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शर्वरी का सपना अब हकीकत में बदल गया है, क्योंकि उन्हें प्रसिद्ध फिल्म निर्माता सूरज बड़जात्या की आगामी फिल्म ‘ये प्रेम मोल लिया’ में मुख्य अभिनेत्री के रूप में साइन किया गया है।

बेंगलुरु में एक प्यार भरे रिश्तें का इतना दर्दनाक अंत हुआ कि जिसने सभी को चौंका कर रख दिया। पुलिस ने एक महिला को अपने ही प्रेमी की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया है जिसका खुलासा 21 अप्रैल को हुआ।

मुआवजे के लालच में रचा गया झूठा पॉक्सो केस? युवती ने राष्ट्रपति से लगाई न्याय की गुहार

केदरानाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुल गए हैं. बाबा के दर्शन का लंबा इंतजार अब खत्म हो गया है.22 अप्रैल को शुभ मुहूर्त में केदारनाथ धाम के कपाट खोले गए. सभी श्रद्धालु अब बाबा केदार के दर्शन कर सकेंगे.

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देहरादून : वीएमएसबी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का नवम दीक्षांत समारोह सम्पन्न, 37 पदक और 14 पीएचडी उपाधियां प्रदान

देहरादून, 22 अप्रैल 2026। वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, देहरादून का नवम दीक्षांत…

रुद्रपुर में पांच दिवसीय ऑल इंडिया ओपन शतरंज प्रतियोगिता का शुभारंभ, देशभर के 260 खिलाड़ी ले रहे हिस्सा

रुद्रपुर, 22 अप्रैल 2026। ऑल इंडिया शतरंज फेडरेशन एवं उत्तराखंड शतरंज फेडरेशन के तत्वावधान में…

पानीपत। आसाराम बापू केस के मुख्य गवाह रहे महेंद्र चावला, उसके भाई देवेंद्र व भतीजे रामप्रसाद को 70 लाख रुपये की ठगी के आरोप के मामले में सोमवार को कोर्ट में पेश किया।

कोर्ट ने तीन आरोपितों को तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा है। पुलिस रिमांड…

खटीमा। चकरपुर के एक इंटर कालेज के खेल शिक्षक द्वारा छात्रा की अश्लील वीडियो बनाने से लोग भड़क उठे। इसके विरोध में उन्होंने स्कूल पहुंचकर खासा हंगामा काटने के साथ खंड शिक्षाधिकारी भानुप्रताप कुशवाहा का घेराव कर उन्हें जमकर खरी-खोटी सुनाई।

मौके पर पहुंची पुलिस लोगों के चुंगल से बचाकर शिक्षक को कोतवाली ले आयी। वहीं…

दुनिया

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शर्वरी का सपना अब हकीकत में बदल गया है, क्योंकि उन्हें प्रसिद्ध फिल्म निर्माता सूरज बड़जात्या की आगामी फिल्म ‘ये प्रेम मोल लिया’ में मुख्य अभिनेत्री के रूप में साइन किया गया है।

बेंगलुरु में एक प्यार भरे रिश्तें का इतना दर्दनाक अंत हुआ कि जिसने सभी को चौंका कर रख दिया। पुलिस ने एक महिला को अपने ही प्रेमी की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया है जिसका खुलासा 21 अप्रैल को हुआ।

मुआवजे के लालच में रचा गया झूठा पॉक्सो केस? युवती ने राष्ट्रपति से लगाई न्याय की गुहार

केदरानाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुल गए हैं. बाबा के दर्शन का लंबा इंतजार अब खत्म हो गया है.22 अप्रैल को शुभ मुहूर्त में केदारनाथ धाम के कपाट खोले गए. सभी श्रद्धालु अब बाबा केदार के दर्शन कर सकेंगे.

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केदरानाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुल गए हैं. बाबा के दर्शन का लंबा इंतजार अब खत्म हो गया है.22 अप्रैल को शुभ मुहूर्त में केदारनाथ धाम के कपाट खोले गए. सभी श्रद्धालु अब बाबा केदार के दर्शन कर सकेंगे.

