नैनीताल की पहाड़ियां खिसकने का खतरा, 1880 जैसी त्रासदी की चेतावनी; फर्जी प्रमाणपत्र से MBBS दाखिले का मामला भी गरमाया

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देहरादून/नैनीताल। उत्तराखंड से जुड़ी दो गंभीर खबरों ने चिंता बढ़ा दी है। नैनीताल की पहाड़ियों पर हुए वैज्ञानिक अध्ययन में 68.62 वर्ग किमी क्षेत्र में 24.9 प्रतिशत हिस्सा उच्च भूस्खलन जोखिम वाला पाया गया है। अध्ययन के अनुसार पहाड़ियों में सालाना 10 से 19 मिलीमीटर तक भू-गतिशीलता दर्ज हुई है और 2023 में गतिविधि अधिक रही। बलियानाला क्षेत्र में जमीन धंसने तथा शेर-का-डांडा रिज में भू-भाग के ऊपर उठने की स्थिति भी सामने आई है। वैज्ञानिकों ने संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार उपग्रह आधारित निगरानी की आवश्यकता बताई है। 1880 में शेर-का-डांडा में हुए विनाशकारी भूस्खलन में 151 लोगों की जान गई थी।
वहीं दूसरी ओर, स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे से MBBS दाखिले में कथित फर्जी प्रमाणपत्रों का मामला सामने आया है। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद चार छात्राओं के दाखिले रद्द कर दिए गए हैं। देहरादून जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट के आधार पर HNB मेडिकल एजुकेशन यूनिवर्सिटी ने यह कार्रवाई की। मामले में क्लेमेंट टाउन और रायपुर थानों में अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
दोनों मामलों में प्रशासनिक और संस्थागत स्तर पर जांच तथा निगरानी आगे बढ़ रही है।

अवतार सिंह बिष्ट | हिंदुस्तान ग्लोबल टाइम्स, रुद्रपुर, उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारी उत्तराखंड


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