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महापौर विकास शर्मा ने देवेंद्र शाही व विक्रांत फुटेला के साथ मेट्रोपोलिस सिटी गेट नंबर-1 का किया उद्घाटन?मेयर विकास शर्मा ने मेट्रोपोलिस सिटी के गेट नंबर-1 का किया उद्घाटन, कॉलोनीवासियों में उत्साह

रुद्रपुर। शहर की प्रतिष्ठित आवासीय कॉलोनी मेट्रोपोलिस सिटी में रविवार को एक भव्य समारोह के…

मेट्रोपोलिस रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चुनाव 20 मार्च तक कराने के निर्देश, तहसीलदार रुद्रपुर होंगे निर्वाचन अधिकारी

रुद्रपुर।जिला मजिस्ट्रेट उधम सिंह नगर ने मेट्रोपोलिस रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चुनाव को लेकर महत्वपूर्ण…

“फूलदेई का लोकसंदेश: नन्हे कदमों से खिलती संस्कृति, पर्वतीय समाज में प्रकृति और परंपरा का उत्सव”

रुद्रपुर।उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति और प्रकृति से जुड़ी परंपराओं का प्रतीक लोकपर्व फूलदेई इस वर्ष…

“जंग की आग में दुनिया: वैश्विक टकराव के बीच अवतार सिंह बिष्ट की विशेष रिपोर्ट” होर्मुज की दहलीज पर खड़ा महायुद्ध: ट्रंप की जिद, ईरान की चुनौती और मध्य-पूर्व में सुलगता संकट”

उत्तराखंड,पश्चिम एशिया एक बार फिर उस मोड़ पर खड़ा दिखाई दे रहा है, जहाँ से…

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रुद्रपुर में 16 मार्च को शिवसेना का पैदल मार्च: UGC नियम और जातिगत आरक्षण पर उठे सवालसंपादकीय / विशेष रिपोर्ट – अवतार सिंह बिष्टरुद्रपुर।

फूलदेई पर्व पर पंडित त्रिलोचन पनेरु की ज्योतिषीय व्याख्या, रामदत्त पंचांग का हवालाफूलदेई : उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, प्रकृति और मासूमियत का अनोखा उत्सव

14 March 2026: 14 मार्च की सुबह ब्रह्मांड में एक बड़े बदलाव की गवाह बन रही है. चंद्रदेव का मकर राशि में प्रवेश हमें आलस्य त्यागकर कर्तव्यों की ओर बढ़ने की प्रेरणा दे रहा है.

नजूल की रजिस्ट्री का रास्ता: विधायक शिव अरोड़ा की पहल?नजूल की जमीन से सम्मान तक: रुद्रपुर के गरीबों को मालिकाना हक दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल,

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पंतनगर में 119वां अखिल भारतीय किसान मेला शुरू, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया उद्घाटन, प्रगतिशील किसानों को किया सम्मानित

रुद्रपुर/पंतनगर, 14 मार्च 2026।Pushkar Singh Dhami ने Govind Ballabh Pant University of Agriculture and Technology, पंतनगर में आयोजित 119वें अखिल…

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डिजिटल इंडिया की हकीकत—रसोई गैस संकट में लौटते कदम 80 के दशक की ओर”

संपादकीय,उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले, विशेषकर रुद्रपुर में इन दिनों रसोई गैस को लेकर जो हालात दिखाई दे रहे…

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रुद्रपुर। शहर की प्रतिष्ठित आवासीय कॉलोनी मेट्रोपोलिस सिटी में रविवार को एक भव्य समारोह के बीच मुख्य प्रवेश द्वार गेट नंबर-1 का उद्घाटन संपन्न हो गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि…

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मेट्रोपोलिस रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चुनाव 20 मार्च तक कराने के निर्देश, तहसीलदार रुद्रपुर होंगे निर्वाचन अधिकारी

रुद्रपुर।जिला मजिस्ट्रेट उधम सिंह नगर ने मेट्रोपोलिस रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के चुनाव को लेकर महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। जारी आदेश के अनुसार एसोसिएशन के चुनाव अब पूर्व में नामित…

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“फूलदेई का लोकसंदेश: नन्हे कदमों से खिलती संस्कृति, पर्वतीय समाज में प्रकृति और परंपरा का उत्सव”

रुद्रपुर।उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति और प्रकृति से जुड़ी परंपराओं का प्रतीक लोकपर्व फूलदेई इस वर्ष भी पूरे प्रदेश में उत्साह, उल्लास और सांस्कृतिक रंगों के साथ मनाया गया। कुमाऊं से…

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“जंग की आग में दुनिया: वैश्विक टकराव के बीच अवतार सिंह बिष्ट की विशेष रिपोर्ट” होर्मुज की दहलीज पर खड़ा महायुद्ध: ट्रंप की जिद, ईरान की चुनौती और मध्य-पूर्व में सुलगता संकट”

