Breaking News

उत्तराखण्ड

View All

शर्वरी का सपना अब हकीकत में बदल गया है, क्योंकि उन्हें प्रसिद्ध फिल्म निर्माता सूरज बड़जात्या की आगामी फिल्म ‘ये प्रेम मोल लिया’ में मुख्य अभिनेत्री के रूप में साइन किया गया है।

बेंगलुरु में एक प्यार भरे रिश्तें का इतना दर्दनाक अंत हुआ कि जिसने सभी को चौंका कर रख दिया। पुलिस ने एक महिला को अपने ही प्रेमी की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया है जिसका खुलासा 21 अप्रैल को हुआ।

मुआवजे के लालच में रचा गया झूठा पॉक्सो केस? युवती ने राष्ट्रपति से लगाई न्याय की गुहार

केदरानाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुल गए हैं. बाबा के दर्शन का लंबा इंतजार अब खत्म हो गया है.22 अप्रैल को शुभ मुहूर्त में केदारनाथ धाम के कपाट खोले गए. सभी श्रद्धालु अब बाबा केदार के दर्शन कर सकेंगे.

देश

View All

देहरादून : वीएमएसबी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का नवम दीक्षांत समारोह सम्पन्न, 37 पदक और 14 पीएचडी उपाधियां प्रदान

देहरादून, 22 अप्रैल 2026। वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, देहरादून का नवम दीक्षांत…

रुद्रपुर में पांच दिवसीय ऑल इंडिया ओपन शतरंज प्रतियोगिता का शुभारंभ, देशभर के 260 खिलाड़ी ले रहे हिस्सा

रुद्रपुर, 22 अप्रैल 2026। ऑल इंडिया शतरंज फेडरेशन एवं उत्तराखंड शतरंज फेडरेशन के तत्वावधान में…

पानीपत। आसाराम बापू केस के मुख्य गवाह रहे महेंद्र चावला, उसके भाई देवेंद्र व भतीजे रामप्रसाद को 70 लाख रुपये की ठगी के आरोप के मामले में सोमवार को कोर्ट में पेश किया।

कोर्ट ने तीन आरोपितों को तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा है। पुलिस रिमांड…

खटीमा। चकरपुर के एक इंटर कालेज के खेल शिक्षक द्वारा छात्रा की अश्लील वीडियो बनाने से लोग भड़क उठे। इसके विरोध में उन्होंने स्कूल पहुंचकर खासा हंगामा काटने के साथ खंड शिक्षाधिकारी भानुप्रताप कुशवाहा का घेराव कर उन्हें जमकर खरी-खोटी सुनाई।

मौके पर पहुंची पुलिस लोगों के चुंगल से बचाकर शिक्षक को कोतवाली ले आयी। वहीं…

दुनिया

View All

शर्वरी का सपना अब हकीकत में बदल गया है, क्योंकि उन्हें प्रसिद्ध फिल्म निर्माता सूरज बड़जात्या की आगामी फिल्म ‘ये प्रेम मोल लिया’ में मुख्य अभिनेत्री के रूप में साइन किया गया है।

बेंगलुरु में एक प्यार भरे रिश्तें का इतना दर्दनाक अंत हुआ कि जिसने सभी को चौंका कर रख दिया। पुलिस ने एक महिला को अपने ही प्रेमी की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया है जिसका खुलासा 21 अप्रैल को हुआ।

मुआवजे के लालच में रचा गया झूठा पॉक्सो केस? युवती ने राष्ट्रपति से लगाई न्याय की गुहार

केदरानाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुल गए हैं. बाबा के दर्शन का लंबा इंतजार अब खत्म हो गया है.22 अप्रैल को शुभ मुहूर्त में केदारनाथ धाम के कपाट खोले गए. सभी श्रद्धालु अब बाबा केदार के दर्शन कर सकेंगे.

Express News

View All

केदरानाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुल गए हैं. बाबा के दर्शन का लंबा इंतजार अब खत्म हो गया है.22 अप्रैल को शुभ मुहूर्त में केदारनाथ धाम के कपाट खोले गए. सभी श्रद्धालु अब बाबा केदार के दर्शन कर सकेंगे.

इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपनी पत्नी गीता पुष्कर धामी के साथ बाबा के दर्शन के लिए केदारनाथ धाम…

Read More

मेष दिन ऊर्जा से भरपूर रहेगा। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, जिन्हें सफलतापूर्वक निभाएंगे। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, लेकिन खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी है। परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलेगा।

प्रेम जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड…

Read More

रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर)। पंतनगर सिडकुल में वोल्टास कंपनी के असिस्टेंट मैनेजर ने मंगलवार को पत्नी से वीडियो काल पर बात करने के बाद फांसी लगा ली। पुलिस के अनुसार पति से हुए विवाद के बाद पत्नी अपने बच्चों के साथ मायके चली गई थी।

प्रवचन से नहीं, डर से याद आया भगवान—उत्तराखंड ड्राइवर ने मार ली बाज़ी!”

‘भूत बंगला’ की चमक फीकी! 100 करोड़ के बावजूद दर्शकों ने किया नकार, मंडे टेस्ट में गिरा कलेक्शन

उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा का शुभारंभ हो चुका है. गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुल चुके हैं, जबकि केदारनाथ धाम के कपाट भी शीघ्र खुलने जा रहे हैं.

देहरादून : वीएमएसबी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का नवम दीक्षांत समारोह सम्पन्न, 37 पदक और 14 पीएचडी उपाधियां प्रदान

देहरादून, 22 अप्रैल 2026। वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, देहरादून का नवम दीक्षांत समारोह बुधवार को भव्य एवं गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान…

Read More

रुद्रपुर में पांच दिवसीय ऑल इंडिया ओपन शतरंज प्रतियोगिता का शुभारंभ, देशभर के 260 खिलाड़ी ले रहे हिस्सा

रुद्रपुर, 22 अप्रैल 2026। ऑल इंडिया शतरंज फेडरेशन एवं उत्तराखंड शतरंज फेडरेशन के तत्वावधान में देवभूमि शतरंज एसोसिएशन द्वारा भारतीयम इंटरनेशनल स्कूल, लालपुर रुद्रपुर में आयोजित पांच दिवसीय स्वर्गीय श्री…

Read More

पानीपत। आसाराम बापू केस के मुख्य गवाह रहे महेंद्र चावला, उसके भाई देवेंद्र व भतीजे रामप्रसाद को 70 लाख रुपये की ठगी के आरोप के मामले में सोमवार को कोर्ट में पेश किया।

कोर्ट ने तीन आरोपितों को तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा है। पुलिस रिमांड के दौरान पांच राज्यों में दबिश देकर पूछताछ करेगी। कोर्ट की अगली तारीख 23 अप्रैल…

Read More

खटीमा। चकरपुर के एक इंटर कालेज के खेल शिक्षक द्वारा छात्रा की अश्लील वीडियो बनाने से लोग भड़क उठे। इसके विरोध में उन्होंने स्कूल पहुंचकर खासा हंगामा काटने के साथ खंड शिक्षाधिकारी भानुप्रताप कुशवाहा का घेराव कर उन्हें जमकर खरी-खोटी सुनाई।

मौके पर पहुंची पुलिस लोगों के चुंगल से बचाकर शिक्षक को कोतवाली ले आयी। वहीं आरोपित शिक्षक को निलंबित कर बीईओ को रुद्रपुर कार्यालय संबंद्ध कर दिया गया है। अवतार…

Read More

उच्च न्यायालय ने नया नियम हटाया – देशभर के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका सामने आया है। हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने लाखों कर्मचारियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

नए नियम के तहत अब कर्मचारियों को 60 साल नहीं बल्कि 55 साल की उम्र में ही रिटायर किया जाएगा। कोर्ट का कहना है कि प्रशासनिक ढांचे में युवाओं को…

Read More

हिन्दू धर्मग्रंथों में चार युग की संकल्पना की गई है। ये हैं- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग। माना जाता है कि हर युग में मनुष्आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ?

