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अल्मोड़ा का चितई गोलू देवता मंदिर: जहां स्टाम्प पेपर पर लिखी जाती है फरियाद, न्याय के देवता आज भी सुनते हैं हर पुकार

अल्मोड़ा। देवभूमि उत्तराखंड की पवित्र वादियों में स्थित चितई गोलू देवता मंदिर केवल एक धार्मिक…

विजडम पब्लिक स्कूल की सफलता ने फिर दिखाया मेहनत, अनुशासन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का मॉडल!विजडम पब्लिक स्कूल का बोर्ड परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत, मेधावियों का सम्मान

विजडम पब्लिक स्कूल का बोर्ड परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत, मेधावियों का सम्मानरुद्रपुर। गंगापुर रोड स्थित विजडम…

नितिन चरण वाल्मीकि के आयोग सदस्य बनने पर वाल्मीकि समाज में खुशी की लहर, पूर्व विधायक राजेश शुक्ला का किया भव्य स्वागत

रुद्रपुर। उत्तराखंड सरकार द्वारा भाजपा नेता नितिन चरण वाल्मीकि को उत्तराखंड सफाई कर्मचारी आयोग में…

पूर्व सैनिकों को नगर निगम की सौगात, सैनिक कल्याण परिसर में बनेगा आधुनिक शौचालय

रुद्रपुर। पूर्व सैनिकों की वर्षों पुरानी मांग आखिरकार पूरी होने जा रही है। नगर निगम…

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उत्तराखंड बोर्ड की 10वीं और 12वीं परीक्षाओं में शामिल हुए लाखों विद्यार्थियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है. उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद (UBSE) ने वर्ष 2026 के बोर्ड परिणाम घोषित करने की तैयारियां पूरी कर ली हैं.

भारी बारिश की चेतावनी: अधिकांश राज्यों में भीषण गर्मी पड़ रही है। कई राज्यों में अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो चुका है। वहीं, मौसम विभाग ने कई राज्यों में भारी बारिश की आशंका को देखते हुए अलर्ट जारी किया है।

हल्द्वानी। हल्दूचौड़ स्थित मदरसन कंपनी में बीते दिनों हुए हंगामे का लिंक नोएडा में हुए बवाल से जुड़ता दिखाई दे रहा है।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में जोरदार वोटिंग हुई। राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम मतदाता भी पूछ रहे हैं कि क्या लग रहा है? यहां एंटी इनकंबेंसी दिखती है और घुसपैठ, वोटर लिस्ट से नाम कटने और रोजगार जैसे मुद्दे भी हैं।

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नेत्रदान-महादान: ऊषा अनेजा मृत्यु के बाद भी देंगी रोशनी, दो लोगों के जीवन में जलेगा उम्मीद का दीप

गदरपुर की कुंज विहार कॉलोनी से मानवता, संवेदना और समाज सेवा का एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है। स्वर्गीय श्रीमती…

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पतलोट महाविद्यालय में देवभूमि उद्यमिता योजना का ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजित

पतलोट महाविद्यालय में देवभूमि उद्यमिता योजना का ओरिएंटेशन कार्यक्रम आयोजितनैनीताल। राजकीय महाविद्यालय पतलोट में शुक्रवार को देवभूमि उद्यमिता योजना के…

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उत्तराखंड बोर्ड की 10वीं और 12वीं परीक्षाओं में शामिल हुए लाखों विद्यार्थियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है. उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद (UBSE) ने वर्ष 2026 के बोर्ड परिणाम घोषित करने की तैयारियां पूरी कर ली हैं.

भारी बारिश की चेतावनी: अधिकांश राज्यों में भीषण गर्मी पड़ रही है। कई राज्यों में अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो चुका है। वहीं, मौसम विभाग ने कई राज्यों में भारी बारिश की आशंका को देखते हुए अलर्ट जारी किया है।

परशुराम, भगवान विष्णु के छठवें अवतार हैं, जिन्हें 8 चिरंजीवियों में से भी माना गया है। परशुराम जी का वर्णन रामायण काल से लेकर महाभारत काल में भी मिलता है। आज हम आपको महेंद्रगिरी पर्वत के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे परशुराम जी का निवास स्थान माना जाता है।