उत्तराखंड,पश्चिम एशिया एक बार फिर उस मोड़ पर खड़ा दिखाई दे रहा है, जहाँ से दुनिया का भू-राजनीतिक संतुलन बदल सकता है। अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते टकराव…

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उच्च न्यायालय ने नया नियम हटाया – देशभर के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका सामने आया है। हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने लाखों कर्मचारियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

नए नियम के तहत अब कर्मचारियों को 60 साल नहीं बल्कि 55 साल की उम्र में ही रिटायर किया जाएगा। कोर्ट का कहना है कि प्रशासनिक ढांचे में युवाओं को…

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हिन्दू धर्मग्रंथों में चार युग की संकल्पना की गई है। ये हैं- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग। माना जाता है कि हर युग में मनुष्आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ?

सतयुग

चारों युगों में से सबसे पहला सतयुग है। वह युग जहां पाप, अधर्म, अन्याय और झूठ के लिए कोई जगह नहीं होता है, सतयुग कहा गया है। पुराणों के अनुसार, सतयुग का प्रारंभ कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। ग्रंथों में इस युग की अवधि लगभग 17 लाख 28 हजार वर्ष बताई गई है।

इस युग में देवी-देवता पृथ्वी पर मनुष्य की भांति ही रहते थे। कहते हैं, उनकी आयु लगभग 2 लाख वर्ष होती थी। पुष्कर इस युग का सबसे महान तीर्थ था। इस युग में भगवान विष्णु के 10 मुख्य अवतारों में से मत्स्य, कच्छप, वराह और नरसिंह अवतार हुए थे।

त्रेतायुग

ग्रंथों में त्रेतायुग की अवधि लगभग 12 लाख 28 हजार मानी गई है। इस युग की शुरुआत वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से हुई थी। इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 10,000 वर्ष हुआ करती थी। कहते हैं इस युग सबसे महान तीर्थ नैमिषारण्य था। इस युग में अधर्म का नाश करने के लिए भगवान विष्णु के श्री राम, वामन, परशुराम के अवतार हुए थे।

द्वापरयुग

पुराणों के मुताबिक, द्वापर युग की अवधि लगभग 8 लाख 64 हजार है। यह युग माघ माह के कृष्ण अमावस्या से शुरू हुआ था। हिंदू धर्म ग्रंथों में इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 1000 वर्ष बताई गई है। इस युग का सर्वश्रेष्ठ तीर्थ कुरुक्षेत्र को माना गया है। द्वापर युग में भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण ने धरती पर जन्म लेकर कंस जैसे दुष्टों का संहार किया था।

कलियुग

वर्तमान युग यानी कलियुग की अवधि तीनों युगों में सबसे कम है। इस युग की अवधि 4 लाख 32 हजार वर्ष बताई जाती है। कलियुग की शुरुआत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से मानी जाती है। यह तिथि इस साल सोमवार 30 सितंबर, 2024 को पड़ रही है।

हैरत की बात है कि इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 100 वर्ष ही रह गई है। वहीं, गंगा नदी को कलियुग का सबसे पवित्र तीर्थ स्थान बताया गया है। इस युग में भगवान विष्णु के 9वें अवतार भगवान बुद्ध का जन्म हुआ। भगवान विष्णु का 10वां अवतार कल्कि के रूप में कलियुग के अंत में होगा।

कब खत्म होगा कलियुग?

भारतीय काल-निर्णय के अनुसार कलियुग का अंत होने में अभी 4 लाख 26 हजार 875 साल बाकी हैं। इस समय कलियुग का प्रथम चरण चल रहा है और कलियुग के मात्र 5 हजार 125 साल हुए हैं। बता दें कि कलयुग के कुल अवधि 4 लाख 32 हजार साल के बताई गई है।य की बनावट से लेकर उसके व्यवहार और उम्र में कुछ परिवर्तन आए हैं।

   आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ? सतयुग…

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ताकि सनत रहे नगला पंतनगर, 1960 के दशक से लेकर 1980 तक लोगों की बसायत हुई नगला में, अवगत कराते हुए की नगला में निवास करने वाले लोगों में भारतीय सेवा की तरफ से द्वितीय विश्व युद्ध 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। वही कारगिल युद्ध में भीनगला के लोगों ने भारतीय सेना की तरफ से प्रतिभागी किया। जिसमें 1965 और 70 के बीच नगला में निवासरत, स्वर्गीय सूबेदार मेजर खड़क सिंह बिष्ट जिन्होंने19 71,1965 और 1962 की युद्ध में भारतीय सेना में प्रतिभा किया, नगला बायपास निवासी स्वर्गीय लेस नायक प्रेमचंद पांडे, जो की 1965 से नगला में निवास कर रहे हैं ।द्वितीय विश्व युद्ध 1962 और 1965 की लड़ाई में छह माह तक चीन में कैद रहे.। स्वर्गीय हवलदार मेजर धर्म सिंह का परिवार नगला में 1972 से निवास कर रहे हैं,। 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए भारतीय सेना की तरफ से लड़ाई लड़ी। स्वर्गीय सूबेदार आलम सिंह बिष्ट 1982 से नगला में निवासरत 1962 1965 1971 में भारतीय सेना की तरफ से युद्ध में हिस्सा लिया। कर्नल प्रताप सिंह, कारगिल युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। बोफोर्स तोप एवं रडार सिस्टम का पूर्ण रूप से प्रतिनिधित्व किया जिन्होंने कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई। राजस्थान बॉर्डर पर अपना एक पाव गवा चुके हैं। सूबेदार आलम सिंह के नाती वर्तमान में आर्मी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर एनडीए रजत बिष्ट S/0 नंदन सिंह बिष्ट के दो पुत्र एनडीए क्वालीफाई करने के उपरांत थल सेना में लेफ्टिनेंट एवं जल सेना में कैप्टन उदित बिष्ट अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्वर्गीय इंदर सिंह थापा 1965 1971 की लड़ाई में वही उनके पुत्र लक्ष्मण सिंह थापा भारतीय सेना से हाल फिलहाल रिटायर हुए हैं। त्रिलोक सिंह जिन्होंने भारतीय सेवा में अपने 8 साल दिए हैं। स्वर्गीय भीम सिंह बिष्ट पैरा कमांडो, आदि कई अन्य लोगों ने जो नगला क्षेत्र में निवास कर रहे हैं देश के लिए बहुत कुछ किया है, वहीं अगर उत्तराखंड राज्य आंदोलन की बात की जाए ,नगला क्षेत्र से अवतार सिंह बिष्ट, हरीश जोशी, एवं उनके परिवार के दो अन्य सदस्य, जगदीश बोहरा, प्रकाश पुजारी, जो की चिन्हित राज्य आंदोलनकारी हैं। परिवार के साथ नगला में 1976 से निवास करते हैं,। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ, उधम सिंह नगर को उत्तराखंड में मिलने के लिए 24,36 व 72 घंटे का जाम और उत्तराखंड राज्य आंदोलन में अनगिनत आंदोलन इनके द्वारा किए गए। दिल्ली फिरोजशाह कोटला मैदान से इंडिया गेट तक का मार्च पास्ट एवं उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उत्तराखंड राज्य गठन मै महत्वपूर्ण भूमिका इन की रही है। ताकि सनत रहे, उत्तराखंड राज्य आंदोलन में पूरा नगला क्षेत्र एक जुटता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जिसमें सभी जाति धर्म के लोग सम्मिलित होते थे ,मिल का पत्थर साबित हुआ था। पूरे उधम सिंह नगर में नगला क्षेत्र का जबरदस्त ,,विशेष,, असर देखने को मिलता था । नगला की खबर उधम सिंह नगर की खबर बन जाती थी। जिस नगला क्षेत्र को तोड़ने की चर्चा आजकल चल रही है । नगला वासियों ने देश व प्रदेश को एवं समाज को बहुत कुछ दिया है। आज जब नगला क्षेत्र को तोड़ने की कवायत चल रही है। राजेश शुक्ला पूर्व विधायक के द्वारा सराहनीय कार्य नगला को बचाने के लिए किया जा रहा है। नगला क्षेत्र को तोड़ने के लिए सरकारी महकमा भी कहीं ना कहीं असहज महसूस कर रहा है। हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की तरफ से हम सरकार से मांग करते हैं नगला क्षेत्र के लोगों का एवं नगला मै निवास कर रहे लोगों के अधिकार सुरक्षित हो, विधानसभा पटल पर नगला क्षेत्र को लंबे समय से निवास कर रहे लोगों को मलिकाना हक दिया जाए। और देश, प्रदेश व समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नगला ,पंतनगर वासियों के अधिकार सुरक्षित किये जाए। उत्तराखंड राज्य की परिकल्पना थी, उत्तराखंड के मूल निवासियों के अधिकार सुरक्षित होंगे। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार में सबसे ज्यादा जिन्हें नुकसान हुआ है या फिर जिनके घर तोड़ दिए गए या फिर तोड़ दिया जाएंगे। नगला वासी 60 ,70, 80 के दशक में उन जगहों पर नगला मै विस्थापित हो चुके थे ।जिन्हें आज सरकार अपना बता रहीहैं। नगला वासी की निगाहें उत्तराखंड सरकार पर हैं ।असमंजस की स्थिति नगला क्षेत्र में बनी हुई है। एक और जहां लोगों के अंदर आक्रोश है। वहीं दूसरी ओर अपने जीवन की महत्वपूर्ण जमा पूंजी व अपने मेहनत के दम पर खड़े किए गए कंक्रीट के मकान उनके दर्द को बाया कर रहे हैं। महिलाएं वह बच्चे पथराई आंखों से अपने टूटे हुए घर को देखकर स्तंभ है। लोगों के अंदर दहशत का माहौल है। उम्मीद की एक किरण धामी सरकार पर है। जो नगला को बचा सकती है।