इस दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपनी पत्नी गीता पुष्कर धामी के साथ बाबा के दर्शन के लिए केदारनाथ धाम…

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मेष दिन ऊर्जा से भरपूर रहेगा। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, जिन्हें सफलतापूर्वक निभाएंगे। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, लेकिन खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी है। परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलेगा।

प्रेम जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर ( अध्यक्ष:उत्तराखंड…

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रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर)। पंतनगर सिडकुल में वोल्टास कंपनी के असिस्टेंट मैनेजर ने मंगलवार को पत्नी से वीडियो काल पर बात करने के बाद फांसी लगा ली। पुलिस के अनुसार पति से हुए विवाद के बाद पत्नी अपने बच्चों के साथ मायके चली गई थी।

प्रवचन से नहीं, डर से याद आया भगवान—उत्तराखंड ड्राइवर ने मार ली बाज़ी!”

‘भूत बंगला’ की चमक फीकी! 100 करोड़ के बावजूद दर्शकों ने किया नकार, मंडे टेस्ट में गिरा कलेक्शन

उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा का शुभारंभ हो चुका है. गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुल चुके हैं, जबकि केदारनाथ धाम के कपाट भी शीघ्र खुलने जा रहे हैं.

देहरादून : वीएमएसबी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का नवम दीक्षांत समारोह सम्पन्न, 37 पदक और 14 पीएचडी उपाधियां प्रदान

देहरादून, 22 अप्रैल 2026। वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, देहरादून का नवम दीक्षांत समारोह बुधवार को भव्य एवं गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान…

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रुद्रपुर में पांच दिवसीय ऑल इंडिया ओपन शतरंज प्रतियोगिता का शुभारंभ, देशभर के 260 खिलाड़ी ले रहे हिस्सा

रुद्रपुर, 22 अप्रैल 2026। ऑल इंडिया शतरंज फेडरेशन एवं उत्तराखंड शतरंज फेडरेशन के तत्वावधान में देवभूमि शतरंज एसोसिएशन द्वारा भारतीयम इंटरनेशनल स्कूल, लालपुर रुद्रपुर में आयोजित पांच दिवसीय स्वर्गीय श्री…

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पानीपत। आसाराम बापू केस के मुख्य गवाह रहे महेंद्र चावला, उसके भाई देवेंद्र व भतीजे रामप्रसाद को 70 लाख रुपये की ठगी के आरोप के मामले में सोमवार को कोर्ट में पेश किया।

कोर्ट ने तीन आरोपितों को तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा है। पुलिस रिमांड के दौरान पांच राज्यों में दबिश देकर पूछताछ करेगी। कोर्ट की अगली तारीख 23 अप्रैल…

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खटीमा। चकरपुर के एक इंटर कालेज के खेल शिक्षक द्वारा छात्रा की अश्लील वीडियो बनाने से लोग भड़क उठे। इसके विरोध में उन्होंने स्कूल पहुंचकर खासा हंगामा काटने के साथ खंड शिक्षाधिकारी भानुप्रताप कुशवाहा का घेराव कर उन्हें जमकर खरी-खोटी सुनाई।

मौके पर पहुंची पुलिस लोगों के चुंगल से बचाकर शिक्षक को कोतवाली ले आयी। वहीं आरोपित शिक्षक को निलंबित कर बीईओ को रुद्रपुर कार्यालय संबंद्ध कर दिया गया है। अवतार…

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उच्च न्यायालय ने नया नियम हटाया – देशभर के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका सामने आया है। हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने लाखों कर्मचारियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

नए नियम के तहत अब कर्मचारियों को 60 साल नहीं बल्कि 55 साल की उम्र में ही रिटायर किया जाएगा। कोर्ट का कहना है कि प्रशासनिक ढांचे में युवाओं को…

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हिन्दू धर्मग्रंथों में चार युग की संकल्पना की गई है। ये हैं- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग। माना जाता है कि हर युग में मनुष्आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ?

सतयुग

चारों युगों में से सबसे पहला सतयुग है। वह युग जहां पाप, अधर्म, अन्याय और झूठ के लिए कोई जगह नहीं होता है, सतयुग कहा गया है। पुराणों के अनुसार, सतयुग का प्रारंभ कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। ग्रंथों में इस युग की अवधि लगभग 17 लाख 28 हजार वर्ष बताई गई है।

इस युग में देवी-देवता पृथ्वी पर मनुष्य की भांति ही रहते थे। कहते हैं, उनकी आयु लगभग 2 लाख वर्ष होती थी। पुष्कर इस युग का सबसे महान तीर्थ था। इस युग में भगवान विष्णु के 10 मुख्य अवतारों में से मत्स्य, कच्छप, वराह और नरसिंह अवतार हुए थे।

