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28 अप्रैल 2026 मंगलवार का दिन और द्वादशी तिथि का संयोग, ब्रह्मांड में एक बड़ी हलचल लेकर आ रहा है. आज का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास है क्योंकि सूर्य देव अपनी उच्च राशि (मेष) में गोचर कर रहे हैं, जो साहस और नेतृत्व का प्रतीक है.

वहीं, चंद्रमा का संचार आज कन्या राशि में होने जा रहा है, जिससे ‘बुध-चंद्र’ का…

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में पुलिस प्रशासन और अनुशासन के बीच एक विचित्र स्थिति उत्पन्न हो गई है. शनिवार की देर रात राजपुर रोड पर स्थित एक नामी बार में समय सीमा समाप्त होने के बावजूद शराब और संगीत का दौर जारी था.

जब पुलिस टीम ने कार्रवाई करने की कोशिश की, तो वहां विभाग के ही एक…

सवाल यह है कि यदि जमीन भी चली जाए और रोजगार भी न मिले, तो उत्तराखंड के हिस्से में आखिर बचा क्या? सरकार को जवाब देना होगा।

संपादकीय: हमारी जमीन, पर हक किसका?गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर कभी भारत…

शिलान्यास की चमक, संगमरमर की राजनीति और उत्तराखंड के असली सवाल

उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों की आहट अब साफ सुनाई देने लगी है।…

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हेमवती नंदन बहुगुणा की जयंती पर हिमालय क्रांति पार्टी ने दी श्रद्धांजलि, 2027 चुनाव को लेकर भरी हुंकार

पौड़ी गढ़वाल, स्वर्गीय Hemvati Nandan Bahuguna की जयंती के अवसर पर हिमालय क्रांति पार्टी (HKP) के जिला कार्यालय पौड़ी में…

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उत्तराखंड के दो खिलाड़ियों का फिग एक्रो जिम्नास्ट वर्ल्ड कप 2026 के लिए चयन

नैनीताल/उत्तराखंड। उत्तराखंड के खेल जगत के लिए गर्व की खबर सामने आई है। प्रदेश के दो प्रतिभाशाली खिलाड़ियों शिवम विश्वास…

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कुमाऊँ की काशी जागेश्वर धाम: जहाँ देवदारों की सांसों में आज भी गूंजता है महादेव का मौन, श्राप से वरदान बनी शिव की दिव्य तपोस्थली

कुमाऊँ की काशी जागेश्वर धाम: देवदारों की सांसों में आज भी गूंजता है महादेव का मौन, श्राप से वरदान बनी शिव की दिव्य तपोस्थली

अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर औचक निरीक्षण सराहनीय, लेकिन रुद्रपुर के 40 वार्डों में खुलेआम बिक रहा ‘मौत का सामान’ — कब जागेगा स्वास्थ्य विभाग?

नेत्रदान-महादान: ऊषा अनेजा मृत्यु के बाद भी देंगी रोशनी, दो लोगों के जीवन में जलेगा उम्मीद का दीप

28 अप्रैल 2026 मंगलवार का दिन और द्वादशी तिथि का संयोग, ब्रह्मांड में एक बड़ी हलचल लेकर आ रहा है. आज का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास है क्योंकि सूर्य देव अपनी उच्च राशि (मेष) में गोचर कर रहे हैं, जो साहस और नेतृत्व का प्रतीक है.

वहीं, चंद्रमा का संचार आज कन्या राशि में होने जा रहा है, जिससे 'बुध-चंद्र' का एक ऐसा मानसिक संतुलन बनेगा जो व्यापारिक निर्णयों के लिए बेहद सटीक साबित होगा. अवतार…

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उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में पुलिस प्रशासन और अनुशासन के बीच एक विचित्र स्थिति उत्पन्न हो गई है. शनिवार की देर रात राजपुर रोड पर स्थित एक नामी बार में समय सीमा समाप्त होने के बावजूद शराब और संगीत का दौर जारी था.