Hindustan Global Times, Avtar Singh Bisht, journalist from Uttarakhand नगला, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी एवं भारतीय सेना, मैं महत्वपूर्ण भूमिका रही है नगला कवाशियो की ताकि सनत रहे नगला के…

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कत्यूरी सम्राट प्रीतम देव की महारानी जिया का नाम उत्तराखंड की वीर और पौराणिक गाथाओं में सम्मान से लिया जाता है। कत्यूरी राजवंश में माता को जिया कहा जाता है, इसलिए उन्हें जिया रानी कहा जाता है।इतिहासकारों और स्‍थानीय लोगों के मुताबिक जिया रानी धामदेव की मां थी और प्रख्यात उत्तराखंडी लोककथा नायक मालूशाही की दादी थीं। कहा जाता है कि जिया रानी हल्‍द्वानी के रानीबाग में रहीं थीं और उन्होंने यहां अपना बाग सजाया था। जिस कारण इस जगह का नाम रानीबाग पड़ा। जिया रानी पर कई कहावते प्रचलित हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में… रानीबाग में जिया रानी का मंदिर है। माता जिया रानी की गुफा आज भी रानीबाग में स्थित है। मान्‍यता है कि वह गुफा से वह सीधे हरिद्वार निकली थीं। यहां एक विशाल शिला है, जिसे जिया रानी का घाघरा मानकर लोग पूजते हैं। स्‍थानीय परंपराओं के अनुसार माता जिया रानी कत्यूरी वंश की रानी थीं। हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर रानीबाग में कत्यूरी वंश के लोग और सैकड़ों स्‍थानीय लोग अपने परिवार सहित सामूहित पूजा करते हैं। जिसे जागर हैं। उत्तराखंड में जिया रानी की गुफा के बारे में एक किवदंती प्रचलित है। कहा जाता है रानी जिया कत्यूरी राजा पृथ्वीपाल उर्फ प्रीतमदेव की पत्नी थी। वह रानीबाग में चित्रेश्वर महादेव के दर्शन करने आई थीं। रानी जिया बेहद सुंदर थीं। जैसे ही रानी नहाने के लिए नदी पर पहुंचीं तो वहां रुहेलों की सेना ने वहां घेरा डाल दिया। इस दौरान उन्होंने अपने ईष्ट देवताओं का स्मरण किया और गार्गी नदी के पत्थरों में ही समा गईं। नदी के किनारे एक विचित्र रंग की शिला आज भी वहां देखने को मिलती है, जिसे चित्रशिला कहा जाता है। जिया रानी को कुमाऊं में न्याय की देवी के रूप में पूजा जाता है। इतना ही नहीं जिया रानी कई कुलों की आराध्‍य देवी भी हैं।क्या है माता जिया रानी का असली नाम?जिया रानी का वास्तविक नाम मौला देवी था, जो हरिद्वार के राजा अमरदेव पुंडीर की पुत्री थीं। मौला देवी राजा प्रीतमपाल की दूसरी रानी थीं। मौला देवी को राजमाता का दर्जा मिला और उस क्षेत्र में माता को जिया कहा जाता था, इसलिए उनका नाम जिया रानी पड़ गया।क्‍यों कहलाई कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई?माता जिया रानी को कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि माता जिया रानी ने रोहिलो और तुर्कों के आक्रमण के दौरान कुमाऊं की रक्षा की थी और युद्ध में बलिदानी हुईं थी।

स्‍थानीय लोगों का मानना है कि युद्ध के समय जिया रानी ने हीरे-मोती जड़ित लहंगा पहना था। जो बाद में पत्थर बन गया। ये पत्थर आज भी है रानीबाग में…