त्रेतायुग

ग्रंथों में त्रेतायुग की अवधि लगभग 12 लाख 28 हजार मानी गई है। इस युग की शुरुआत वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से हुई थी। इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 10,000 वर्ष हुआ करती थी। कहते हैं इस युग सबसे महान तीर्थ नैमिषारण्य था। इस युग में अधर्म का नाश करने के लिए भगवान विष्णु के श्री राम, वामन, परशुराम के अवतार हुए थे।

द्वापरयुग

पुराणों के मुताबिक, द्वापर युग की अवधि लगभग 8 लाख 64 हजार है। यह युग माघ माह के कृष्ण अमावस्या से शुरू हुआ था। हिंदू धर्म ग्रंथों में इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 1000 वर्ष बताई गई है। इस युग का सर्वश्रेष्ठ तीर्थ कुरुक्षेत्र को माना गया है। द्वापर युग में भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण ने धरती पर जन्म लेकर कंस जैसे दुष्टों का संहार किया था।

कलियुग

वर्तमान युग यानी कलियुग की अवधि तीनों युगों में सबसे कम है। इस युग की अवधि 4 लाख 32 हजार वर्ष बताई जाती है। कलियुग की शुरुआत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से मानी जाती है। यह तिथि इस साल सोमवार 30 सितंबर, 2024 को पड़ रही है।

हैरत की बात है कि इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 100 वर्ष ही रह गई है। वहीं, गंगा नदी को कलियुग का सबसे पवित्र तीर्थ स्थान बताया गया है। इस युग में भगवान विष्णु के 9वें अवतार भगवान बुद्ध का जन्म हुआ। भगवान विष्णु का 10वां अवतार कल्कि के रूप में कलियुग के अंत में होगा।

कब खत्म होगा कलियुग?

भारतीय काल-निर्णय के अनुसार कलियुग का अंत होने में अभी 4 लाख 26 हजार 875 साल बाकी हैं। इस समय कलियुग का प्रथम चरण चल रहा है और कलियुग के मात्र 5 हजार 125 साल हुए हैं। बता दें कि कलयुग के कुल अवधि 4 लाख 32 हजार साल के बताई गई है।य की बनावट से लेकर उसके व्यवहार और उम्र में कुछ परिवर्तन आए हैं।

   आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ? सतयुग…

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ताकि सनत रहे नगला पंतनगर, 1960 के दशक से लेकर 1980 तक लोगों की बसायत हुई नगला में, अवगत कराते हुए की नगला में निवास करने वाले लोगों में भारतीय सेवा की तरफ से द्वितीय विश्व युद्ध 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। वही कारगिल युद्ध में भीनगला के लोगों ने भारतीय सेना की तरफ से प्रतिभागी किया। जिसमें 1965 और 70 के बीच नगला में निवासरत, स्वर्गीय सूबेदार मेजर खड़क सिंह बिष्ट जिन्होंने19 71,1965 और 1962 की युद्ध में भारतीय सेना में प्रतिभा किया, नगला बायपास निवासी स्वर्गीय लेस नायक प्रेमचंद पांडे, जो की 1965 से नगला में निवास कर रहे हैं ।द्वितीय विश्व युद्ध 1962 और 1965 की लड़ाई में छह माह तक चीन में कैद रहे.। स्वर्गीय हवलदार मेजर धर्म सिंह का परिवार नगला में 1972 से निवास कर रहे हैं,। 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए भारतीय सेना की तरफ से लड़ाई लड़ी। स्वर्गीय सूबेदार आलम सिंह बिष्ट 1982 से नगला में निवासरत 1962 1965 1971 में भारतीय सेना की तरफ से युद्ध में हिस्सा लिया। कर्नल प्रताप सिंह, कारगिल युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। बोफोर्स तोप एवं रडार सिस्टम का पूर्ण रूप से प्रतिनिधित्व किया जिन्होंने कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई। राजस्थान बॉर्डर पर अपना एक पाव गवा चुके हैं। सूबेदार आलम सिंह के नाती वर्तमान में आर्मी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर एनडीए रजत बिष्ट S/0 नंदन सिंह बिष्ट के दो पुत्र एनडीए क्वालीफाई करने के उपरांत थल सेना में लेफ्टिनेंट एवं जल सेना में कैप्टन उदित बिष्ट अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्वर्गीय इंदर सिंह थापा 1965 1971 की लड़ाई में वही उनके पुत्र लक्ष्मण सिंह थापा भारतीय सेना से हाल फिलहाल रिटायर हुए हैं। त्रिलोक सिंह जिन्होंने भारतीय सेवा में अपने 8 साल दिए हैं। स्वर्गीय भीम सिंह बिष्ट पैरा कमांडो, आदि कई अन्य लोगों ने जो नगला क्षेत्र में निवास कर रहे हैं देश के लिए बहुत कुछ किया है, वहीं अगर उत्तराखंड राज्य आंदोलन की बात की जाए ,नगला क्षेत्र से अवतार सिंह बिष्ट, हरीश जोशी, एवं उनके परिवार के दो अन्य सदस्य, जगदीश बोहरा, प्रकाश पुजारी, जो की चिन्हित राज्य आंदोलनकारी हैं। परिवार के साथ नगला में 1976 से निवास करते हैं,। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ, उधम सिंह नगर को उत्तराखंड में मिलने के लिए 24,36 व 72 घंटे का जाम और उत्तराखंड राज्य आंदोलन में अनगिनत आंदोलन इनके द्वारा किए गए। दिल्ली फिरोजशाह कोटला मैदान से इंडिया गेट तक का मार्च पास्ट एवं उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उत्तराखंड राज्य गठन मै महत्वपूर्ण भूमिका इन की रही है। ताकि सनत रहे, उत्तराखंड राज्य आंदोलन में पूरा नगला क्षेत्र एक जुटता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जिसमें सभी जाति धर्म के लोग सम्मिलित होते थे ,मिल का पत्थर साबित हुआ था। पूरे उधम सिंह नगर में नगला क्षेत्र का जबरदस्त ,,विशेष,, असर देखने को मिलता था । नगला की खबर उधम सिंह नगर की खबर बन जाती थी। जिस नगला क्षेत्र को तोड़ने की चर्चा आजकल चल रही है । नगला वासियों ने देश व प्रदेश को एवं समाज को बहुत कुछ दिया है। आज जब नगला क्षेत्र को तोड़ने की कवायत चल रही है। राजेश शुक्ला पूर्व विधायक के द्वारा सराहनीय कार्य नगला को बचाने के लिए किया जा रहा है। नगला क्षेत्र को तोड़ने के लिए सरकारी महकमा भी कहीं ना कहीं असहज महसूस कर रहा है। हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की तरफ से हम सरकार से मांग करते हैं नगला क्षेत्र के लोगों का एवं नगला मै निवास कर रहे लोगों के अधिकार सुरक्षित हो, विधानसभा पटल पर नगला क्षेत्र को लंबे समय से निवास कर रहे लोगों को मलिकाना हक दिया जाए। और देश, प्रदेश व समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नगला ,पंतनगर वासियों के अधिकार सुरक्षित किये जाए। उत्तराखंड राज्य की परिकल्पना थी, उत्तराखंड के मूल निवासियों के अधिकार सुरक्षित होंगे। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार में सबसे ज्यादा जिन्हें नुकसान हुआ है या फिर जिनके घर तोड़ दिए गए या फिर तोड़ दिया जाएंगे। नगला वासी 60 ,70, 80 के दशक में उन जगहों पर नगला मै विस्थापित हो चुके थे ।जिन्हें आज सरकार अपना बता रहीहैं। नगला वासी की निगाहें उत्तराखंड सरकार पर हैं ।असमंजस की स्थिति नगला क्षेत्र में बनी हुई है। एक और जहां लोगों के अंदर आक्रोश है। वहीं दूसरी ओर अपने जीवन की महत्वपूर्ण जमा पूंजी व अपने मेहनत के दम पर खड़े किए गए कंक्रीट के मकान उनके दर्द को बाया कर रहे हैं। महिलाएं वह बच्चे पथराई आंखों से अपने टूटे हुए घर को देखकर स्तंभ है। लोगों के अंदर दहशत का माहौल है। उम्मीद की एक किरण धामी सरकार पर है। जो नगला को बचा सकती है।

Hindustan Global Times, Avtar Singh Bisht, journalist from Uttarakhand नगला, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी एवं भारतीय सेना, मैं महत्वपूर्ण भूमिका रही है नगला कवाशियो की ताकि सनत रहे नगला के…

