रुद्रपुर, 29 जुलाई। उत्तराखण्ड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद ने राज्य में महिलाओं की सुरक्षा, कानून व्यवस्था और सामाजिक वातावरण को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री को जिलाधिकारी ऊधम सिंह नगर के माध्यम से विस्तृत ज्ञापन प्रेषित किया। परिषद के अध्यक्ष एवं हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स के संपादक अवतार सिंह बिष्ट ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य का निर्माण केवल प्रशासनिक सीमाओं के विस्तार का उद्देश्य लेकर हुआ था, ऐसा विचार किसी आंदोलनकारी के मन में कभी रहा ही था। राज्य आंदोलन की भावना मातृशक्ति के सम्मान, ईमानदार शासन, पारदर्शी व्यवस्था, सुरक्षित समाज और पहाड़ से लेकर मैदान तक समान अवसरों वाले उत्तराखण्ड की थी। आज अनेक घटनाओं ने उस मूल भावना को चुनौती देने का वातावरण तैयार कर दिया है।
परिषद ने कहा कि हाल ही में रुद्रपुर में 19 वर्षीय युवती के साथ हुए कथित सामूहिक दुष्कर्म ने पूरे प्रदेश की अंतरात्मा को झकझोर दिया। यह घटना केवल एक परिवार का दर्द भर सीमित विषय माना जाना उचित प्रतीत होता ही था, ऐसा कहना भी कठिन है। यह घटना पूरे समाज की चेतना को झकझोरने वाली घटना बन चुकी है। जिस प्रदेश को देवभूमि कहा जाता है, उसी प्रदेश की बेटियां भय, असुरक्षा और अपराध के साये में जीवन व्यतीत करने को विवश दिखाई पड़ रही हैं।
परिषद के अनुसार रुद्रपुर, पंतनगर, सितारगंज, काशीपुर, बाजपुर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में हजारों युवतियां रोजगार कर रही हैं। बड़ी संख्या में पर्वतीय क्षेत्रों से आने वाली बेटियां निजी कंपनियों में दिन-रात कार्य करती हैं। रात्रिकालीन ड्यूटी के दौरान सुरक्षित परिवहन, सुरक्षा कर्मी, जीपीएस युक्त वाहन, महिला सुरक्षा हेल्पलाइन, पुलिस गश्त, सीसीटीवी और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था जैसे विषयों पर गंभीर समीक्षा की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
परिषद ने कहा कि रुद्रपुर की घटना के बाद प्रदेश की अनेक बेटियों और अभिभावकों के मन में भय का वातावरण उत्पन्न हुआ है। कई परिवार रोजगार और शिक्षा के लिए बाहर जाने वाली बेटियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित दिखाई दे रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में शासन और प्रशासन की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है।
परिषद ने कहा कि उत्तराखण्ड के इतिहास में महिलाओं ने राज्य निर्माण आंदोलन से लेकर सामाजिक विकास तक अग्रणी भूमिका निभाई है। मातृशक्ति के त्याग, संघर्ष और बलिदान के आधार पर खड़े हुए इस राज्य में यदि महिलाओं की सुरक्षा पर प्रश्न उठने लगें तो प्रत्येक जनप्रतिनिधि, अधिकारी और सामाजिक संगठन को आत्ममंथन करना चाहिए।
परिषद ने अपने वक्तव्य में अंकिता भंडारी हत्याकांड का उल्लेख करते हुए कहा कि उस घटना ने भी पूरे प्रदेश को उद्वेलित किया था। उस मामले में न्यायिक प्रक्रिया जारी है और जनता आज भी पारदर्शी न्याय की अपेक्षा रखती है। परिषद का कहना है कि महिलाओं के विरुद्ध प्रत्येक गंभीर अपराध में निष्पक्ष जांच, समयबद्ध न्याय और दोष सिद्ध होने पर कठोर दंड ही समाज का विश्वास मजबूत कर सकता है।
परिषद ने कहा कि महिला सुरक्षा का विषय किसी दल की राजनीति तक सीमित रखने के स्थान पर राज्य की सर्वोच्च प्राथमिकता बनाया जाना चाहिए। अपराध नियंत्रण, नशे पर प्रभावी रोक, युवाओं के बीच बढ़ती आपराधिक प्रवृत्ति पर नियंत्रण, औद्योगिक क्षेत्रों की निगरानी और महिला सुरक्षा तंत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में व्यापक कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए।
अवतार सिंह बिष्ट ने कहा कि जनता सुशासन की अपेक्षा लेकर सरकार का चयन करती है। ऐसी अपेक्षा के अनुरूप कानून का समान रूप से पालन, अपराधियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई, पीड़ित परिवारों को सम्मानजनक सहयोग तथा न्याय प्रक्रिया में पारदर्शिता प्रत्येक लोकतांत्रिक सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी मानी जाती है।
परिषद ने ज्ञापन में मांग की कि रुद्रपुर प्रकरण की त्वरित और निष्पक्ष जांच पूरी कर न्यायालय में प्रभावी पैरवी की जाए। औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत प्रत्येक महिला कर्मचारी के लिए सुरक्षित परिवहन व्यवस्था अनिवार्य की जाए। प्रत्येक उद्योग में आंतरिक शिकायत समिति की नियमित समीक्षा हो। श्रम विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन संयुक्त निरीक्षण अभियान चलाएं। संवेदनशील क्षेत्रों में महिला पुलिस की संख्या बढ़ाई जाए। प्रत्येक औद्योगिक क्षेत्र में चौबीसों घंटे पुलिस पेट्रोलिंग संचालित की जाए। पर्वतीय क्षेत्रों से आने वाली महिलाओं के लिए सुरक्षित छात्रावास विकसित किए जाएं। महिला हेल्पलाइन को अधिक प्रभावी बनाया जाए तथा सुरक्षा मानकों का पालन करने वाले उद्योगों का नियमित मूल्यांकन किया जाए।
परिषद ने कहा कि उत्तराखण्ड का भविष्य तभी मजबूत होगा जब प्रदेश की हर बेटी अपने घर से विद्यालय, महाविद्यालय, कार्यस्थल और वापस घर तक पूरे आत्मविश्वास के साथ यात्रा कर सके। देवभूमि की पहचान आध्यात्म, संस्कृति और मातृशक्ति के सम्मान से जुड़ी रही है। उसी पहचान को मजबूत करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
देवभूमि की बेटियों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल, उत्तराखण्ड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद ने सरकार से मांगा जवाब