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रूद्रपुर  जिला निर्वाचन अधिकारी उदय राज सिंह ने सभी मतदाताओं से अपील की है कि वे 19 अप्रैल मतदान दिवस पर अपने मताधिकार का अवश्य प्रयोग करें।उन्होंने युवा मतदाताओं, बुजुर्ग, दिव्यांग, महिलाओं के साथ ही सभी मतदाताओं से निर्वाचन महापर्व में मतदान कर प्रतिभाग करने की अपील की । उन्होंने कहा भारत विश्व का सबसे बड़ा व मजबूत लोकतंत्र है, स्वस्थ लोकतंत्र के लिए मतदान आवश्यक है ,मतदान हमारी ताकत है इसलिए अपने मत की ताकत को समझते हुए निर्भय होकर अवश्य मतदान करें साथ ही अपने आसपास के मतदाताओं को भी मतदान हेतु प्रेरित करें।जिला निर्वाचन अधिकारी ने कहा मताधिकार हमारा अधिकार है इसलिए अपने कर्तव्य को समझते हुए बिना किसी प्रकार के प्रलोभन के निर्भिक होकर मत का अवश्य प्रयोग करें ,ताकि समाज को एक अच्छा जनप्रतिनिधि मिले व क्षेत्र ,देश का विकास हो सके, इसलिए 19 अप्रैल को बूथ में जाकर मतदान अवश्य करें।

जिला सूचना अधिकारी उधम सिंह नगर अप्रैल 2024- आगामी 19 अप्रैल 2024 को होने वाले लोकसभा सामान्य मतदान के सफल सम्पादन हेतु आज पुलिस लाईन में सामान्य प्रेक्षक गगनदीप सिंह […]

रुद्रपुर मेट्रोपोलिस सिटी :रामनवमी के उपलक्ष्य  में प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी मेट्रो (चैंप्स) चेम्स ग्रुप के द्वारा मेट्रोपोलिस सिटी गेट नंबर 1 में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया ।जिसमें मेट्रोपोलिस के 1700 परिवार के साथ-साथ राहगीरों ने भी भंडारे का लुफ्त उठाया। भंडारा शुरू होने से पूर्व हिंदू मान्यता के अनुसार नौ कन्याओं का पूजन किया गया । तत्पश्चात  भंडारे का प्रसाद खिलाने के उपरांत! विधि विधान से शुरू हुआ भंडारा! (भंडारा) कार्यक्रम 11:00 बजे शुरू हुआ, जो निरंतर चलते हुए 3:00 बजे भंडारे का समापन किया गया। भंडारे में तरह-तरह के लग्जरी व्यंजन बनाए गए थे।

अध्यक्ष देवेंद्र शाही ने भंडारे की आयोजन समिति मेट्रो चेम्स  को आशीर्वाद देते हुए कहा भगवान श्रीराम ,मां दुर्गा भगवती हम सबके अराध्य हैं। उनकी सेवा मेट्रो (चैंप्स) चेम्स द्वारा भंडारे का […]

रूद्रपुर 17 अप्रैल, 2024  जिला निर्वाचन अधिकारी उदय राज सिंह ने सभी मतदाताओं से अपील की है कि वे 19 अप्रैल मतदान दिवस पर अपने मताधिकार का अवश्य प्रयोग करें।उन्होंने युवा मतदाताओं, बुजुर्ग, दिव्यांग, महिलाओं के साथ ही सभी मतदाताओं से निर्वाचन महापर्व में मतदान कर प्रतिभाग करने की अपील की । उन्होंने कहा भारत विश्व का सबसे बड़ा व मजबूत लोकतंत्र है, स्वस्थ लोकतंत्र के लिए मतदान आवश्यक है ,मतदान हमारी ताकत है इसलिए अपने मत की ताकत को समझते हुए निर्भय होकर अवश्य मतदान करें साथ ही अपने आसपास के मतदाताओं को भी मतदान हेतु प्रेरित करें।जिला निर्वाचन अधिकारी ने कहा मताधिकार हमारा अधिकार है इसलिए अपने कर्तव्य को समझते हुए बिना किसी प्रकार के प्रलोभन के निर्भिक होकर मत का अवश्य प्रयोग करें ,ताकि समाज को एक अच्छा जनप्रतिनिधि मिले व क्षेत्र ,देश का विकास हो सके, इसलिए 19 अप्रैल को बूथ में जाकर मतदान अवश्य करें।

हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स/प्रिंट मीडिया :शैल ग्लोबल टाइम्स/ अवतार सिंह बिष्ट रुद्रपुर,“प्रवक्ता: श्रमजीवी पत्रकार यूनियन उत्तराखंड”

श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय की एक कारगुजारी ने सवाल खड़े कर दिए हैं। विवि ने पहले तो एक बीएड कॉलेज में फर्जी दाखिले पकड़े, फिर परीक्षा निरस्त की। अब तीन महीने बाद दोबारा प्रवेश परीक्षा से उन्हीं दाखिलों का वैध करा दिया।

मामला है रुड़की के आरसीपी कॉलेज का। कॉलेज में बीएड दाखिलों के लिए विवि ने 12 जनवरी को प्रवेश परीक्षा कराई थी। यह परीक्षा विवि के परीक्षा नियंत्रक प्रो. वीपी […]