जब पुलिस टीम ने कार्रवाई करने की कोशिश की, तो वहां विभाग के ही एक बड़े अधिकारी की मौजूदगी ने मामले को पेचीदा बना दिया. 'ऑपरेशन प्रहार' के तहत जारी…

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सवाल यह है कि यदि जमीन भी चली जाए और रोजगार भी न मिले, तो उत्तराखंड के हिस्से में आखिर बचा क्या? सरकार को जवाब देना होगा।

संपादकीय: हमारी जमीन, पर हक किसका?गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर कभी भारत की कृषि क्रांति का प्रतीक था। लगभग 16 हजार एकड़ उपजाऊ भूमि पर स्थापित इस…

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शिलान्यास की चमक, संगमरमर की राजनीति और उत्तराखंड के असली सवाल

उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों की आहट अब साफ सुनाई देने लगी है। चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन सत्ता के गलियारों में राजनीतिक पटकथा लिखी जा चुकी है।…

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उच्च न्यायालय ने नया नियम हटाया – देशभर के सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा झटका सामने आया है। हाईकोर्ट ने हाल ही में एक ऐसा फैसला सुनाया है जिसने लाखों कर्मचारियों की धड़कनें बढ़ा दी हैं।

नए नियम के तहत अब कर्मचारियों को 60 साल नहीं बल्कि 55 साल की उम्र में ही रिटायर किया जाएगा। कोर्ट का कहना है कि प्रशासनिक ढांचे में युवाओं को…

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हिन्दू धर्मग्रंथों में चार युग की संकल्पना की गई है। ये हैं- सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग और कलियुग। माना जाता है कि हर युग में मनुष्आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ?

सतयुग

चारों युगों में से सबसे पहला सतयुग है। वह युग जहां पाप, अधर्म, अन्याय और झूठ के लिए कोई जगह नहीं होता है, सतयुग कहा गया है। पुराणों के अनुसार, सतयुग का प्रारंभ कार्तिक महीने में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। ग्रंथों में इस युग की अवधि लगभग 17 लाख 28 हजार वर्ष बताई गई है।

इस युग में देवी-देवता पृथ्वी पर मनुष्य की भांति ही रहते थे। कहते हैं, उनकी आयु लगभग 2 लाख वर्ष होती थी। पुष्कर इस युग का सबसे महान तीर्थ था। इस युग में भगवान विष्णु के 10 मुख्य अवतारों में से मत्स्य, कच्छप, वराह और नरसिंह अवतार हुए थे।

त्रेतायुग

ग्रंथों में त्रेतायुग की अवधि लगभग 12 लाख 28 हजार मानी गई है। इस युग की शुरुआत वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से हुई थी। इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 10,000 वर्ष हुआ करती थी। कहते हैं इस युग सबसे महान तीर्थ नैमिषारण्य था। इस युग में अधर्म का नाश करने के लिए भगवान विष्णु के श्री राम, वामन, परशुराम के अवतार हुए थे।

द्वापरयुग

पुराणों के मुताबिक, द्वापर युग की अवधि लगभग 8 लाख 64 हजार है। यह युग माघ माह के कृष्ण अमावस्या से शुरू हुआ था। हिंदू धर्म ग्रंथों में इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 1000 वर्ष बताई गई है। इस युग का सर्वश्रेष्ठ तीर्थ कुरुक्षेत्र को माना गया है। द्वापर युग में भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण ने धरती पर जन्म लेकर कंस जैसे दुष्टों का संहार किया था।

कलियुग

वर्तमान युग यानी कलियुग की अवधि तीनों युगों में सबसे कम है। इस युग की अवधि 4 लाख 32 हजार वर्ष बताई जाती है। कलियुग की शुरुआत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि से मानी जाती है। यह तिथि इस साल सोमवार 30 सितंबर, 2024 को पड़ रही है।

हैरत की बात है कि इस युग में मनुष्य की आयु लगभग 100 वर्ष ही रह गई है। वहीं, गंगा नदी को कलियुग का सबसे पवित्र तीर्थ स्थान बताया गया है। इस युग में भगवान विष्णु के 9वें अवतार भगवान बुद्ध का जन्म हुआ। भगवान विष्णु का 10वां अवतार कल्कि के रूप में कलियुग के अंत में होगा।

कब खत्म होगा कलियुग?