नैनीताल उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने किच्छा स्थित ‘प्राग फार्म’ भूमि विवाद से जुड़ी एक याचिका खारिज कर दी है। मैसर्स इको फ्रेंडली फूड प्रोसेसिंग पार्क लिमिटेड एवं अन्य की ओर से दायर इस याचिका में राज्य सरकार से 483.2 एकड़ भूमि पर खड़ी गन्ने की फसल की कटाई की अनुमति देने की मांग की गई थी।

अल्मोड़ा का चितई गोलू देवता मंदिर: जहां स्टाम्प पेपर पर लिखी जाती है फरियाद, न्याय के देवता आज भी सुनते हैं हर पुकार

अल्मोड़ा। देवभूमि उत्तराखंड की पवित्र वादियों में स्थित चितई गोलू देवता मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, न्याय और लोकविश्वास का ऐसा अद्भुत केंद्र है, जिसकी ख्याति देश…

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विजडम पब्लिक स्कूल की सफलता ने फिर दिखाया मेहनत, अनुशासन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का मॉडल!विजडम पब्लिक स्कूल का बोर्ड परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत, मेधावियों का सम्मान

विजडम पब्लिक स्कूल का बोर्ड परीक्षा परिणाम शत-प्रतिशत, मेधावियों का सम्मानरुद्रपुर। गंगापुर रोड स्थित विजडम पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल का उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा 2026 का परिणाम शत-प्रतिशत रहा। इस उपलब्धि…

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नितिन चरण वाल्मीकि के आयोग सदस्य बनने पर वाल्मीकि समाज में खुशी की लहर, पूर्व विधायक राजेश शुक्ला का किया भव्य स्वागत

रुद्रपुर। उत्तराखंड सरकार द्वारा भाजपा नेता नितिन चरण वाल्मीकि को उत्तराखंड सफाई कर्मचारी आयोग में सदस्य नामित किए जाने पर आज वाल्मीकि समाज के सैकड़ों लोग पूर्व विधायक राजेश शुक्ला…

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पूर्व सैनिकों को नगर निगम की सौगात, सैनिक कल्याण परिसर में बनेगा आधुनिक शौचालय

रुद्रपुर। पूर्व सैनिकों की वर्षों पुरानी मांग आखिरकार पूरी होने जा रही है। नगर निगम रुद्रपुर ने सैनिक कल्याण विभाग परिसर में आधुनिक शौचालय निर्माण की सौगात दी है। महापौर…

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उच्च न्यायालय ने नया नियम हटाया – देशभर के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका सामने आया है। हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने लाखों कर्मचारियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

नए नियम के तहत अब कर्मचारियों को 60 साल नहीं बल्कि 55 साल की उम्र में ही रिटायर किया जाएगा। कोर्ट का कहना है कि प्रशासनिक ढांचे में युवाओं को…

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हिन्दू धर्मग्रंथों में चार युग की संकल्पना की गई है। ये हैं- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग। माना जाता है कि हर युग में मनुष्आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ?

सतयुग

चारों युगों में से सबसे पहला सतयुग है। वह युग जहां पाप, अधर्म, अन्याय और झूठ के लिए कोई जगह नहीं होता है, सतयुग कहा गया है। पुराणों के अनुसार, सतयुग का प्रारंभ कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। ग्रंथों में इस युग की अवधि लगभग 17 लाख 28 हजार वर्ष बताई गई है।

इस युग में देवी-देवता पृथ्वी पर मनुष्य की भांति ही रहते थे। कहते हैं, उनकी आयु लगभग 2 लाख वर्ष होती थी। पुष्कर इस युग का सबसे महान तीर्थ था। इस युग में भगवान विष्णु के 10 मुख्य अवतारों में से मत्स्य, कच्छप, वराह और नरसिंह अवतार हुए थे।

त्रेतायुग

ग्रंथों में त्रेतायुग की अवधि लगभग 12 लाख 28 हजार मानी गई है। इस युग की शुरुआत वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से हुई थी। इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 10,000 वर्ष हुआ करती थी। कहते हैं इस युग सबसे महान तीर्थ नैमिषारण्य था। इस युग में अधर्म का नाश करने के लिए भगवान विष्णु के श्री राम, वामन, परशुराम के अवतार हुए थे।

