उत्तराखंड के सिलक्यारा-बारकोट सुरंग के भीतर कंक्रीट की लाइनिंग का एक हिस्सा गुरुवार (16 जुलाई) तड़के ढह गया, जिससे 21 वर्षीय एक मजदूर की मौत हो गई.

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इसी दौरान बारकोट की ओर से सिलक्यारा सुरंग के भीतर लगभग 900 मीटर अंदर कंक्रीट लाइनिंग का एक ब्लॉक गिर गया. इस हादसे में झारखंड निवासी एक मजदूर की जान चली गई.

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड

उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने कहा, ‘गुरुवार सुबह लगभग 2 बजे सुरंग के भीतर जा रहे झारखंड के एक मजदूर की गर्दन पर कंक्रीट का स्लैब गिर गया. उसे नौगांव अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई. हमने उपजिलाधिकारी (एसडीएम) को निर्देश दिया है कि मृतक के परिजनों को मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जाए.’

जिलाधिकारी ने बारकोट के उपजिलाधिकारी (एसडीएम) को घटना का आकलन करने, दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने और यह जांचने के निर्देश दिए हैं कि निर्माण एजेंसी ने निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया था या नहीं.

इस घटना की विस्तृत जांच का आदेश नेशनल हाईवे एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड ने भी दिया है, जो इस परियोजना की कार्यान्वयन एजेंसी है.

दुर्घटनाओं के लिए बदनाम रही है यह सुरंग

सिलक्यारा-बारकोट सुरंग इससे पहले भी गंभीर दुर्घटना का केंद्र रह चुकी है.

12 नवंबर, 2023 को निर्माणाधीन सुरंग का एक हिस्सा ढह जाने से 41 मजदूर उसके भीतर फंस गए थे. कई क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और खासकर ‘रैट-होल’ खनिकों के संयुक्त प्रयासों से करीब 17 दिनों बाद 28 नवंबर, 2023 को सभी 41 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया था.

मार्च 2024 में सिल्कयारा सुरंग में तैनात एक शॉटक्रेट मशीन के एक ऑपरेटर की मशीन के फिसलकर खाई में गिरने से मौत हो गई थी. मृतक की पहचान पिथौरागढ़ के डीडीहाट कस्बे के रहने वाले 24 वर्षीय गोविंद कुमार के रूप में हुई थी. वह दो महीने पहले ही काम पर आया था.

4.53 किलोमीटर लंबी सिलक्यारा-बारकोट सुरंग चारधाम परियोजना का हिस्सा है.

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की चारधाम परियोजना के तहत उत्तराखंड में 825 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों के चौड़ीकरण का कार्य किया जा रहा है.

इससे पहले द वायर की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि समिति की रिपोर्टों, परियोजना के खिलाफ दर्ज शिकायतों, सुप्रीम कोर्ट में दायर दस्तावेजों और विभिन्न अदालतों के आदेशों के अध्ययन से यह संकेत मिलता है कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और परियोजना से जुड़ी अन्य एजेंसियों ने पर्याप्त पारदर्शिता नहीं बरती है.

रिपोर्ट के अनुसार, पर्यावरण प्रभाव आकलन से बचने के लिए परियोजना को 53 छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित किया गया. इसके अलावा पेड़ों की कटाई और मलबा निस्तारण में कथित अनियमितताएं और अवैज्ञानिक ढंग से पहाड़ों की कटाई के कारण पिछले कुछ वर्षों में कई भूस्खलन और लोगों की मौत की घटनाएं भी सामने आई हैं.


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