भारतीय काल-निर्णय के अनुसार कलियुग का अंत होने में अभी 4 लाख 26 हजार 875 साल बाकी हैं। इस समय कलियुग का प्रथम चरण चल रहा है और कलियुग के मात्र 5 हजार 125 साल हुए हैं। बता दें कि कलयुग के कुल अवधि 4 लाख 32 हजार साल के बताई गई है।य की बनावट से लेकर उसके व्यवहार और उम्र में कुछ परिवर्तन आए हैं।

   आइए जानते हैं, कौन-सा युग कब प्रारंभ हुआ, किस युग की क्या विशेषताएं थी और भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से किस युग में कौन-सा अवतार हुआ? सतयुग…

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ताकि सनत रहे नगला पंतनगर, 1960 के दशक से लेकर 1980 तक लोगों की बसायत हुई नगला में, अवगत कराते हुए की नगला में निवास करने वाले लोगों में भारतीय सेवा की तरफ से द्वितीय विश्व युद्ध 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। वही कारगिल युद्ध में भीनगला के लोगों ने भारतीय सेना की तरफ से प्रतिभागी किया। जिसमें 1965 और 70 के बीच नगला में निवासरत, स्वर्गीय सूबेदार मेजर खड़क सिंह बिष्ट जिन्होंने19 71,1965 और 1962 की युद्ध में भारतीय सेना में प्रतिभा किया, नगला बायपास निवासी स्वर्गीय लेस नायक प्रेमचंद पांडे, जो की 1965 से नगला में निवास कर रहे हैं ।द्वितीय विश्व युद्ध 1962 और 1965 की लड़ाई में छह माह तक चीन में कैद रहे.। स्वर्गीय हवलदार मेजर धर्म सिंह का परिवार नगला में 1972 से निवास कर रहे हैं,। 1962 1965 1971 के युद्ध में अदम्य साहस का परिचय देते हुए भारतीय सेना की तरफ से लड़ाई लड़ी। स्वर्गीय सूबेदार आलम सिंह बिष्ट 1982 से नगला में निवासरत 1962 1965 1971 में भारतीय सेना की तरफ से युद्ध में हिस्सा लिया। कर्नल प्रताप सिंह, कारगिल युद्ध में अदम्य साहस का परिचय दिया। बोफोर्स तोप एवं रडार सिस्टम का पूर्ण रूप से प्रतिनिधित्व किया जिन्होंने कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई। राजस्थान बॉर्डर पर अपना एक पाव गवा चुके हैं। सूबेदार आलम सिंह के नाती वर्तमान में आर्मी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर एनडीए रजत बिष्ट S/0 नंदन सिंह बिष्ट के दो पुत्र एनडीए क्वालीफाई करने के उपरांत थल सेना में लेफ्टिनेंट एवं जल सेना में कैप्टन उदित बिष्ट अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्वर्गीय इंदर सिंह थापा 1965 1971 की लड़ाई में वही उनके पुत्र लक्ष्मण सिंह थापा भारतीय सेना से हाल फिलहाल रिटायर हुए हैं। त्रिलोक सिंह जिन्होंने भारतीय सेवा में अपने 8 साल दिए हैं। स्वर्गीय भीम सिंह बिष्ट पैरा कमांडो, आदि कई अन्य लोगों ने जो नगला क्षेत्र में निवास कर रहे हैं देश के लिए बहुत कुछ किया है, वहीं अगर उत्तराखंड राज्य आंदोलन की बात की जाए ,नगला क्षेत्र से अवतार सिंह बिष्ट, हरीश जोशी, एवं उनके परिवार के दो अन्य सदस्य, जगदीश बोहरा, प्रकाश पुजारी, जो की चिन्हित राज्य आंदोलनकारी हैं। परिवार के साथ नगला में 1976 से निवास करते हैं,। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ, उधम सिंह नगर को उत्तराखंड में मिलने के लिए 24,36 व 72 घंटे का जाम और उत्तराखंड राज्य आंदोलन में अनगिनत आंदोलन इनके द्वारा किए गए। दिल्ली फिरोजशाह कोटला मैदान से इंडिया गेट तक का मार्च पास्ट एवं उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। उत्तराखंड राज्य गठन मै महत्वपूर्ण भूमिका इन की रही है। ताकि सनत रहे, उत्तराखंड राज्य आंदोलन में पूरा नगला क्षेत्र एक जुटता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जिसमें सभी जाति धर्म के लोग सम्मिलित होते थे ,मिल का पत्थर साबित हुआ था। पूरे उधम सिंह नगर में नगला क्षेत्र का जबरदस्त ,,विशेष,, असर देखने को मिलता था । नगला की खबर उधम सिंह नगर की खबर बन जाती थी। जिस नगला क्षेत्र को तोड़ने की चर्चा आजकल चल रही है । नगला वासियों ने देश व प्रदेश को एवं समाज को बहुत कुछ दिया है। आज जब नगला क्षेत्र को तोड़ने की कवायत चल रही है। राजेश शुक्ला पूर्व विधायक के द्वारा सराहनीय कार्य नगला को बचाने के लिए किया जा रहा है। नगला क्षेत्र को तोड़ने के लिए सरकारी महकमा भी कहीं ना कहीं असहज महसूस कर रहा है। हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स की तरफ से हम सरकार से मांग करते हैं नगला क्षेत्र के लोगों का एवं नगला मै निवास कर रहे लोगों के अधिकार सुरक्षित हो, विधानसभा पटल पर नगला क्षेत्र को लंबे समय से निवास कर रहे लोगों को मलिकाना हक दिया जाए। और देश, प्रदेश व समाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नगला ,पंतनगर वासियों के अधिकार सुरक्षित किये जाए। उत्तराखंड राज्य की परिकल्पना थी, उत्तराखंड के मूल निवासियों के अधिकार सुरक्षित होंगे। लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार में सबसे ज्यादा जिन्हें नुकसान हुआ है या फिर जिनके घर तोड़ दिए गए या फिर तोड़ दिया जाएंगे। नगला वासी 60 ,70, 80 के दशक में उन जगहों पर नगला मै विस्थापित हो चुके थे ।जिन्हें आज सरकार अपना बता रहीहैं। नगला वासी की निगाहें उत्तराखंड सरकार पर हैं ।असमंजस की स्थिति नगला क्षेत्र में बनी हुई है। एक और जहां लोगों के अंदर आक्रोश है। वहीं दूसरी ओर अपने जीवन की महत्वपूर्ण जमा पूंजी व अपने मेहनत के दम पर खड़े किए गए कंक्रीट के मकान उनके दर्द को बाया कर रहे हैं। महिलाएं वह बच्चे पथराई आंखों से अपने टूटे हुए घर को देखकर स्तंभ है। लोगों के अंदर दहशत का माहौल है। उम्मीद की एक किरण धामी सरकार पर है। जो नगला को बचा सकती है।

Hindustan Global Times, Avtar Singh Bisht, journalist from Uttarakhand नगला, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी एवं भारतीय सेना, मैं महत्वपूर्ण भूमिका रही है नगला कवाशियो की ताकि सनत रहे नगला के…