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कत्यूरी सम्राट प्रीतम देव की महारानी जिया का नाम उत्तराखंड की वीर और पौराणिक गाथाओं में सम्मान से लिया जाता है। कत्यूरी राजवंश में माता को जिया कहा जाता है, इसलिए उन्हें जिया रानी कहा जाता है।इतिहासकारों और स्‍थानीय लोगों के मुताबिक जिया रानी धामदेव की मां थी और प्रख्यात उत्तराखंडी लोककथा नायक मालूशाही की दादी थीं। कहा जाता है कि जिया रानी हल्‍द्वानी के रानीबाग में रहीं थीं और उन्होंने यहां अपना बाग सजाया था। जिस कारण इस जगह का नाम रानीबाग पड़ा। जिया रानी पर कई कहावते प्रचलित हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में… रानीबाग में जिया रानी का मंदिर है। माता जिया रानी की गुफा आज भी रानीबाग में स्थित है। मान्‍यता है कि वह गुफा से वह सीधे हरिद्वार निकली थीं। यहां एक विशाल शिला है, जिसे जिया रानी का घाघरा मानकर लोग पूजते हैं। स्‍थानीय परंपराओं के अनुसार माता जिया रानी कत्यूरी वंश की रानी थीं। हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर रानीबाग में कत्यूरी वंश के लोग और सैकड़ों स्‍थानीय लोग अपने परिवार सहित सामूहित पूजा करते हैं। जिसे जागर हैं। उत्तराखंड में जिया रानी की गुफा के बारे में एक किवदंती प्रचलित है। कहा जाता है रानी जिया कत्यूरी राजा पृथ्वीपाल उर्फ प्रीतमदेव की पत्नी थी। वह रानीबाग में चित्रेश्वर महादेव के दर्शन करने आई थीं। रानी जिया बेहद सुंदर थीं। जैसे ही रानी नहाने के लिए नदी पर पहुंचीं तो वहां रुहेलों की सेना ने वहां घेरा डाल दिया। इस दौरान उन्होंने अपने ईष्ट देवताओं का स्मरण किया और गार्गी नदी के पत्थरों में ही समा गईं। नदी के किनारे एक विचित्र रंग की शिला आज भी वहां देखने को मिलती है, जिसे चित्रशिला कहा जाता है। जिया रानी को कुमाऊं में न्याय की देवी के रूप में पूजा जाता है। इतना ही नहीं जिया रानी कई कुलों की आराध्‍य देवी भी हैं।क्या है माता जिया रानी का असली नाम?जिया रानी का वास्तविक नाम मौला देवी था, जो हरिद्वार के राजा अमरदेव पुंडीर की पुत्री थीं। मौला देवी राजा प्रीतमपाल की दूसरी रानी थीं। मौला देवी को राजमाता का दर्जा मिला और उस क्षेत्र में माता को जिया कहा जाता था, इसलिए उनका नाम जिया रानी पड़ गया।क्‍यों कहलाई कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई?माता जिया रानी को कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि माता जिया रानी ने रोहिलो और तुर्कों के आक्रमण के दौरान कुमाऊं की रक्षा की थी और युद्ध में बलिदानी हुईं थी।

स्‍थानीय लोगों का मानना है कि युद्ध के समय जिया रानी ने हीरे-मोती जड़ित लहंगा पहना था। जो बाद में पत्थर बन गया। ये पत्थर आज भी है रानीबाग में…

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कै लाश पर्वत केवल एक पर्वत नहीं, बल्कि आध्यात्मिकता, रहस्य और धार्मिक मान्यताओं का संगम है, जो न केवल हिंदू धर्म में, बल्कि बौद्ध धर्म, जैन धर्म और तिब्बती बोन परंपरा में भी समान रूप से पूजनीय है।

तिब्बत क्षेत्र में स्थित इस पर्वत को भगवान शिव का निवास माना जाता है और इसीलिए इसे सबसे पवित्र पर्वतों में गिना जाता है। पाँच वर्षों के अंतराल के बाद, […]

24 July: आज का दिन चंद्रमा तुला राशि में गोचर कर रहा है, जिससे लोगों में संतुलन और सामंजस्य बनाए रखने की भावना प्रबल होगी. गुरुवार के दिन बृहस्पति का प्रभाव भी रहेगा, जिससे शिक्षा, ज्ञान, सलाह और धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी.