सतयुग

चारों युगों में से सबसे पहला सतयुग है। वह युग जहां पाप, अधर्म, अन्याय और झूठ के लिए कोई जगह नहीं होता है, सतयुग कहा गया है। पुराणों के अनुसार, सतयुग का प्रारंभ कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। ग्रंथों में इस युग की अवधि लगभग 17 लाख 28 हजार वर्ष बताई गई है।

इस युग में देवी-देवता पृथ्वी पर मनुष्य की भांति ही रहते थे। कहते हैं, उनकी आयु लगभग 2 लाख वर्ष होती थी। पुष्कर इस युग का सबसे महान तीर्थ था। इस युग में भगवान विष्णु के 10 मुख्य अवतारों में से मत्स्य, कच्छप, वराह और नरसिंह अवतार हुए थे।

त्रेतायुग

ग्रंथों में त्रेतायुग की अवधि लगभग 12 लाख 28 हजार मानी गई है। इस युग की शुरुआत वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से हुई थी। इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 10,000 वर्ष हुआ करती थी। कहते हैं इस युग सबसे महान तीर्थ नैमिषारण्य था। इस युग में अधर्म का नाश करने के लिए भगवान विष्णु के श्री राम, वामन, परशुराम के अवतार हुए थे।

द्वापरयुग

पुराणों के मुताबिक, द्वापर युग की अवधि लगभग 8 लाख 64 हजार है। यह युग माघ माह के कृष्ण अमावस्या से शुरू हुआ था। हिंदू धर्म ग्रंथों में इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 1000 वर्ष बताई गई है। इस युग का सर्वश्रेष्ठ तीर्थ कुरुक्षेत्र को माना गया है। द्वापर युग में भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण ने धरती पर जन्म लेकर कंस जैसे दुष्टों का संहार किया था।

कलियुग

वर्तमान युग यानी कलियुग की अवधि तीनों युगों में सबसे कम है। इस युग की अवधि 4 लाख 32 हजार वर्ष बताई जाती है। कलियुग की शुरुआत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से मानी जाती है। यह तिथि इस साल सोमवार 30 सितंबर, 2024 को पड़ रही है।

हैरत की बात है कि इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 100 वर्ष ही रह गई है। वहीं, गंगा नदी को कलियुग का सबसे पवित्र तीर्थ स्थान बताया गया है। इस युग में भगवान विष्णु के 9वें अवतार भगवान बुद्ध का जन्म हुआ। भगवान विष्णु का 10वां अवतार कल्कि के रूप में कलियुग के अंत में होगा।

कब खत्म होगा कलियुग?

भारतीय काल-निर्णय के अनुसार कलियुग का अंत होने में अभी 4 लाख 26 हजार 875 साल बाकी हैं। इस समय कलियुग का प्रथम चरण चल रहा है और कलियुग के मात्र 5 हजार 125 साल हुए हैं। बता दें कि कलयुग के कुल अवधि 4 लाख 32 हजार साल के बताई गई है।य की बनावट से लेकर उसके व्यवहार और उम्र में कुछ परिवर्तन आए हैं।

   आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ? सतयुग…

Read More

ताकि सनत रहे नगला पंतनगर, 1960 के दशक से लेकर 1980 तक लोगों की बसायत हुई नगला में, अवगत कराते हुए की नगला में निवास करने वाले लोगों में भारतीय सेवा की तरफ से द्वितीय विश्व युद्ध 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। वही कारगिल युद्ध में भीनगला के लोगों ने भारतीय सेना की तरफ से प्रतिभागी किया। जिसमें 1965 और 70 के बीच नगला में निवासरत, स्वर्गीय सूबेदार मेजर खड़क सिंह बिष्ट जिन्होंने19 71,1965 और 1962 की युद्ध में भारतीय सेना में प्रतिभा किया, नगला बायपास निवासी स्वर्गीय लेस नायक प्रेमचंद पांडे, जो की 1965 से नगला में निवास कर रहे हैं ।द्वितीय विश्व युद्ध 1962 और 1965 की लड़ाई में छह माह तक चीन में कैद रहे.। स्वर्गीय हवलदार मेजर धर्म सिंह का परिवार नगला में 1972 से निवास कर रहे हैं,। 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए भारतीय सेना की तरफ से लड़ाई लड़ी। स्वर्गीय सूबेदार आलम सिंह बिष्ट 1982 से नगला में निवासरत 1962 1965 1971 में भारतीय सेना की तरफ से युद्ध में हिस्सा लिया। कर्नल प्रताप सिंह, कारगिल युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। बोफोर्स तोप एवं रडार सिस्टम का पूर्ण रूप से प्रतिनिधित्व किया जिन्होंने कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई। राजस्थान बॉर्डर पर अपना एक पाव गवा चुके हैं। सूबेदार आलम सिंह के नाती वर्तमान में आर्मी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर एनडीए रजत बिष्ट S/0 नंदन सिंह बिष्ट के दो पुत्र एनडीए क्वालीफाई करने के उपरांत थल सेना में लेफ्टिनेंट एवं जल सेना में कैप्टन उदित बिष्ट अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्वर्गीय इंदर सिंह थापा 1965 1971 की लड़ाई में वही उनके पुत्र लक्ष्मण सिंह थापा भारतीय सेना से हाल फिलहाल रिटायर हुए हैं। त्रिलोक सिंह जिन्होंने भारतीय सेवा में अपने 8 साल दिए हैं। स्वर्गीय भीम सिंह बिष्ट पैरा कमांडो, आदि कई अन्य लोगों ने जो नगला क्षेत्र में निवास कर रहे हैं देश के लिए बहुत कुछ किया है, वहीं अगर उत्तराखंड राज्य आंदोलन की बात की जाए ,नगला क्षेत्र से अवतार सिंह बिष्ट, हरीश जोशी, एवं उनके परिवार के दो अन्य सदस्य, जगदीश बोहरा, प्रकाश पुजारी, जो की चिन्हित राज्य आंदोलनकारी हैं। परिवार के साथ नगला में 1976 से निवास करते हैं,। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ, उधम सिंह नगर को उत्तराखंड में मिलने के लिए 24,36 व 72 घंटे का जाम और उत्तराखंड राज्य आंदोलन में अनगिनत आंदोलन इनके द्वारा किए गए। दिल्ली फिरोजशाह कोटला मैदान से इंडिया गेट तक का मार्च पास्ट एवं उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उत्तराखंड राज्य गठन मै महत्वपूर्ण भूमिका इन की रही है। ताकि सनत रहे, उत्तराखंड राज्य आंदोलन में पूरा नगला क्षेत्र एक जुटता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जिसमें सभी जाति धर्म के लोग सम्मिलित होते थे ,मिल का पत्थर साबित हुआ था। पूरे उधम सिंह नगर में नगला क्षेत्र का जबरदस्त ,,विशेष,, असर देखने को मिलता था । नगला की खबर उधम सिंह नगर की खबर बन जाती थी। जिस नगला क्षेत्र को तोड़ने की चर्चा आजकल चल रही है । नगला वासियों ने देश व प्रदेश को एवं समाज को बहुत कुछ दिया है। आज जब नगला क्षेत्र को तोड़ने की कवायत चल रही है। राजेश शुक्ला पूर्व विधायक के द्वारा सराहनीय कार्य नगला को बचाने के लिए किया जा रहा है। नगला क्षेत्र को तोड़ने के लिए सरकारी महकमा भी कहीं ना कहीं असहज महसूस कर रहा है। हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की तरफ से हम सरकार से मांग करते हैं नगला क्षेत्र के लोगों का एवं नगला मै निवास कर रहे लोगों के अधिकार सुरक्षित हो, विधानसभा पटल पर नगला क्षेत्र को लंबे समय से निवास कर रहे लोगों को मलिकाना हक दिया जाए। और देश, प्रदेश व समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नगला ,पंतनगर वासियों के अधिकार सुरक्षित किये जाए। उत्तराखंड राज्य की परिकल्पना थी, उत्तराखंड के मूल निवासियों के अधिकार सुरक्षित होंगे। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार में सबसे ज्यादा जिन्हें नुकसान हुआ है या फिर जिनके घर तोड़ दिए गए या फिर तोड़ दिया जाएंगे। नगला वासी 60 ,70, 80 के दशक में उन जगहों पर नगला मै विस्थापित हो चुके थे ।जिन्हें आज सरकार अपना बता रहीहैं। नगला वासी की निगाहें उत्तराखंड सरकार पर हैं ।असमंजस की स्थिति नगला क्षेत्र में बनी हुई है। एक और जहां लोगों के अंदर आक्रोश है। वहीं दूसरी ओर अपने जीवन की महत्वपूर्ण जमा पूंजी व अपने मेहनत के दम पर खड़े किए गए कंक्रीट के मकान उनके दर्द को बाया कर रहे हैं। महिलाएं वह बच्चे पथराई आंखों से अपने टूटे हुए घर को देखकर स्तंभ है। लोगों के अंदर दहशत का माहौल है। उम्मीद की एक किरण धामी सरकार पर है। जो नगला को बचा सकती है।