देवभूमि उत्तराखंड के साथ ही चारों धाम, हेमकुंड साहिब व देवभूमि के अनगिनत तीर्थ मंदिरों को प्रणाम कर अपना संबोधन शुरू करने वाले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पल भर में ही अपार जनसमूह को अपने साथ जोड़ लिया।2024: लोकसभा चुनाव 2024 के लिए प्रचार जोरों पर है। मतदान कुल 7 चरणों में होगा, लेकिन उत्तराखंड की सभी पांच सीटों के लिए पहले ही चरण में 19 अप्रैल को मतदान होगा।

देवभूमि में प्रचार अपने अंतिम चरण में है। तमाम नेता प्रचार में उतर आए हैं। वरिष्ठ नेता जो स्वयं चुनाव नहीं लड़ रहे हैं वह अपनी पार्टी के नेताओं के […]

UPSC Result 2023: संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा में उत्तराखंड के युवाओं ने परचम लहराया है। दून निवासी अंशुल भट्ट ने परीक्षा में 22वीं रैंक हासिल की है।

जबकि दून के ही पवन कुमार गोयल ने 28वीं रैंक हासिल की है। पवन फिलहाल आइआरएस अधिकारी हैं और मुंबई में तैनात हैं। जबकि हल्द्वानी के तनुज पाठक ने 72वीं […]

देहरादून; लोकतंत्र के महापर्व में मतदाताओं के मतदान से मिलने वाला आशीर्वाद सियासी दलों का भाग्य बदल देता है। भाजपा और कांग्रेस के स्टार प्रचारकों की धमक के बीच उत्तराखंड की पांचों लोकसभा सीटों पर चुनावी प्रचार का अंतिम चरण शुरू हो गया है। अब चुनावी समर में प्रचार अभियान के लिए सिर्फ दो दिन शेष हैं। चुनावी घोषणा पत्र जारी होने के बाद अब कांग्रेस और भाजपा अपने अपने दलों के के घोषणा पत्रों के साथ कार्यकर्ता अब जनता के बीच पहुंच रहे है। भाजपा कार्यकर्ता जहां संकल्प पत्र में मोदी की गारंटियों को लेकर बेहद उत्साहित है तो वहीं कांग्रेस ने भी न्याय की गारंटियों को लेकर चुनावी माहौल को गरम कर दिया है। बहरहाल अब चुनावी समर में प्रचार अभियान के लिए सिर्फ दो दिन शेष हैं। आगामी 19 अप्रैल को प्रदेश में पहले चरण में पांच सीटों पर मतदान होगा जबकि मतदान के नतीजे 4 जून को घोषित होगे।पांच लोकसभा सीट वाले उत्तराखंड के लगभग 82.48 लाख से अधिक मतदाता अपने सक्रिय भूमिका से कई मायनों में अपनी अलग पहचान रखते हैं। इस बार कई नेये चेहरों पर भी राष्ट्रीय दलो ंने दांव खेला है और उनकी सक्रियता से चुनावी महौल भी गरमाया हुआ है। बीते दो चुनावों 2014 और 2019 में भाजपा के सभी उम्मीदवारों को संसद भेजा है। 2009 में ऐसा ही मौका कांग्रेस को दिया था। राज्य गठन से पहले और बाद में कई बार ऐसे मौके भी आए, जब मतदाताओं ने अपनी गढ़ी परिपाटी को एक झटके में तोड़ा भी है। छोटे राज्य की राजनीतिक सोच और नजरिया लंबे समय से दो दल भाजपा-कांग्रेस के करीब ही रहा है। क्षेत्रीय दलों की अपेक्षा राज्य गठन के बाद 2004 में हरिद्वार से समाजवादी पार्टी के सांसद को भीडी संसद पहुंचाया। एक समय ऐसा भी था जब यहां के मतदाता राज्य में एक दल की सरकार बनाते और सांसद दूसरे दल का चुनकर भेजते। 2002 में राज्य में कांग्रेस की सरकार थी, लेकिन पांच में तीन सांसद भाजपा के जीते। 2009 में भाजपा की सरकार बनी, लेकिन उसके सभी सांसद उम्मीदवार हार गए। 2014 में राज्य में कांग्रेस की सरकार थी, बावजूद उसके उसका कोई भी उम्मीदवार नहीं जीत सका। मोदी के मैजिक से मतदाताओं का मिजाज भांपने में भाजपा कुछ मायनों में आगे रही है। शायद यही कारण है कि लोगों ने अपनी बनाई रणनीति और परंपरा को तोड़ना बेहतर समझा। राज्य में पांच-पांच साल का फार्मूला भाजपा को जिताकर तोड़ा। 2019 में भाजपा के पांचों सांसदों को पुनः जिताकर भेजा, जबकि राज्य में भाजपा की सरकार थी। पौड़ी लोकसभा लोकसभा क्षेत्र में आने वालीं 14 विधानसभा सीटों में भाजपा के पास 13 हैं। कांग्रेस के पास एक मात्र बदरीनाथ सीट है। इस लोकसभा सीट में एक विधानसभा नैनीताल जिले की रामनगर भी शामिल है। इस सीट पर कांग्रेस ने भाजपा से पहले अपने उम्मीदवार गणेश गोदियाल की घोषणा की थी। भाजपा ने इस सीट पर इस बार तीरथ सिंह रावत की जगह राज्यसभा सांसद रहे अनिल बलूनी को उम्मीदवार बनाया है। लोकसभा के जातीय गणित और मतदाताओं के ब्राहमण-ठाकुर फार्मूले में यहां ठाकुर मतदाता निर्णायक माने जाते हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही उम्मीदवार ब्राहमण हैं। टिहरी लोकसभा लोकसभा क्षेत्र की 14 में से दो विधानसभा सीट कांग्रेस के पास हैं। इस लोकसभा क्षेत्र की आधी यानि 7 सीट देहरादून जिले में आती हैं। पहाड़ के साथ देहरादून के मतदाता भी निर्णायक की भूमिका में रहते हैं। देहरादून में मिश्रित आबादी और यूपी के सहारनपुर जिले से सटे होने के कारण विकासनगर, सहसपुर, कैंट का कुछ हिस्सा, राजपुर और रायपुर मुस्लिम आबादी का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। हालांकि शहरी आबादी का फायदा भाजपा को ही मिलता रहा है। भाजपा ने यहां राजघराने पर भरोसा जताते हुए फिर से माला राज्यलक्ष्मी को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने टिहरी में वरिष्ठ नेता और मसूरी के पूर्व विधायक जोत सिंह गुनसोला को आजमाया है।