ऐसे में कई राशियों के लिए यह दिन सकारात्मक ऊर्जा लेकर आएगा, जबकि कुछ को थोड़ी सावधानी से काम लेना होगा. आइए जानते हैं आपकी राशि के अनुसार आज का […]

भगवान शिव और उनके अस्त्रों की महिमा पू राणिक मान्यताओं के अनुसार, ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर-इन त्रिदेवों का सृष्टि के संचालन में अलग-अलग योगदान है। ब्रह्मा सृजन करते हैं, विष्णु पालन करते हैं, और शिव संहारक के रूप में जाने जाते हैं।

ऋषियों, मुनियों, देवताओं, असुरों और मनुष्यों द्वारा इन त्रिदेवों से वरदान प्राप्त करने की अनेक कथाएं प्राचीन ग्रंथों में मिलती हैं। शिव अपने उदार स्वभाव के लिए विशेष रूप से […]

देहरादून की हलचल से कुछ दूर, क्लेमेंट टाउन में स्थित है एक ऐसी जगह, जहाँ समय ठहर सा जाता है। यहाँ ना कोई राजनीतिक भाषण है, ना कोई भागमभाग। यहाँ सिर्फ है – मौन, मंत्र और ममता। हम बात कर रहे हैं माइंड रोलिंग मॉनेस्ट्री, जिसे आमजन बुद्ध मंदिर के नाम से जानते हैं। यह न केवल उत्तराखंड की आध्यात्मिक धरोहर है, बल्कि विश्व बौद्ध आस्था का एक जीवंत प्रतीक भी है। सन् 1959 के बाद जब तिब्बती धर्मगुरु और साधु भारत आए, तब उन्होंने अपनी परंपराओं को जीवित रखने के लिए देश के विभिन्न कोनों में बौद्ध मठों की स्थापना की। देहरादून का यह मंदिर 1965 में कोएन रिनपोछे और अन्य लामाओं द्वारा स्थापित किया गया। यह बौद्ध धर्म की न्योमा (Nyingma) परंपरा का मुख्य केंद्र है, जो महायान बौद्ध शाखा की सबसे पुरानी परंपरा मानी जाती है। बुद्ध मंदिर का मुख्य स्तूप, जिसकी ऊँचाई करीब 185 फुट है, पूरे भारत में सबसे ऊँचे स्तूपों में गिना जाता है। इसकी दीवारों पर उकेरे गए अष्टधातु चित्र, तिब्बती भित्तिचित्र (Murals), और सोने की परत से ढंकी बुद्ध प्रतिमा इसे नयनाभिराम बनाती है।पांच मंजिला इस संरचना में हर तल पर बुद्ध के जीवन, धर्मचक्र प्रवर्तन, और निर्वाण की कथाएं चित्रित की गई हैं। मंदिर परिसर में फैले बांस के झुरमुट, पुष्पवाटिका, और ध्यान स्थली मन को एक विलक्षण शांति प्रदान q यह मंदिर केवल एक पर्यटक स्थल नहीं, बल्कि एक जीवंत आध्यात्मिक केंद्र है। यहां प्रतिदिन: ध्यान सत्र मंत्र जाप तिब्बती ग्रंथों का पठन बौद्ध दर्शन पर प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यहां आने वाले साधु वर्षों तक रहकर “लुंग” (बौद्ध शास्त्रों का पाठ) और “रिगपा” (बोधि की स्थिति) की साधना करते हैं। — लोक आकर्षण: श्रद्धा और पर्यटन का मिलन बुद्ध मंदिर आम नागरिकों और पर्यटकों के लिए भी एक बड़ा आकर्षण है। मुख्य आकर्षण हैं: विशाल बुद्ध प्रतिमा और स्तूप रंग-बिरंगी प्रार्थना चक्र (Prayer Wheels) शांत उद्यान और कमल-ताल तिब्बती पुस्तकालय और ध्यान कक्ष परिसर में स्थित कैफे और हस्तशिल्प बाजार यहां हर वर्ष हजारों पर्यटक, साधक और विदेशी पर्यवेक्षक आते हैं। विशेष रूप से बुद्ध पूर्णिमा और तिब्बती नववर्ष (लोसर) पर हजारों श्रद्धालु यहां एकत्र होते हैं। शिक्षा और संस्कृति: परंपरा की पाठशाला मंदिर परिसर में स्थित Ngagyur Nyingma College में 300 से अधिक छात्र तिब्बती बौद्ध शास्त्रों, संस्कृत, ध्यान और तंत्र विद्या का अध्ययन करते हैं। यह कॉलेज तिब्बती संस्कृति के संरक्षण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। — देहरादून के लिए गौरव बुद्ध मंदिर ना केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सांस्कृतिक, सामाजिक और पर्यटन की दृष्टि से भी देहरादून की पहचान बन चुका है। क्लेमेंट टाउन के लोग इसे “शांति का द्वार” कहते हैं। जहाँ एक ओर देश के कोने-कोने में धार्मिक स्थलों की भीड़ और विवाद हैं, वहीं देहरादून का यह बुद्ध मंदिर हमें मौन में ध्यान, करुणा में शक्ति, और विनम्रता में क्रांति का संदेश देता है। यह स्थान हर उस व्यक्ति को आमंत्रण देता है जो जीवन की भीड़ में भीतर की शांति की तलाश में है।✍️ अवतार सिंह बिष्ट, संवाददाता,हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स/उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी!