Hindustan Global Times, Avtar Singh Bisht, journalist from Uttarakhand नगला, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी एवं भारतीय सेना, मैं महत्वपूर्ण भूमिका रही है नगला कवाशियो की ताकि सनत रहे नगला के…

Read More

कत्यूरी सम्राट प्रीतम देव की महारानी जिया का नाम उत्तराखंड की वीर और पौराणिक गाथाओं में सम्मान से लिया जाता है। कत्यूरी राजवंश में माता को जिया कहा जाता है, इसलिए उन्हें जिया रानी कहा जाता है।इतिहासकारों और स्‍थानीय लोगों के मुताबिक जिया रानी धामदेव की मां थी और प्रख्यात उत्तराखंडी लोककथा नायक मालूशाही की दादी थीं। कहा जाता है कि जिया रानी हल्‍द्वानी के रानीबाग में रहीं थीं और उन्होंने यहां अपना बाग सजाया था। जिस कारण इस जगह का नाम रानीबाग पड़ा। जिया रानी पर कई कहावते प्रचलित हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में… रानीबाग में जिया रानी का मंदिर है। माता जिया रानी की गुफा आज भी रानीबाग में स्थित है। मान्‍यता है कि वह गुफा से वह सीधे हरिद्वार निकली थीं। यहां एक विशाल शिला है, जिसे जिया रानी का घाघरा मानकर लोग पूजते हैं। स्‍थानीय परंपराओं के अनुसार माता जिया रानी कत्यूरी वंश की रानी थीं। हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर रानीबाग में कत्यूरी वंश के लोग और सैकड़ों स्‍थानीय लोग अपने परिवार सहित सामूहित पूजा करते हैं। जिसे जागर हैं। उत्तराखंड में जिया रानी की गुफा के बारे में एक किवदंती प्रचलित है। कहा जाता है रानी जिया कत्यूरी राजा पृथ्वीपाल उर्फ प्रीतमदेव की पत्नी थी। वह रानीबाग में चित्रेश्वर महादेव के दर्शन करने आई थीं। रानी जिया बेहद सुंदर थीं। जैसे ही रानी नहाने के लिए नदी पर पहुंचीं तो वहां रुहेलों की सेना ने वहां घेरा डाल दिया। इस दौरान उन्होंने अपने ईष्ट देवताओं का स्मरण किया और गार्गी नदी के पत्थरों में ही समा गईं। नदी के किनारे एक विचित्र रंग की शिला आज भी वहां देखने को मिलती है, जिसे चित्रशिला कहा जाता है। जिया रानी को कुमाऊं में न्याय की देवी के रूप में पूजा जाता है। इतना ही नहीं जिया रानी कई कुलों की आराध्‍य देवी भी हैं।क्या है माता जिया रानी का असली नाम?जिया रानी का वास्तविक नाम मौला देवी था, जो हरिद्वार के राजा अमरदेव पुंडीर की पुत्री थीं। मौला देवी राजा प्रीतमपाल की दूसरी रानी थीं। मौला देवी को राजमाता का दर्जा मिला और उस क्षेत्र में माता को जिया कहा जाता था, इसलिए उनका नाम जिया रानी पड़ गया।क्‍यों कहलाई कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई?माता जिया रानी को कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि माता जिया रानी ने रोहिलो और तुर्कों के आक्रमण के दौरान कुमाऊं की रक्षा की थी और युद्ध में बलिदानी हुईं थी।

स्‍थानीय लोगों का मानना है कि युद्ध के समय जिया रानी ने हीरे-मोती जड़ित लहंगा पहना था। जो बाद में पत्थर बन गया। ये पत्थर आज भी है रानीबाग में…

Read More

उत्तराखंड के 49 विकासखंडों में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के पहले चरण में 68% मतदान हुआ। कई बूथों पर रात तक मतदाताओं की कतार लगी थी। इस दौरान कुल 63 फीसदी पुरुष और 73 फीसदी महिला मतदाताओं ने मतदान किया।

बृहस्पतिवार को त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के पहले चरण का मतदान सुबह ठीक आठ बजे शुरू हो गया। शुरुआत के दो घंटे तो मतदान कुछ हल्का रहा, लेकिन दिन चढ़ने के […]