हरिद्वार लोकसभा क्षेत्र की 14 विधानसभा क्षेत्रों में से भाजपा के पास मात्र छह विधानसभा क्षेत्र हैं। जबकि अन्य आठ में कांग्रेस के पास पांच, दो बसपा और एक निर्दलीय […]

रूद्रपुर। पावन नवरात्र के अष्टमी पर्व पर आज मां अटरिया का रम्पुरा स्थित मां अटरिया मंदिर से भव्य डोला निकाला गया। जो नगर के मुख्य मार्गों से होकर गुजरता हुआ मेला स्थल स्थित प्राचीन सिद्ध पीठ मां अटरिया मंदिर पहुंचा। इससे पूर्व रम्पुरा स्थित मां अटरिया मंदिर में माता पुष्पा देवी के सानिध्य में पूजा अर्चना की गई। तत्पश्चात मां अटरिया की भव्य प्रतिमा को फूलों से सुसज्जित पालकी में विराजमान किया गया। शोभा यात्रा में कई सुंदर झांकियां भी प्रदर्शित की गई थी। बैंड बाजों की भजन धुन में सैकड़ों श्रद्धालु जयघोषों के साथ नाचते गाते चल रहे थे। शोभा यात्रा का मार्ग में अनेक स्थानों पर पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। शोभा यात्रा मुख्य मार्गों से होकर गुजरती हुई प्राचीन अटरिया मंदिर पहुंची जहां अनुष्ठानों के साथ मां अटरिया देवी की प्रतिमा को स्थापित किया गया। इस दौरान माता पुष्पा देवी, प्रबंधक, सचिव अरविंद शर्मा, पंकज गोड़, मनीष शर्मा, दीपा शर्मा, सौरभ शर्मा, सुनीता गोड़, चौधरी धनराज सिंह, अशोक यादव, मोहन यादव, राजू कोली, राजू गुप्ता, द्रोपा देवी ,देवकी देवी आदि लोग मौजूद रहे । इसके बाद कल से मेले का शुभारंभ होगा।

रुद्रपुर मंगलवार को व्यय पर्यवेक्षक टी शंकर  द्वारा पुलिस नियंत्रण कक्ष का निरीक्षण किया गया। व्यय पर्यवेक्षक द्वारा अंतरराज्यीय तथा अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की निगरानी का निरीक्षण सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से किया। उन्होंने  सभी टीमों के कार्यों पर संतोष व्यक्त किया। लोकसभा मतदान 19 अपै्रल को है उसको ध्यान में रखते हुए आने वाले 72 घंटों के लिए अतिरिक्त सावधानी व नजर रखने के निर्देश सभी संबंधित टीमों को दिये।निरीक्षण में लॉइजनिंग ऑफिसर प्रेक्षक हितेश पंत व अन्य मौजूद थे।

रूद्रपुर 16 अप्रैल, 2024 (सू.वि.)- जिला निर्वाचन अधिकारी उदयराज सिंह के निर्देशन में मंगलवार को बगवाड़ा मंडी परिसर में बेवकांटिंग कार्मिको को मास्टर टेªनरो द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के […]