द्वापरयुग

पुराणों के मुताबिक, द्वापर युग की अवधि लगभग 8 लाख 64 हजार है। यह युग माघ माह के कृष्ण अमावस्या से शुरू हुआ था। हिंदू धर्म ग्रंथों में इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 1000 वर्ष बताई गई है। इस युग का सर्वश्रेष्ठ तीर्थ कुरुक्षेत्र को माना गया है। द्वापर युग में भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण ने धरती पर जन्म लेकर कंस जैसे दुष्टों का संहार किया था।

कलियुग

वर्तमान युग यानी कलियुग की अवधि तीनों युगों में सबसे कम है। इस युग की अवधि 4 लाख 32 हजार वर्ष बताई जाती है। कलियुग की शुरुआत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से मानी जाती है। यह तिथि इस साल सोमवार 30 सितंबर, 2024 को पड़ रही है।

हैरत की बात है कि इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 100 वर्ष ही रह गई है। वहीं, गंगा नदी को कलियुग का सबसे पवित्र तीर्थ स्थान बताया गया है। इस युग में भगवान विष्णु के 9वें अवतार भगवान बुद्ध का जन्म हुआ। भगवान विष्णु का 10वां अवतार कल्कि के रूप में कलियुग के अंत में होगा।

कब खत्म होगा कलियुग?

भारतीय काल-निर्णय के अनुसार कलियुग का अंत होने में अभी 4 लाख 26 हजार 875 साल बाकी हैं। इस समय कलियुग का प्रथम चरण चल रहा है और कलियुग के मात्र 5 हजार 125 साल हुए हैं। बता दें कि कलयुग के कुल अवधि 4 लाख 32 हजार साल के बताई गई है।य की बनावट से लेकर उसके व्यवहार और उम्र में कुछ परिवर्तन आए हैं।

   आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ? सतयुग…

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ताकि सनत रहे नगला पंतनगर, 1960 के दशक से लेकर 1980 तक लोगों की बसायत हुई नगला में, अवगत कराते हुए की नगला में निवास करने वाले लोगों में भारतीय सेवा की तरफ से द्वितीय विश्व युद्ध 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। वही कारगिल युद्ध में भीनगला के लोगों ने भारतीय सेना की तरफ से प्रतिभागी किया। जिसमें 1965 और 70 के बीच नगला में निवासरत, स्वर्गीय सूबेदार मेजर खड़क सिंह बिष्ट जिन्होंने19 71,1965 और 1962 की युद्ध में भारतीय सेना में प्रतिभा किया, नगला बायपास निवासी स्वर्गीय लेस नायक प्रेमचंद पांडे, जो की 1965 से नगला में निवास कर रहे हैं ।द्वितीय विश्व युद्ध 1962 और 1965 की लड़ाई में छह माह तक चीन में कैद रहे.। स्वर्गीय हवलदार मेजर धर्म सिंह का परिवार नगला में 1972 से निवास कर रहे हैं,। 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए भारतीय सेना की तरफ से लड़ाई लड़ी। स्वर्गीय सूबेदार आलम सिंह बिष्ट 1982 से नगला में निवासरत 1962 1965 1971 में भारतीय सेना की तरफ से युद्ध में हिस्सा लिया। कर्नल प्रताप सिंह, कारगिल युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। बोफोर्स तोप एवं रडार सिस्टम का पूर्ण रूप से प्रतिनिधित्व किया जिन्होंने कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई। राजस्थान बॉर्डर पर अपना एक पाव गवा चुके हैं। सूबेदार आलम सिंह के नाती वर्तमान में आर्मी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर एनडीए रजत बिष्ट S/0 नंदन सिंह बिष्ट के दो पुत्र एनडीए क्वालीफाई करने के उपरांत थल सेना में लेफ्टिनेंट एवं जल सेना में कैप्टन उदित बिष्ट अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्वर्गीय इंदर सिंह थापा 1965 1971 की लड़ाई में वही उनके पुत्र लक्ष्मण सिंह थापा भारतीय सेना से हाल फिलहाल रिटायर हुए हैं। त्रिलोक सिंह जिन्होंने भारतीय सेवा में अपने 8 साल दिए हैं। स्वर्गीय भीम सिंह बिष्ट पैरा कमांडो, आदि कई अन्य लोगों ने जो नगला क्षेत्र में निवास कर रहे हैं देश के लिए बहुत कुछ किया है, वहीं अगर उत्तराखंड राज्य आंदोलन की बात की जाए ,नगला क्षेत्र से अवतार सिंह बिष्ट, हरीश जोशी, एवं उनके परिवार के दो अन्य सदस्य, जगदीश बोहरा, प्रकाश पुजारी, जो की चिन्हित राज्य आंदोलनकारी हैं। परिवार के साथ नगला में 1976 से निवास करते हैं,। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ, उधम सिंह नगर को उत्तराखंड में मिलने के लिए 24,36 व 72 घंटे का जाम और उत्तराखंड राज्य आंदोलन में अनगिनत आंदोलन इनके द्वारा किए गए। दिल्ली फिरोजशाह कोटला मैदान से इंडिया गेट तक का मार्च पास्ट एवं उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उत्तराखंड राज्य गठन मै महत्वपूर्ण भूमिका इन की रही है। ताकि सनत रहे, उत्तराखंड राज्य आंदोलन में पूरा नगला क्षेत्र एक जुटता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जिसमें सभी जाति धर्म के लोग सम्मिलित होते थे ,मिल का पत्थर साबित हुआ था। पूरे उधम सिंह नगर में नगला क्षेत्र का जबरदस्त ,,विशेष,, असर देखने को मिलता था । नगला की खबर उधम सिंह नगर की खबर बन जाती थी। जिस नगला क्षेत्र को तोड़ने की चर्चा आजकल चल रही है । नगला वासियों ने देश व प्रदेश को एवं समाज को बहुत कुछ दिया है। आज जब नगला क्षेत्र को तोड़ने की कवायत चल रही है। राजेश शुक्ला पूर्व विधायक के द्वारा सराहनीय कार्य नगला को बचाने के लिए किया जा रहा है। नगला क्षेत्र को तोड़ने के लिए सरकारी महकमा भी कहीं ना कहीं असहज महसूस कर रहा है। हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की तरफ से हम सरकार से मांग करते हैं नगला क्षेत्र के लोगों का एवं नगला मै निवास कर रहे लोगों के अधिकार सुरक्षित हो, विधानसभा पटल पर नगला क्षेत्र को लंबे समय से निवास कर रहे लोगों को मलिकाना हक दिया जाए। और देश, प्रदेश व समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नगला ,पंतनगर वासियों के अधिकार सुरक्षित किये जाए। उत्तराखंड राज्य की परिकल्पना थी, उत्तराखंड के मूल निवासियों के अधिकार सुरक्षित होंगे। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार में सबसे ज्यादा जिन्हें नुकसान हुआ है या फिर जिनके घर तोड़ दिए गए या फिर तोड़ दिया जाएंगे। नगला वासी 60 ,70, 80 के दशक में उन जगहों पर नगला मै विस्थापित हो चुके थे ।जिन्हें आज सरकार अपना बता रहीहैं। नगला वासी की निगाहें उत्तराखंड सरकार पर हैं ।असमंजस की स्थिति नगला क्षेत्र में बनी हुई है। एक और जहां लोगों के अंदर आक्रोश है। वहीं दूसरी ओर अपने जीवन की महत्वपूर्ण जमा पूंजी व अपने मेहनत के दम पर खड़े किए गए कंक्रीट के मकान उनके दर्द को बाया कर रहे हैं। महिलाएं वह बच्चे पथराई आंखों से अपने टूटे हुए घर को देखकर स्तंभ है। लोगों के अंदर दहशत का माहौल है। उम्मीद की एक किरण धामी सरकार पर है। जो नगला को बचा सकती है।

Hindustan Global Times, Avtar Singh Bisht, journalist from Uttarakhand नगला, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी एवं भारतीय सेना, मैं महत्वपूर्ण भूमिका रही है नगला कवाशियो की ताकि सनत रहे नगला के…