रुद्रपुर से अवैध गतिविधियों पर तगड़ा प्रहार, पंचायत चुनाव से पहले अवैध शराब और हथियार तस्करी पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई

रुद्रपुर, 24 जुलाई – आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के पहले चरण से ठीक पहले उधमसिंह नगर जिले की पुलिस ने एक के बाद एक दो बड़ी कार्रवाइयों को अंजाम देकर […]

“शिवबारात से लेकर सपना चौधरी तक – उधम सिंह नगर में पंचायत चुनाव बना सियासी तमाशा!” ✍️ विशेष रिपोर्ट – अवतार सिंह बिष्ट

उत्तराखंड रद्रपुर | सावन का महीना, शिवरात्रि का उत्सव और राजनीति का चरम – उधम सिंह नगर के पंचायत चुनाव इस बार सिर्फ वोट नहीं, मनोरंजन, साजिश, तंज और तमाशे […]

उत्तराखण्ड क्रांति दल : राज्य निर्माण आंदोलन की रीढ़, लेकिन संघर्षशील भविष्य उत्तराखण्ड क्रांति दल (यूकेडी), उत्तराखण्ड का एक ऐसा क्षेत्रीय राजनीतिक संगठन है जिसने राज्य निर्माण की चिंगारी को सुलगाया और उसे जन आंदोलन में बदल दिया। 26 जुलाई 1979 को कुमाऊं विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. डी.डी. पन्त की अध्यक्षता में नैनीताल में आयोजित एक ऐतिहासिक बैठक में इस दल की नींव रखी गई। इस बैठक में इंद्रमणि बडोनी, बिपिन चंद्र त्रिपाठी, काशी सिंह ऐरी जैसे दूरदर्शी नेता भी उपस्थित थे, जिन्होंने एक अलग पहाड़ी राज्य के स्वप्न को मूर्त रूप देने के लिए जीवन समर्पित किया। यूकेडी की स्थापना उत्तर प्रदेश की उपेक्षा और पर्वतीय क्षेत्रों की अनदेखी के विरोध में हुई थी। इसका प्रमुख उद्देश्य था – एक अलग राज्य का गठन जो स्थानीय जनता द्वारा शासित हो, ताकि पर्वतीय जनजीवन, संस्कृति, पर्यावरण और सामाजिक न्याय की रक्षा की जा सके। इस दल ने ‘क्षेत्रवाद’, ‘धर्मनिरपेक्षता’, ‘लोकतांत्रिक समाजवाद’ और ‘नागरिक राष्ट्रवाद’ जैसी विचारधाराओं को अपनाते हुए पर्वतीय जनमानस को संगठित किया। 1980 और 1990 के दशक में उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन का सबसे मुखर चेहरा बनकर उभरा यूकेडी, निरंतर सत्याग्रह, प्रदर्शन और जनजागरण अभियानों के माध्यम से सरकारों पर दबाव बनाता रहा। अंततः 9 नवम्बर 2000 को उत्तराखंड राज्य का गठन हुआ, जिसे यूकेडी की ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में देखा जाता है। हालांकि, राज्य गठन के बाद यूकेडी ने 2002 के विधानसभा चुनावों में 4 सीटें जीतकर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज की, परंतु समय के साथ यह दल आंतरिक गुटबाजी, नेतृत्व संकट और संगठनात्मक शिथिलता का शिकार होता चला गया। राष्ट्रीय दलों – कांग्रेस और भाजपा – के संसाधन और संगठनात्मक प्रभुत्व ने यूकेडी को हाशिये पर धकेल दिया। परिणामस्वरूप, आज यह दल उत्तराखण्ड विधानसभा में एक भी सीट नहीं रखता। फिर भी यूकेडी की प्रासंगिकता खत्म नहीं हुई है। यह आज भी क्षेत्रीय अस्मिता, पलायन, बेरोजगारी, स्थानीय अधिकार और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दों पर मुखर है। यह पार्टी उत्तराखण्डी नागरिकता को समावेशी रूप में परिभाषित करती है, जातिवाद से दूर रहकर सभी स्थानीयों के हित की बात करती है – यह इसे वामपंथी राष्ट्रवादी दलों जैसे स्कॉटिश नेशनल पार्टी से जोड़ती है, हालांकि यूकेडी की नीति पूर्णतः संविधान सम्मत और गैर-अलगाववादी रही है। आज जब उत्तराखण्ड को बने 25 साल पूरे हो चुके हैं, यूकेडी के पास फिर से एक अवसर है – लोगों को यह बताने का कि जो सपना राज्य गठन के समय देखा गया था, वह अभी अधूरा है, और उसकी पूर्ति के लिए एक सशक्त क्षेत्रीय आवाज की जरूरत है। अगर यूकेडी आत्मावलोकन कर संगठन को एकजुट करे और अपनी ऐतिहासिक भूमिका को जनमानस तक पहुंचाए, तो यह दल भविष्य में भी उत्तराखण्ड की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।