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कत्यूरी सम्राट प्रीतम देव की महारानी जिया का नाम उत्तराखंड की वीर और पौराणिक गाथाओं में सम्मान से लिया जाता है। कत्यूरी राजवंश में माता को जिया कहा जाता है, इसलिए उन्हें जिया रानी कहा जाता है।इतिहासकारों और स्‍थानीय लोगों के मुताबिक जिया रानी धामदेव की मां थी और प्रख्यात उत्तराखंडी लोककथा नायक मालूशाही की दादी थीं। कहा जाता है कि जिया रानी हल्‍द्वानी के रानीबाग में रहीं थीं और उन्होंने यहां अपना बाग सजाया था। जिस कारण इस जगह का नाम रानीबाग पड़ा। जिया रानी पर कई कहावते प्रचलित हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में… रानीबाग में जिया रानी का मंदिर है। माता जिया रानी की गुफा आज भी रानीबाग में स्थित है। मान्‍यता है कि वह गुफा से वह सीधे हरिद्वार निकली थीं। यहां एक विशाल शिला है, जिसे जिया रानी का घाघरा मानकर लोग पूजते हैं। स्‍थानीय परंपराओं के अनुसार माता जिया रानी कत्यूरी वंश की रानी थीं। हर साल मकर संक्रांति के अवसर पर रानीबाग में कत्यूरी वंश के लोग और सैकड़ों स्‍थानीय लोग अपने परिवार सहित सामूहित पूजा करते हैं। जिसे जागर हैं। उत्तराखंड में जिया रानी की गुफा के बारे में एक किवदंती प्रचलित है। कहा जाता है रानी जिया कत्यूरी राजा पृथ्वीपाल उर्फ प्रीतमदेव की पत्नी थी। वह रानीबाग में चित्रेश्वर महादेव के दर्शन करने आई थीं। रानी जिया बेहद सुंदर थीं। जैसे ही रानी नहाने के लिए नदी पर पहुंचीं तो वहां रुहेलों की सेना ने वहां घेरा डाल दिया। इस दौरान उन्होंने अपने ईष्ट देवताओं का स्मरण किया और गार्गी नदी के पत्थरों में ही समा गईं। नदी के किनारे एक विचित्र रंग की शिला आज भी वहां देखने को मिलती है, जिसे चित्रशिला कहा जाता है। जिया रानी को कुमाऊं में न्याय की देवी के रूप में पूजा जाता है। इतना ही नहीं जिया रानी कई कुलों की आराध्‍य देवी भी हैं।क्या है माता जिया रानी का असली नाम?जिया रानी का वास्तविक नाम मौला देवी था, जो हरिद्वार के राजा अमरदेव पुंडीर की पुत्री थीं। मौला देवी राजा प्रीतमपाल की दूसरी रानी थीं। मौला देवी को राजमाता का दर्जा मिला और उस क्षेत्र में माता को जिया कहा जाता था, इसलिए उनका नाम जिया रानी पड़ गया।क्‍यों कहलाई कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई?माता जिया रानी को कुमाऊं की रानी लक्ष्मीबाई कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि माता जिया रानी ने रोहिलो और तुर्कों के आक्रमण के दौरान कुमाऊं की रक्षा की थी और युद्ध में बलिदानी हुईं थी।

स्‍थानीय लोगों का मानना है कि युद्ध के समय जिया रानी ने हीरे-मोती जड़ित लहंगा पहना था। जो बाद में पत्थर बन गया। ये पत्थर आज भी है रानीबाग में…

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सावन महीने के शुक्‍ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी पर्व मनाते हैं. यह त्‍योहार नाग देवता और भगवान शंकर को समर्पित है. साथ ही कुंडली में बनने वाले बेहद अशुभ योग काल सर्प दोष से निजात पाने के लिए अहम दिन होता है.

क्‍योंकि काल सर्प दोष जातक को हर क्षेत्र में भारी कष्‍ट देता है. संवाददाता,शैल ग्लोबल टाइम्स/ हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स /उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी, अवतार सिंह बिष्ट नागपंचमी 2025 नागपंचमी के दिन […]

3 जुलाई से शुरू हो रही विश्व प्रसिद्ध अमरनाथ यात्रा की तैयारियों का ट्रायल रन किया गया. इस ट्रायल रन में यात्री बसों को पूरी सुरक्षा के साथ बेस कैंप से रवाना किया गया. हालांकि, इस बस में कोई यात्री सवार नहीं था.