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कत्यूरी सम्राट प्रीतम देव की महारानी जिया का नाम उत्तराखंड की वीर और पौराणिक गाथाओं में सम्मान से लिया जाता है। कत्यूरी राजवंश में माता को जिया कहा जाता है, इसलिए उन्हें जिया रानी कहा जाता है।इतिहासकारों और स्‍थानीय लोगों के मुताबिक जिया रानी धामदेव की मां थी और प्रख्यात उत्तराखंडी लोककथा नायक मालूशाही की दादी थीं। कहा जाता है कि जिया रानी हल्‍द्वानी के रानीबाग में रहीं थीं और उन्होंने यहां अपना बाग सजाया था। जिस कारण इस जगह का नाम रानीबाग पड़ा। जिया रानी पर कई कहावते प्रचलित हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में… रानीबाग में जिया रानी का मंदिर है। माता जिया रानी की गुफा आज भी रानीबाग में स्थित है। मान्‍यता है कि वह गुफा से वह सीधे हरिद्वार निकली थीं। यहां एक विशाल शिला है, जिसे जिया रानी का घाघरा मानकर लोग पूजते हैं। स्‍थानीय परंपराओं के अनुसार माता जिया रानी कत्यूरी वंश की रानी थीं। हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर रानीबाग में कत्यूरी वंश के लोग और सैकड़ों स्‍थानीय लोग अपने परिवार सहित सामूहित पूजा करते हैं। जिसे जागर हैं। उत्तराखंड में जिया रानी की गुफा के बारे में एक किवदंती प्रचलित है। कहा जाता है रानी जिया कत्यूरी राजा पृथ्वीपाल उर्फ प्रीतमदेव की पत्नी थी। वह रानीबाग में चित्रेश्वर महादेव के दर्शन करने आई थीं। रानी जिया बेहद सुंदर थीं। जैसे ही रानी नहाने के लिए नदी पर पहुंचीं तो वहां रुहेलों की सेना ने वहां घेरा डाल दिया। इस दौरान उन्होंने अपने ईष्ट देवताओं का स्मरण किया और गार्गी नदी के पत्थरों में ही समा गईं। नदी के किनारे एक विचित्र रंग की शिला आज भी वहां देखने को मिलती है, जिसे चित्रशिला कहा जाता है। जिया रानी को कुमाऊं में न्याय की देवी के रूप में पूजा जाता है। इतना ही नहीं जिया रानी कई कुलों की आराध्‍य देवी भी हैं।क्या है माता जिया रानी का असली नाम?जिया रानी का वास्तविक नाम मौला देवी था, जो हरिद्वार के राजा अमरदेव पुंडीर की पुत्री थीं। मौला देवी राजा प्रीतमपाल की दूसरी रानी थीं। मौला देवी को राजमाता का दर्जा मिला और उस क्षेत्र में माता को जिया कहा जाता था, इसलिए उनका नाम जिया रानी पड़ गया।क्‍यों कहलाई कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई?माता जिया रानी को कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि माता जिया रानी ने रोहिलो और तुर्कों के आक्रमण के दौरान कुमाऊं की रक्षा की थी और युद्ध में बलिदानी हुईं थी।

स्‍थानीय लोगों का मानना है कि युद्ध के समय जिया रानी ने हीरे-मोती जड़ित लहंगा पहना था। जो बाद में पत्थर बन गया। ये पत्थर आज भी है रानीबाग में…

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आज अनचाही यात्रा पर जाना पड़ सकता है. परिवार में कोई सुखद घटना घट सकती है. नवीन व्यापार अथवा उद्योग शुरू करने में किसी प्रियजन से विशेष सहयोग प्राप्त होगा.

कार्यक्षेत्र में परिश्रम करने की आवश्यकता रहेगी. नौकरी करने वाले लोगों को परिश्रम के अनुरूप लाभ नहीं होगा. व्यापार के लिए स्थिति सामान रहेगी. सुरक्षा में लगे सुरक्षा कर्मियों को […]

कन्या राशि वालों के आज व्यापार में किए गए परिवर्तन लाभकारी सिद्ध होंगे. आजीविका क्षेत्र में कार्यरत व्यक्तियों को नौकरी में अपनी सहयोगियों के साथ अधिक तालमेल बनाने की आवश्यकता रहेगी.