1979 को कुमाऊं विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. डीडी पन्त की अध्यक्षता में नैनीताल में एक सभा हुयी थी. इस सभा में बिपिन चंद्र त्रिपाठी, इंद्रमणि बडोनी और काशी सिंह […]

वर्तमान समय में राजनीति एक ऐसा खेल हो चुका है कि देश में संकट के समय भी मौका तलाशने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ जाती। एक के लिए संकट का समय दूसरे के लिए अवसर का वक्त बन जाता है।

यह बात हम इसलिए कह रहे हैं क्यों कि जगदीप धनखड़ के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफे से ऐसा ही एक मौका विपक्ष को हाथ लगा है।✍️ अवतार सिंह बिष्ट, संवाददाता,हिंदुस्तान […]

विहार के पटना स्थित पारस अस्पताल में भर्ती गैंगस्टर चंदन मिश्रा की हत्या का मामला चर्चा में बना हुआ है. इस हत्याकांड में पुलिस रिमांड पर लिए गए शूटर तौसीफ बादशाह ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं.

सूत्रों के मतुाबिक, शूटर्स ने अस्पताल में भर्ती चंदन मिश्रा को 28 गोलियां मारी थीं. पुरुलिया जेल में बंद शेरू सिंह ने चंदन मिश्रा की हत्या की सुपारी दी थी. […]

गुजरात ATS ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अल-कायदा से जुड़े चार आतंकियों को गिरफ्तार किया है। ATS ने इनकी तस्वीरें भी सार्वजनिक कर दी हैं। न्यूज एजेंसी ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, ये सभी आतंकी AQIS (अलकायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट) से जुड़े हुए हैं।

जल्द होगी प्रेस कॉन्फ्रेंस गुजरात ATS के डीआईजी सुनील जोशी ने बताया कि फिलहाल मामले की जांच चल रही है और एजेंसी जल्द ही एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके पूरी जानकारी […]

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रक्षा, व्यापार और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को विस्तार देने के लिए बुधवार को ब्रिटेन की अपनी दो दिवसीय यात्रा शुरू की।

पीएम मोदी का लंदन में भव्य स्वागत हुआ। इस यात्रा के दौरान भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को औपचारिक रूप दिया जाना है।✍️ अवतार सिंह बिष्ट, संवाददाता,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स/उत्तराखंड राज्य […]

सावन का पावन माह चल रहा है। शिवालय में भक्तों की लंबी-लंबी कतारें हैं तो ‘हर हर महादेव’ की गूंज चहुंओर है। देश में ऐसे कई मंदिर हैं, जो भक्तों के लिए बेहद खास और रहस्य से भरे हुए हैं।

इन्हीं में शामिल है, उत्तराखंड का ‘पंच केदार’ मंदिर। यहां बसे पंच केदार मंदिर में केदारनाथ, मद्महेश्वरनाथ, तुंगनाथ, रुद्रनाथ और कल्पेश्वरनाथ न केवल आध्यात्मिक महत्व रखते हैं, बल्कि यहां प्राकृतिक […]

2025: इस वर्ष सावन अमावस्या का शुभ पर्व 24 जुलाई, गुरुवार को मनाया जाएगा। इसे हरियाली अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन का विशेष महत्व पितरों की शांति और कृपा प्राप्त करने के लिए होता है।

प्रातः स्नान करके व्यक्ति पितरों को प्रसन्न करने हेतु तर्पण, दान, और श्राद्ध आदि करता है। माना जाता है कि इन कर्मों से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है […]