वर्तमान लखनपुर पांडव लोक अज्ञातवास के दौरान यहां पर रहे इस दौरान रानी द्रोपती राजा बिराठ की महारानी की सेवा मे तैनात थी,जहा बिराठ केसेनापति व महारानी के भाई महाबली कीचक ने रानी द्रोपती से दुर्व्यवहार किया था,जिस कारन् महबली भीम ने किचक का बध कर दिया था,पूरे बैराठ मे बडा आश्चर्य हुआ की महाबली कीचक को कोंन मार् सकता है, इस बात् का पता हि नही लग सका की कीचक को किसने मारा,जिस स्थान पर मारा राम गंगा नदी के किनारे कीचक घाट है और वहां पर के खेतों का नामकीचकसेरा,हैसेरा मैदान खेत को कहते हैंमेरे गांव का मुकुट यानी सिर्फ असुरकोट मैं कीचक का महल था मेरे घर से दूरी 4 किलोमीटर हैंपांडव कल में स्थान का नाम विराट नगर था फिर बाद में ब्रह्मपुरी कहलाया और जब कस्तूरी लोग स्वतंत्र प्रशासन करने लगे इसका नाम लखनपुर पड़ा जो राम गंगा नदी के किनारे बसा है, विराट नगरी के दक्षिणी छोर के तरफ राम पादुका मंदिर है मंदिर लगभग 12वीं शताब्दी के हैं वहां पर मंदिर में शिव की मूर्ति तथा रामचंद्र जी के चरण विराजमान है कहते हैं बद्रीनाथ और देवप्रयाग जाते समय वे इसी मार्ग से गए मैदानी क्षेत्र से जोशीमठ बद्रीनाथ देवप्रयाग केदारनाथ जाने का मार्ग पहले से यही था हल्द्वानी और रामनगर मोटर मार्ग बद्रीनाथ को इसी स्थान से गुजरते हैंआने वाले यात्रियों का मार्ग भीयहां से चारों दिशाओं को मार्ग सुलभ है यह Hindustan Global Times: विराटनगर वर्तमान लखनपुर पांडव लोक अज्ञातवास के दौरान यहां पर रहे इस दौरान रानी द्रोपती राजा बिराठ की महारानी की सेवा मे तैनात थी,जहा बिराठ के सेनापति व महारानी के भाई महाबली कीचक ने रानी द्रोपती से दुर्व्यवहार किया था,जिस कारन् महबली भीम ने किचक का बध कर दिया था,पूरे बैराठ मे बडा आश्चर्य हुआ की महाबली कीचक को कोंन मार् सकता है, इस बात् का पता ही नही लग सका की कीचक को किसने मारा,जिस स्थान पर मारा राम गंगा नदी के किनारे कीचक घाट है और वहां पर के खेतों का नामकीचकसेरा,है सेरा मैदान खेत को कहते हैं।मेरे गांव का मुकुट यानी सिर्फ असुरकोट मैं कीचक का महल था मेरे घर से दूरी 4 किलोमीटर हैं।पांडव कल में स्थान का नाम विराट नगर था। फिर बाद में ब्रह्मपुरी कहलाया और जब कस्तूरी लोग स्वतंत्र प्रशासन करने लगे इसका नाम लखनपुर पड़ा जो राम गंगा नदी के किनारे बसा है, विराट नगरी के दक्षिणी छोर के तरफ राम पादुका मंदिर है ।मंदिर लगभग 12वीं शताब्दी के हैं ।वहां पर मंदिर में शिव की मूर्ति तथा रामचंद्र जी के चरण विराजमान है ।कहते हैं बद्रीनाथ और देवप्रयाग जाते समय वे इसी मार्ग से गए मैदानी क्षेत्र से जोशीमठ बद्रीनाथ देवप्रयाग केदारनाथ जाने का मार्ग पहले से यही था हल्द्वानी और रामनगर मोटर मार्ग बद्रीनाथ को इसी स्थान से गुजरते हैंआने वाले यात्रियों का मार्ग भीयहां से चारों दिशाओं को मार्ग सुलभ है यह क्षेत्र वर्तमान चौखुटिया शहर के अंदर आता है जिसका एक नाम गनाई भी है जो गणेश मंदिर के अनुसार पड़ा इसके बारे में मैंने पहले ग्रुप में एक लिख डाला था गणेश मंदिर संबंधी इतिहास!

विराटनगर वर्तमान लखनपुर पांडव लोक अज्ञातवास के दौरान यहां पर रहे इस दौरान रानी द्रोपती राजा बिराठ की महारानी की सेवा मे तैनात थी,जहा बिराठ केसेनापति व महारानी के भाई […]