व्यवसाय के क्षेत्र में कार्यरत लोगों को व्यापार में लाभ के संकेत प्राप्त होंगे. छोटी-छोटी यात्रा के अधिक योग बनेंगे. कार्यक्षेत्र में चलिए आ रही बाधाएं कम होगी. धनु राशि […]

देवशयनी एकादशी 6 जुलाई, रविवार को है। हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह एकादशी सालभर में पड़ने वाली सभी एकादशियों में से सबसे खास मानी जाती है, क्योंकि इस एकादशी पर सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु चार माह के लिए क्षीरसागर में योग निद्रा में होते हैं, फिर कार्तिक माह की एकादशी तिथि पर उठते हैं जिसे देवउठनी एकादशी के नाम से जाना जाता है।

देवशयनी एकादशी दिन से ही चातुर्मास शुरू हो जाता है। इस बार देवशयनी एकादशी पर कई तरह के शुभ योग का निर्माण हो रहा है। इस एकादशी पर विधि-विधान के […]

हिंदू धर्म में मंत्रों की विशेष भूमिका होती है, लेकिन इन सभी मंत्रों में गायत्री मंत्र को सर्वोच्च और सबसे प्रभावशाली माना गया है। यह केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत भी है।

हजारों वर्षों से ऋषि-मुनियों द्वारा साधना में प्रयुक्त यह मंत्र न केवल आत्मा की शुद्धि करता है, बल्कि मस्तिष्क को जाग्रत और मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाने में भी अद्भुत […]

संपादकीय;लोकतंत्र में पारदर्शिता की कसौटी: पंचायत चुनाव खर्च और जवाबदेही

उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की प्रक्रिया ज़ोरों पर है। हरिद्वार को छोड़ राज्य के शेष 12 जिलों में लोकतंत्र के इस उत्सव में हज़ारों प्रत्याशी किस्मत आज़मा रहे हैं। […]

उत्तराखंड पंचायत चुनाव: सदस्य पदों पर फीका उत्साह, लोकतंत्र की बुनियाद पर सवाल

उत्तराखंड के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए शनिवार को नामांकन प्रक्रिया समाप्त हो गई। हालांकि आखिरी दिन कुछ हलचल दिखी, लेकिन ग्राम पंचायत सदस्य पदों पर नामांकन की कमी ने […]

संपादकीय हरेला की हरियाली पर नेताओं की सियासी परछाईं

रूद्रपुर के गांधी पार्क और उत्तरायणी पार्क को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सौगात दी है। महापौर विकास शर्मा ने भी इसे अपनी जीत बता दी। स्वागतयोग्य बात है कि […]

ऐतिहासिक नामांकन या ऐतिहासिक भीड़? भारतीय जनता पार्टी समर्थित प्रत्याशी, समाजसेवी जसविंदर सिंह उर्फ बंटी खुराना का नामांकन

जिला पंचायत चुनाव के तहत जिला पंचायत वार्ड-15 (दोपहरिया सीट) से भारतीय जनता पार्टी समर्थित प्रत्याशी, समाजसेवी जसविंदर सिंह उर्फ बंटी खुराना का नामांकन सचमुच ऐतिहासिक कहा जा सकता है। […]

कहीं ‘कुर्सी रोपण कार्यक्रम’ तो नहीं? अबकी बार धान की रोपाई, कुर्सी छोड़ने की नहीं बुलाई!”लेखक: अवतार सिंह बिष्ट, हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स

सावन की रिमझिम फुहारें पड़ते ही उत्तराखंड की धरती पर इस बार कुछ अलग ही हरियाली देखने को मिल रही है। नागरा तराई के खेतों में जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह […]

भारत वर्ष 2030 तक विश्व का तीसरा सबसे बड़ा विमानन बाजार बन जाएगा। देश में मौजूदा हवाई अड्डों की संख्या 162 से बढ़कर वर्ष 2047 तक 350 से 400 के बीच पहुंचने की संभावना है।

यही नहीं, देश को वर्ष 2040 तक विमानन रखरखाव के लिए लगभग 45,000 टेक्नीशियन की आवश्यकता होगी। उत्तर क्षेत्रीय राज्यों के नागरिक उड्डयन मंत्रियों के सम्मेलन में राज्यों के लिए […]