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के क्लेमेंट टाउन क्षेत्र में स्थित है। यह न केवल एक आकर्षक पर्यटन स्थल है, बल्कि आध्यात्मिक साधना और तिब्बती संस्कृति का भी प्रमुख केंद्र है। […]

संपादकीय लेख: “ग्राम स्वराज्य की दिशा में निर्णायक पड़ाव” त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2025 – लोकतंत्र की असली परीक्षा गांवों मेंआपका वोट, आपके गांव का भविष्य”!

उत्तराखंड में आज त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का प्रथम चरण केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र की जड़ों को मजबूती देने वाला महाअभियान है। 49 विकासखंडों में फैले 5823 बूथों […]

संपादकीय लेख: उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रों में पंचायत चुनाव का ‘साड़ी-सूट-शराब’ समीकरण

उत्तराखंड के मैदानी जिलों—विशेषकर ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार और आसपास के इलाकों में पंचायत चुनाव अब लोकतंत्र का त्योहार नहीं, एक खुला बाजार बन चुके हैं। जहाँ मतदाता अपनी नीयत […]

देहरादून में स्वाद का नया केंद्र बना “SWAD” – ग्राफिक एरा के छात्रों की पहली पसंद द्वारा स्मार्ट सिटी में SWAD रेस्टोरेंट की हकीकत: स्वाद से ज्यादा लाल मिर्च की मार अवतार सिंह बिष्ट, विशेष संपादकीय, हिन्दुस्तान ग्लोबल टाइम्स, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी

आज की अपडेट खबर स्मार्ट सिटी में SWAD रेस्टोरेंट की हकीकत: स्वाद से ज्यादा लाल मिर्च की मार देहरादून: जहां एक ओर स्मार्ट सिटी की चमक बढ़ रही है, वहीं […]

संपादकीय लेखपंचायत चुनावों में पारदर्शिता और अनुशासन की मिसाल बनता उधमसिंहनगर प्रशासन

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव लोकतंत्र की नींव माने जाते हैं। यह चुनाव न केवल ग्रामीण भारत की प्रशासनिक दिशा तय करते हैं, बल्कि आम नागरिक को सत्ता की प्रक्रिया में सीधा […]

ठुकराल की जनपथ पर वापसी — सुषमा के समर्थन में जनसैलाब ने बदली चुनावी फिज़ा!त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2025, खानपुर पूर्व सीट विशेष विश्लेषण

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के आखिरी चरण में रुद्रपुर की खानपुर पूर्व जिला पंचायत सीट पर जो सियासी तस्वीर उभरकर सामने आई है, उसने पूरे ऊधमसिंहनगर जिले की चुनावी राजनीति में […]

दिल्ली में उत्तराखंड क्रांति दल की अहम बैठक, त्रिस्तरीय चुनाव में विजयी उम्मीदवारों को सम्मानित करने की बनी रणनीति पंकज सिंह, खटीमा

नई दिल्ली। उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) दिल्ली प्रदेश इकाई की एक महत्वपूर्ण बैठक दिल्ली स्थित अल्मोड़ा भवन में संपन्न हुई, जिसकी अध्यक्षता आईटी प्रकोष्ठ अध्यक्ष पंकज सिंह (फूलैया गांव, खटीमा) […]