

बिहार के मुंगेर जिले से एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने न केवल पुलिस जांच प्रक्रिया बल्कि पॉक्सो कानून के संभावित दुरुपयोग पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। धरहरा थाना क्षेत्र की एक युवती ने देश के राष्ट्रपति, राज्यपाल और पटना हाईकोर्ट को पत्र लिखकर न्याय की मांग की है और अपने ही माता-पिता समेत कई लोगों पर झूठा केस गढ़ने का आरोप लगाया है।
युवती का दावा है कि जब वह नाबालिग थी, तब उसे साजिश के तहत ‘कथित पीड़िता’ बनाकर एक झूठे पॉक्सो केस में फंसा दिया गया। उसने आरोप लगाया कि इस पूरे षड्यंत्र के पीछे सरकारी मुआवजे की राशि हासिल करना मकसद था। युवती के अनुसार, उसके परिवार और कुछ करीबी लोगों ने मिलकर उसे एक “मोहरा” बनाया और 4 लाख रुपये के मुआवजे के लिए यह झूठा मामला तैयार किया।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी परिषद उत्तराखंड)
युवती ने अपने आवेदन में इस मुआवजे की रकम को “खून का पैसा” करार देते हुए सरकार को वापस लौटाने की इच्छा जताई है। उसने यह भी कहा कि इस मामले में आरोपी बनाए गए रवि कुमार को अदालत द्वारा उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है, जबकि वह पूरी तरह निर्दोष है और उसे फंसाया गया है।
युवती के मुताबिक, नाबालिग रहते हुए उसने पुलिस और परिवार के दबाव में आकर अदालत में झूठी गवाही दी थी। उसने धरहरा और जमालपुर थाने के तत्कालीन पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उसे करीब 30 घंटे तक अवैध हिरासत में रखा गया और मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना देकर सीआरपीसी की धारा 164 के तहत झूठा बयान दिलवाया गया।
मामले में युवती ने निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) के गठन की मांग की है। साथ ही उसने 7 सितंबर 2022 के जमालपुर थाना के सीसीटीवी फुटेज की जांच कराने की भी अपील की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके। युवती ने जांच में लापरवाही बरतने और गलत चार्जशीट दाखिल करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग भी की है।
युवती ने अपने पत्र में यह भी खुलासा किया है कि उसके माता-पिता ने उसकी शादी महज 14 साल की उम्र में कर दी थी और वर्तमान में वह एक बच्चे की मां है। उसने बताया कि 1 अप्रैल 2026 को बालिग होने के बाद उसने यह कदम उठाया, ताकि बिना किसी दबाव के अपनी बात खुलकर रख सके।
इस पूरे मामले पर मुंगेर सिविल कोर्ट के अधिवक्ता ओम प्रकाश ने बताया कि युवती ने जिला प्रशासन से लेकर राष्ट्रपति, राज्यपाल, हाईकोर्ट और पुलिस मुख्यालय तक अपनी बात पहुंचाई है। आवेदन में युवती ने स्पष्ट लिखा है कि वह आरोपी को जानती तक नहीं है और उसे झूठे केस में फंसाया गया है। साथ ही उसने मुआवजे की राशि वापस करने और निर्दोष को न्याय दिलाने की मांग की है।
फिलहाल यह मामला पटना हाईकोर्ट में विचाराधीन है। यदि युवती के आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो यह मामला न केवल न्याय व्यवस्था बल्कि पॉक्सो जैसे संवेदनशील कानून के दुरुपयोग पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर सकता