जम्मू से लेकर उधमपुर और रामबन से बनिहाल तक सुरक्षा एजेंसियां और प्रशासनिक अमला चौंकन्ना नजर आया. संवाददाता,शैल ग्लोबल टाइम्स/ हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स /उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी, अवतार सिंह बिष्ट सुरक्षा […]

1 जुलाई 2025 का दिन बारह राशियों के लिए कई तरह के अनुभव लेकर आया है। आज का दिन किसी के लिए उत्साह और नए अवसरों का द्वार खोल सकता है, तो किसी के लिए यह सतर्कता और सावधानी की चेतावनी दे रहा है।

मंगलवार को ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति में बदलाव का असर सभी राशियों पर देखने को मिल रहा है, जिससे व्यापार, स्वास्थ्य, पारिवारिक जीवन और मान-सम्मान में उतार-चढ़ाव नजर आ सकते हैं। […]

संपादकीय लेख पहाड़ों पर दौड़ रही हैं धुएं उगलती कबाड़ गाड़ियां, उत्तराखंड सरकार कब जागेगी?

उत्तराखंड दिल्ली में आज से सख्ती शुरू हो गई है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के आदेश के मुताबिक, 15 साल पुरानी पेट्रोल और 10 साल पुरानी डीजल गाड़ियां पेट्रोल […]

उत्तराखंड के ज्योतिर्मठ के पास निहंगों और एक स्थानीय व्यवसायी के बीच हिंसक झड़प के बाद पुलिस ने सोमवार को सात तीर्थयात्रियों को गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों ने बीच-बचाव करने आए एक पुलिस अधिकारी पर भी धारदार हथियारों से हमला कर दिया जिसमें वह घायल हो गया। संवाददाता,शैल ग्लोबल टाइम्स/ हिंदुस्तान ग्लोबल […]

उत्तराखंड से आंध्र तक संगठन की बिसात! बीजेपी के 4 राज्यों में प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में क्या है असल गणित? ✍️ अवतार सिंह बिष्ट, संपादक, हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स / शैल ग्लोबल टाइम्स / उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी

रुद्रपुर,भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राजनीति में संगठनात्मक ढांचा उसकी असली ताकत रहा है। सत्ता की सीढ़ियाँ संगठन के रास्ते से ही चढ़ी जाती हैं, और इसीलिए भाजपा ने अब […]

संपादकीय लेख हिमालय की पुकार: ग्लेशियरों पर मंडराता संकट और हमारी जिम्मेदारी

उत्तराखंड हिमालय—जिसे हम श्रद्धा से देवभूमि कहते हैं—आज अपने अस्तित्व के सबसे बड़े संकट से जूझ रहा है। हाल ही में उत्तराखंड सेवा निधि परिसर में आयोजित कार्यक्रम में ट्रैकर […]

संपादकीय सत्ता, गणित और पंचायत : क्या लोकतंत्र का अर्थ केवल कुर्सी पर काबिज़ रहना है?

ऊधमसिंहनगर जिले की राजनीति में इन दिनों एक अजीब-सी सरगर्मी है। सुरेश गंगवार के आरोपों ने सियासी गलियारों में हलचल और आम जनता में बेचैनी पैदा कर दी है। आरोप […]

राज्य आंदोलनकारियों का आरक्षण: न्याय और नीति के बीच फंसा एक सवालराज्य आंदोलनकारियों को आरक्षण देने के मामले में मांगा सरकार से जवाब। कोर्ट ने उत्तराखंड में अलग राज्य आंदोलनकारियों को 10 प्रतिशत आरक्षण नहीं दिए जाने के मामले में सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को विस्तृत जवाब पेश करने को कहा है।

मामले में अगली सुनवाई को दो जुलाई की तिथि नियत की है। सोमवार को मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी नरेंद्र व न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ में सुनवाई के दौरान राज्य […]

उत्तराखंड में बारिश का कहर: कुमाऊं मंडल में 54 सड़कें बंद, प्रशासन अलर्ट मोड पर

रुद्रपुर/हल्द्वानी। उत्तराखंड में मानसून की सक्रियता ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश के चलते जगह-जगह भूस्खलन और मलबा गिरने की घटनाएं सामने आ […]