतनी ही जगह खोजने पर उन्हें कम से कम 12 से 15 हजार रुपये खर्च करने होंगे, और वे इलाके बहुत भीड़-भाड़ वाले हैं।

बीए तृतीय वर्ष की छात्रा मुस्कान को डर है कि अब उनकी पढ़ाई छूट सकती है। माता-पिता को खोने के बाद वह यहां अपने मामा के यहां थी, अब सभी नए आशियाने की तलाश में है। वह कहती है कि इस स्थिति में वह मामा-मामी पर बोझ नहीं बनना चाहेगी, बल्कि नौकरी ढूंढकर खुद से कमाने का प्रयास करेगी।

प्राधिकरण ने कहा कि उसने घाट नंबर दो और 32 के बीच बसी बस्तियों में रहने वाले लोगों को यमुना के संरक्षित बाढ़ क्षेत्र (फ्लडप्लेन) को खाली करने का नोटिस दिया था।


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